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आग की लपटों के बीच मां की भक्ति में गरबा खेलते भक्त | VIDEO देखकर रह जाएंगे दंग

हाथों में तलवार और मशाल लेकर युवा गरबा खेलते हैं. इतना ही नहीं यहां के युवा मशाल हाथ में रखकर आग की लपटों पर गरबा रास खेलते हैं. ये परंपरा यहां सदियों पुरानी चली आ रही है.

आग की लपटों के बीच मां की भक्ति में गरबा खेलते भक्त | VIDEO देखकर रह जाएंगे दंग
गुजरात में आग के बीच खेला जाता है गरबा.

जामनगर: नवरात्र (Navratri 2019) के 5वें दिन गुजरात में भारी बारिश के बीच भी गरबा का क्रेज कम नहीं हुआ है. जामनगर में भी अनोखे अंदाज में गरबे की धूम है. यहां परंपरा को कायम रखने के लिए आज भी ट्रेडिशनल गरबे का आयोजन होता है. हाथों में तलवार और मशाल लेकर युवा गरबा खेलते हैं. इतना ही नहीं यहां के युवा मशाल हाथ में रखकर आग की लपटों पर गरबा रास खेलते हैं. ये परंपरा यहां सदियों पुरानी चली आ रही है.

ये आग के बीच मशालों के साथ रास खेलने वाले युवक जामनगर के रंजीतनगर पाटीदार मंडल के हैं. इस मंडल ने प्राचीन परंपरा को संभाल कर रखा है. खेलैया डांडिया और रास तो खेलते ही हैं, लेकिन प्राचीन दांतरडा रास, मशाल रास और तलवार रास यहां का मुख्य आकर्षण नजर आता है. युवा गरबा खेलैया जब तलवार और मशाल के साथ गरबा रास के लिए प्रांगण में उतरते हैं, तब उन्हें देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में यहां लोग जमा हो जाते हैं. 

यहां आने वाले लोग रास देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. यह आयोजन पिछले सात दशक से यहां आयोजित हो रहा है. इस तरह के गरबे का आयोजन का मकसद प्राचीन परंपरा को कायम रखना है. इस स्पेशल पारंपरिक रास गरबा को खेलने के लिए युवा दो महीने पहले से ही प्रैक्टिस में लग जाते हैं. इस पारंपरिक गरबा रास की हर स्टेप कड़ी मेहनत कर सीखते हैं. क्योंकि इनके हाथों में सिर्फ मशाल तलवार ही नहीं होती परन्तु दहकते अंगारों पर ये युवा रास गरबा करते हैं, वो भी नंगे पैर ये युवा बड़े आराम से रास गरबा खेलते नजर आते हैं.  

खतरनाक रास गरबा खेलने के पीछे उनकी तैयारी के साथ मां शक्ति के प्रति एक बहुत बड़ी आस्था है, जो दहकते अंगारों के बीच रास खेलने से इनका कोई डर इन्हें नहीं रोक पाता. यहां के युवाओं द्वारा इस तरह का पारम्परिक साहस वाकई उनकी प्रशंसा करने से नहीं रोक पाता. यह न तो कोई ऑर्केस्ट्रा या फ़िल्मी गानों के बिच गरबा खेला जाता है न ही आधुनिक डांस वाला गरबा होता है, यहां होता है हारमोनियम, ढोल, तबले और शहनाई की मदद से पारम्परिक गरबा. आज भी कायम है जो अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाये हुए है. यहां के युवा आज भी किसी कॉमर्शियल गरबा खेलने के बजाय अपने इस पारंपरिक गरबा रास को खेलना ही पसंद कर रहे हैं.