close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

रातों-रात बदल गई पेंटर की किस्मत और बन गया करोड़पति, जानें कैसे हुआ यह कमाल

ऊना में घरों में सफेदी करने बाला संजीव कुमार पेंटर अब करोड़पति बन गया है. इस पेंटर ने इस दिवाली का लकी टिकट खरीदा था, जिसके बाद रातोंरात इसकी किस्मत चमक गई और अब यह करोड़पति बन गया.

रातों-रात बदल गई पेंटर की किस्मत और बन गया करोड़पति, जानें कैसे हुआ यह कमाल
ऊना में पेंटर का काम करते हैं संजीव

राकेश मालही, ऊनाः ऊना में घरों में सफेदी करने बाला संजीव कुमार पेंटर अब करोड़पति बन गया है. इस पेंटर ने इस दिवाली का लकी टिकट खरीदा था, जिसके बाद रातोंरात इसकी किस्मत चमक गई और अब यह करोड़पति बन गया. संजीव कुमार ने इस पैसे को अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए और अपना कारोबार शुरू करने के लिए संभालकर रखने की बात कही है. परिवार में बधाई देने बालो का ताँता लगा हुआ है और मिठाई खिलाकर मुँह मीठा करवाया जा रहा है लाटरी निकलने से परिवार के लोग काफी खुश है

हिमाचल के जिला ऊना के चुरूडू गांव के रहने वाले संजीव को ढाई करोड़ की लॉटरी लगी है. पेंटर का काम कर अपने परिवार को पालने वाले संजीव को जब पता चला की उसकी ढाई करोड़ की लॉटरी लगी है तो उसकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा. पीजीआई में अपने बेटे का चेक करवाने के बाद लौटते बक्त उन्होंने नंगल के एक लॉटरी विक्रेता से चुरूडू पंजाब स्टेट की दिवाली बंपर लॉटरी के दो टिकट पांच-पांच सौ रुपये में खरीदा था. एक टिकट इन्होंने लिया, दूसरा इसके बेटे अरमान ने लिया.

बैंड-बाजे के साथ यहां निकली नंदी की बारात, जानें क्यों हुई गाय के साथ शादी

बेटे ने जो टिकट खरीदा था उस टिकट नंबर ए-411577 नंबर की लॉटरी को प्रथम ईनाम 2.50 करोड़ का निकला है. संजीव ने बताया कि वह लोगों के घरों में पेंट और सफेदी कर अपने परिवार का गुजारा करते हैं. उनके परिवार में एक बेटी, एक बेटा, पत्नी और पिता हैं. उन्होंने लॉटरी टिकट खरीदते समय नहीं सोचा था कि इतना बड़ा ईनाम निकलेगा. जब लॉटरी वाले का फोन आया तो खुशी का ठिकाना नहीं था. लॉटरी निकलने की बात इन्होंने परिवार को बताई, लेकिन सच्चाई का पता लगाने के लिए वह खुद लॉटरी विक्रेता के पास पहंचे और पूरी जांच की. फिर उन्हें यकीन हुआ कि उनकी लॉटरी निकली है.

देखें LIVE TV

डीएम ने अपनी बिल्ली को खोजने के लिए अपनाया सोशल मीडिया का रास्ता

संजीव कुमार के पिता से जब बेटे की लॉटरी के बारे में पूछा गया तो उनकी आखो से आंसू निकल पड़े. उन्होंने बताया कि वह बिजली बोर्ड से रिटायर्ड हैं. जो पैसा मिला उसको दोनों बेटो को दे दिया, लेकिन संजीव कुमार को विदेश में भेजने के लिए ट्रेवल एजेंट ने उनसे लाखों रूपये लेकर भी उनके बेटे को विदेश नहीं भेजा और आज तक उनका बेटा मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट भर रहा है. वह अपने बेटे को अपनी विधवा बहन को आर्थिक मदद करने की बात कहकर इस पैसे को संभालकर रखने की नसीहत दे रहे हैं.