कोटा: MBS अस्पताल में मिली 2 दिन के नवजात को नई जिंदगी, डॉक्टर ने की ब्रेन की सफल सर्जरी

न्यूरोसर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ एस एन गौतम ने बताया कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 21 नवंबर को नवजात के जन्म के तुरंत बाद नीचे गिर जाने से सिर में चोट लग गई थी.

कोटा: MBS अस्पताल में मिली 2 दिन के नवजात को नई जिंदगी, डॉक्टर ने की ब्रेन की सफल सर्जरी
ऑपरेशन के बाद अब नवजात पूरी तरह से ठीक है.

मुकेश सोनी/कोटा: मेडिकल कॉलेज कोटा के न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग एवं निश्चेतना विभाग के डॉक्टरों के सम्मिलित प्रयासों से एक दो दिन नवजात के हेमरेज का सफल ऑपरेशन हुआ है. डॉक्टरों का दावा है कि संभाग में सम्भवत: इतनी कम उम्र के नवजात के क्रैनीयोटोमयी के ऑपरेशन का यह पहला मामला है. 

वहीं, दो दिन के नवजात के ऑपरेशन को लेकर डॉक्टरों ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान नवजात के ब्लड लॉस होना भी खतरनाक हो सकता था. इतना ही नहीं, उसकी जान भी जा सकती थी. लेकिन 23 नवम्बर को न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर और विभागध्यक्ष डॉ. एस एन गौतम एवं रेजिडेंट डॉक्टर महेश अग्रवाल ने ऑपरेशन कर नवजात के दिमाग का हेमरेज निकाला.

चुनौतिपूर्ण था ऑपरेशन
न्यूरोसर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ एस एन गौतम ने बताया कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 21 नवंबर को नवजात के जन्म के तुरंत बाद नीचे गिर जाने से सिर में चोट लग गई थी. सीटी स्केन जाच में नवजात के सिर में हेमरेज (एक्स्ट्रा डूरल हेमेंटोमा) का होना पाया गया. जिसकी वजह से उसको मेडिकल कॉलेज कोटा रेफर कर दिया गया था.

नवजात की उम्र केवल दो दिन की थी. ऐसे में उसको ऑपरेशन के दौरान बेहोशी देना एवं ऑपरेशन की अवधि में लगातार बेहोश रखना तथा ऑपरेशन के बाद में होश में लाना बहुत चुनौतिपूर्ण था. इस उम्र में नवजात के फेफड़ों का विकास भी पूरा नहीं हो पाता. एनेसथिसिया विभाग की असिस्टैंट डॉक्टर सीमा मीना एवं विभाग के रेज़िडेंट डॉक्टर्स ने इस काम को बखूबी किया. 

वहीं, ऑपरेशन के बाद नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी शिशु रोग विभाग के डॉक्टर पंकज सिंघल एवं उनकी टीम ने पूरी तरह निभाई. जिसके बाद अब नवजात पूरी तरह से ठीक है. वहीं इस सघन ऑपरेशन के बाद परिवार वालों ने भी अस्पताल के डॉक्टरों का आभार जताया है.