...तो दुनिया पर मंडरा रहा इबोला वायरस का खतरा!

...तो दुनिया पर मंडरा रहा इबोला वायरस का खतरा!

ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली : पश्चिम अफ्रीका देशों गिनी, सियरा लियोन और लाइबेरिया में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन परेशान है। पश्चिम अफ्रीकी देश इबोला के अब तक के सबसे बुरे प्रकोप से दौर गुजर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि इबोला वायरस कहीं पूरी दुनिया को ही चपेट में न ले ले। इबोला वायरस के खतरे से अमेरिका भी परेशान हो उठा है। अमेरिकी शांति सेना ने तीन देशों से अपने सैकड़ों स्वयंसेवकों को बाहर निकाल लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि दो स्वयंसेवकों को अलग रखा जा रहा है क्योंकि वह विषाणु की चपेट में आकर मारे गए एक व्यक्ति के संपर्क में थे।

क्या है इबोला वायरस

इबोल वायरस एक ऐसा वायरस है, जिससे इबोला वायरस बीमारी (ईवीडी) या इबोला रक्तस्त्राव बुखार (ईएचएफ) होता है।  सबसे पहले ये वायरस 1976 में सुडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पाया गया था। इसके लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 2 दिन से 3 हफ्ते में फैलते हैं। इसके लक्षण हैं- बुखार आना, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, उल्टी, डायरिया आदि हैं। इससे लीवर और किडनी काम करना कम कर देते हैं। इस स्थिति में कुछ लोगों में रक्तस्त्राव की समस्या शुरू हो जाती है। इबोला का ना तो कोई टीका है और ना ही विशेष इलाज है। इसकी मृत्यु दर कम से कम 60 प्रतिशत है।

फैलने के कारण

ये वायरस संक्रमित जानवर विशेष तौर में बंदर, चमगादड़ या उड़ने वाली लोमड़ी और सुअरों के खुन या शरीर के तरल पदार्थ से फैलता है। अब तक इस बीमारी का कोई विशेष उपचार नहीं है। फिर भी इससे ग्रस्त लोगों की मदद के लिए उन्हें ओरल रिहाईड्रेशन थैरेपी, जिसमें रोगी को मीठा और नमकीन पानी पीने के लिए दिया जाता है या नसों में तरल पदार्थ दे सकते हैं। इस रोग में मृत्यु दर काफी ऊंची है।

लाइबेरिया की राष्ट्रपति ने विषाणु के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश के स्कूलों को बंद करने और अधिकतर सरकारी कर्मचारियों को घर में रहने के आदेश दिए हैं। इबोला की चपेट में आकर पश्चिम अफ्रीका में अब तक 670 से अधिक लोग मारे गए हैं।

डब्ल्यूएचओ ने जारी की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पश्चिमी अफ्रीका के इबोला विषाणु प्रभावित राष्ट्रों को चेतावनी दी कि यह महामारी काबू से बाहर हो रही है और अन्य देशों में फैल सकती है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है और गंभीर आर्थिक समस्या आ सकती है।

डब्ल्यूएचओ की प्रमुख मार्गरेट चान ने गिनी, सियरा लियोन और लाइबेरिया के नेताओं के एक क्षेत्रीय सम्मेलन में बताया कि इस महामारी के खिलाफ प्रतिक्रिया अपर्याप्त है जिससे यह खुलासा होता है कि यह महामारी हमारे काबू पाने की कोशिशों से कहीं तेजी से फैल रहा है। ये नेता महामारी के जवाब में 10 करोड़ डॉलर की आपात सहायता के तहत सैकड़ों अतिरिक्त मेडिकलकर्मियों की तैनाती के लिए गिनी की राजधानी कोनाक्री में हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 887 हो गई है। उसने बताया कि बृहस्पतिवार से रविवार के बीच 122 नये मामले सामने आएं हैं। इस तरह कुल 1300 मामले सामने आ चुके हैं।

विश्व बैंक देगा 20 करोड़ डॉलर की मदद

विश्व बैंक ने कहा है कि वह गिनी, लाइबेरिया और सीएरा लियोन जैसे पश्चिम अफ्रीकी देशों को इबोला महामारी से मुकाबले के लिए 20 करोड़ डॉलर की मदद मुहैया कराएगा।

विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने कहा कि इस वायरस के प्रसार पर वह निगरानी बनाए हुए हैं और वह इस बात से बहुत दुखी हैं कि स्वास्थ्य के मामले में पहले से ही कमजोर इन तीनों देशों को यह बीमारी और कमजोर कर रही है। जिम योंग किम स्वयं संक्रमित बीमारियों के विशेषज्ञ हैं।

विश्व बैंक ने यह घोषणा ऐसे समय की है जब 35 देशों के राष्ट्रपति सहित अफ्रीकी देशों के नेता अमेरिका-अफ्रीका सम्मेलन के लिए वाशिंगटन की यात्रा कर रहे हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)