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महंगाई डायन की आस्था में `घुसपैठ`

महंगाई, इस शब्‍द के कान में पड़ते ही रूह कांपने लगती है। जीवन को लीलने के लिए तैयार महंगाई से सिर्फ देश की आम जनता ही नहीं, बल्कि हर तबके के लोग त्रस्‍त हैं। जिंदगी जीने के लिए पहले से ही न जानें क्‍या क्‍या और किन किन चीजों का जुगाड़ करना पड़ता था और अब इस महंगाई ने तो ऐसा कहर ढाया है कि जुगाड़ भी अब बेमानी नजर आने लगे हैं।

सुनील पाण्डेय
महंगाई, इस शब्‍द के कान में पड़ते ही रूह कांपने लगती है। जीवन को लीलने के लिए तैयार महंगाई से सिर्फ देश की आम जनता ही नहीं, बल्कि हर तबके के लोग त्रस्‍त हैं। जिंदगी जीने के लिए पहले से ही न जानें क्‍या क्‍या और किन किन चीजों का जुगाड़ करना पड़ता था और अब इस महंगाई ने तो ऐसा कहर ढाया है कि जुगाड़ भी अब बेमानी नजर आने लगे हैं। यानी महंगाई ने जीते जी अब लोगों को अपना ग्रास बनाना शुरू कर दिया है। सुरसा के मुंह की तरह दिन ब दिन फैलती जा रही महंगाई और न जानें और क्‍या सितम ढाएगी? इसके बढ़ते दायरे में अब जिंदगी से जुड़ा कोई भी ऐसा पहलू नहीं है, जो अछूता हो।
महंगाई डायन के प्रकोप से क्या अमीर और क्या गरीब, हर कोई परेशान है। इस डायन ने तो कांग्रेस की सरकारों को निगल लिया। अब तो इसकी `घुसपैठ` आस्था में भी हो गई है। किचन में तो इसका डंका पहले से ही बजता आ रहा है। अब पूजा-पाठ कराना भी महंगा हो रहा है।
हम बात कर रहे हैं, दिल्ली के गुरुद्वारों की जहां अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड साहिब का पाठ कराना भी महंगा हो जाएगा। मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा एक ऐसी आस्था की चौखट है, जहां हर कोई सुख और दुख में अपने ईष्ट को याद करते हैं। लेकिन, महंगाई ने इस चौखट को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है। दिल्ली के गुरुद्वारों में अब अखंड पाठ कराने के लिए एक हजार रुपये ज्यादा देने होंगे। अब अखंड पाठ की सेवा के लिए 4100 रुपये लिया जाएगा। अभी तक 3100 रुपये लिया जाता रहा है। ज्ञात हो कि गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ 48 घंटे चलते हैं। यह फैसला किसी और की तरफ से नहीं बल्कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से लिया गया है।

कमेटी की 15 सदस्यीय विशेष कार्यकारिणी की ओर से हुए फैसले के मुताबिक काफी अर्से से अखंड पाठ की सेवा दर नहीं बढ़ाई गई थी। इस पाठ में शामिल होने वाले 5 से 6 पाठी (पाठ करने वाले) को भत्ता दिया जाता है, जिसकी रकम 350 रुपये थी। महंगाई के इस दौर में यह रकम बहुत कम थी, इसलिए कमेटी ने उनकी रकम (भत्ता) को बढा़कर 500 रुपये करने का फैसला लिया है।
बता दें कि श्री अखंड साहिब का पाठ सिख संगत खुशी और गम दोनों स्थिति में करवाता है। कोई बेटे-बेटी की शादी के लिए तो कोई बरसी सहित अन्य धार्मिक आयोजनों के उपलक्ष्य में। दिल्ली में 500 से अधिक गुरुद्वारे हैं, लेकिन ऐतिहासिक सिर्फ 10 गुरुद्वारे ही हैं। बाकी सभी गुरुद्वारे सिंह सभाओं से जुड़े हैं। श्री अखंड साहिब का पाठ सभी गुरुद्वारों पर होता है। बड़े गुरुद्वारों की बात करें तो कई जगहों पर वेटिंग है तो कई गुरूद्वारों में एडवांस बुकिंग होती है। सिर्फ बंगला साहिब गुरुद्वारे की बात करें तो वहां अमूमन रोजाना 10 से 12 श्री अखंड साहिब के पाठ होते हैं। अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में तो 3 से 4 साल की एडवांस बुकिंग चल रही है। गौरतलब है कि पाठ करने में आम तौर पर 5 से 6 पाटी होते हैं। एक पाठी की दो-दो घंटे ड्यूटी लगती है। ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे तक पाठ चलता है।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सलाहकार (मीडिया) परमिंदर पाल सिंह के शब्‍दों पर यकीन करें तो पाठी सिहों की बहुत समय से मांग थी कि उनका मेहनताना बढ़ाया जाए। गुरुद्वारा कमेटी ने अपनी पिछली कार्यकारिणी की मीटिंग में उनकी मांगों को मंजूर कर लिया था लेकिन उसका बोझ संगत पर अब डाला गया है। उनका यह भी कहना है कि शिरोमणि अकाली दल ने चुनावों के पहले अपने घोषणा पत्र में कर्मचारियों से वायदा किया था कि वह आए तो उनकी सभी मांगों पर विचार होगा। कमेटी सहित दिल्ली में उनकी जीत होने के बाद पार्टी एक-एक करके उनके डिमांडों को पूरा कर रही है। यह घोषणा भी उसी कड़ी का हिस्सा है।
(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं और इस लेख में व्‍यक्‍त विचार उनके निजी हैं)