बांसवाड़ा के लड़के-लड़कियों के लिए रिश्ता लेकर जाने वाले रखें इस बात का ध्यान

अभियान का एक ही काम है कि समाज के लोगों को शराब और मांसाहार के सेवन करने से रोकना. यहां पर घरों के बाहर लगा झंडा देता है शाकाहारी होने का संदेश.   

बांसवाड़ा के लड़के-लड़कियों के लिए रिश्ता लेकर जाने वाले रखें इस बात का ध्यान
प्रतीकात्मक तस्वीर.

अजय ओझा, बांसवाड़ा: प्रदेश का जनजाति अंचल कहे जाने वाले बांसवाड़ा जिले में आदिवासी समाज में अंदर ही अंदर एक ऐसा अभियान चल रहा है, जिसके कारण समाज आज मुख्य धारा पर आ रहा है. 

इस अभियान का एक ही काम है कि समाज के लोगों को शराब और मांसाहार के सेवन करने से रोकना. यहां पर घरों के बाहर लगा झंडा देता है शाकाहारी होने का संदेश. 

जी हां, जिले के किसी भी गांव में जहां पर आदिवासी समाज का घर है और उस घर के बाहर धार्मिक झंडा लगा हुआ मिला तो आप समझ लेना कि इस घर में न तो शराब चलती है, न ही यहा पर मांसाहार का सेवन होता है. 

इतना ही नहीं, यह परिवार अपने बच्चों की शादी भी शाकाहारी परिवार में ही करवाता है. ऐसे परिवार को यहां पर भगत परिवार कहा जाता है. जिले में शराब के नशे में अक्सर बड़े-बड़े अपराध हो जाते थे और समाज मुख्य धारा से पिछड़ता जा रहा था पर गोविंद गुरू महाराज, मावजी महाराज और मामा बालेश्वर दयाल महाराज ने अपने अपने स्तर से एक अलख जगाई और आदिवासी समाज को भक्ति भाव से जोड़ा. उनको शराब और मांसाहार से दूर रखा. 

जब इन संतों ने यह अभियान शुरू किया था, तब कुछ ही परिवार ही जुड़े थे पर अबतक हजारों परिवार भगत बन गए हैं और उनके घर में सादा खाना बनता है. इस अभियान से इस समाज में अपराध में भी कमी आई है. 

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