Covid-19 Crisis: 'सिलेंडर वाली बिटिया' के नाम से मशहूर है Shahjahanpur की अर्शी, जानिए पूरा मामला

देश में कोरोना वायरस (Coronavirus In India) संक्रमण का कहर जारी है. इस दौरान शाहजहांपुर में 26 साल की एक लड़की (Shahjahanpur Girl) स्कूटी पर ऑक्सीजन सिलेंडर (Oxygen Cylinder) रखकर सबकी मदद कर रही है.

Covid-19 Crisis: 'सिलेंडर वाली बिटिया' के नाम से मशहूर है Shahjahanpur की अर्शी, जानिए पूरा मामला
सिलेंडर वाली बिटिया

शाहजहांपुर: साल 2021 में कोरोना वायरस (Coronavirus In India) के नए वेरिएंट ने देशवासियों के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऑक्सीजन सिलेंडर (Oxygen Cylinder) से लेकर कोरोना की दवाइयों (Corona Medicines) और इंजेक्शन (Corona Injection) तक की व्यवस्था कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है. यहां तक कि मरीजों को हॉस्पिटल में भी जगह नहीं मिल पा रही है. इसी बीच शाहजहांपुर (Shahjahanpur) की एक लड़की 'सिलेंडर वाली बिटिया' (Cylinder Girl) के तौर पर मशहूर हो रही है.

ऑक्सीजन के लिए झेली मुसीबत

कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के बीच ऑक्सीजन की चुनौतियों से जूझ रहे अपने पिता को बचाने के लिए शाहजहांपुर की एक बेटी (Shahjahanpur Girl) ने व्यक्तिगत प्रयासों से न केवल पिता के लिए ऑक्सीजन का प्रबंध किया बल्कि अब वह आम लोगों के लिए भी बड़ी मददगार बन गई है और लोग उसे 'सिलेंडर वाली बिटिया' के नाम से जानने लगे हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें, देशभर में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के सबकी मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. उसी तरह से शाहजहांपुर जिले की रहने वाली 26 वर्षीय अर्शी अपनी स्कूटी पर ऑक्सीजन सिलेंडर (Oxygen Cylinder) रखकर कोविड 19 (Covid 19) के मरीजों के घर तक पहुंचा रही हैं.

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पिता की परेशानी से समझी हालत

शाहजहांपुर (Shahjahanpur) नगर के मदार खेल मोहल्ले में रहने वाली अर्शी के पिता मशहूर की रमजान (Ramzan) के पहले ही दिन तबीयत खराब हो गई थी और कोविड 19 की जांच में वे संक्रमित पाए गए थे. डॉक्टर ने ऑक्सीजन की व्यवस्था करने को कहा था, जिसके बाद अर्शी एक अधिकारी के पास गई थीं. हालांकि उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि होम आइसोलेशन (Home Isolation) में रह रहे मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और मरीज को हॉस्पिटल में एडमिट करने की सलाह दी थी.

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व्हॉट्सऐप ग्रुप से मिली थी मदद

अर्शी ने पीटीआई (PTI) 'भाषा' को बताया कि वे एक व्हॉट्सऐप ग्रुप (WhatsApp Group) की मेंबर हैं, जिसमें उन्होंने ऑक्सीजन के लिए मैसेज डाला था. तब उत्तराखंड की एक समाजसेवी संस्था (Uttarakhand NGO) ने उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर (Oxygen Cylinder) मुहैया कराया था और उसके पापा ठीक हो गए थे. ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए होने वाली परेशानी को अर्शी ने बहुत करीब से महसूस किया और इसलिए उन्होंने तय किया कि वे कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराएंगी. इसके बाद उनके ग्रुप और फोन पर जिसने भी ऑक्सीजन की जरूरत बताई, अर्शी ने उनकी मदद की.

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फ्री में कर रही हैं समाज सेवा

जहां एक तरफ देश कोरोना काल (Coronavirus) में हो रही कालाबाजारी से परेशान है, वहीं अर्शी सभी को फ्री में ऑक्सीजन सिलेंडर दिलवा रही हैं. इसके लिए उन्होंने दो खाली सिलेंडर की व्यवस्था की है और उन्हें शाहाबाद, हरदोई और उत्तराखंड तक से रीफिल कराकर लोगों के घरों तक पहुंचाया है. अर्शी करीब 20 ऑक्सीजन सिलेंडर लोगों के घरों तक पहुंचा चुकी हैं और इस काम में उनके दो भाई और ग्रुप से जुड़े लोग पूरी मदद कर रहे हैं.

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