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इस आदमी की बंदरों से दोस्ती है बेमिसाल, कभी नहीं रहते अलग

मध्‍य प्रदेश के आगर मालवा के रहने वाले लोकेंद्र सिंह ने बंदरोंं को समझने में 40 साल से ज्यादा का वक्त गुजार दिया है. 

इस आदमी की बंदरों से दोस्ती है बेमिसाल, कभी नहीं रहते अलग

नई दिल्लीः शहरों में बंदर आ जाने पर अक्सर लोग वहां से भाग जाते है, लेकिन मध्य प्रदेश के आगर मालवा का एक शख्स ऐसा है, जिसे बंदरोंं से बिल्कुल डर नहीं लगता. बल्कि वह तो बंदरोंं का दोस्त है. उसे बन्दरों के बीच रहना पसंद है. वह बंदरोंं को एक आवाज और इशारे में पास भी बुला लेता है. इस शख्स को इन बंदरोंं से डर नहीं लगता है, क्योंकि उसने इन्हें समझने में 40 साल से ज्यादा वक्त गुजार दिया है.

वह तस्वीरों में दिखाई दे रहे बन्दरोंं के इस गुट से कई महीनों बाद मिले हैं. वह समय की अनुकूलता के अनुसार अलग-अलग बन्दरों के गुटों के साथ समय बिताते रहते हैं.

आगर-मालवा के मूलनिवासी इस शख्स का नाम है लोकेंद्र सिंह. लोकेंद्र सिंह पेशे से शिक्षक है और वर्तमान में झाबुआ के उत्कृष्ट स्कूल में पदस्थ है. इन्हें बचपन से ही प्रकृति से प्रेम रहा है विशेषकर बंदर और चिड़ियाओं से. नौकरी के बाद जब भी वक्त मिलता है यह आसपास के जंगलों में पहुंच जाते है.

खासकर वहां जहां पर बंदर मौजूद हों. फिर उन बंदरो से दोस्ती करने में जुट जाते हैं. सालों की मेहनत के बाद लोकेंद्र सिंह बंदरो की भाषा, उनके हाव भाव से उनके बारे में आसानी से जान जाते है कि आखिर बंदर क्या चाहते है. जैसे ही वह कुछ आवाज करते है और कुछ इशारे करते हैं तो बंदर उनके पास चले आते हैं.

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लोकेंद्र सिंह इन जंगली बन्दरों पर प्रेक्टिकल भी करते रहते हैं. उनकी बुद्धिमत्ता उनकी धैर्यशीलता की परीक्षा भी लेते रहते हैं. हमारे सामने उन्होंने इन जंगली बन्दरों के साथ तीन कटोरी लेकर एक प्रेक्टिकल किया. जिसमे उन्होंने एक कटोरी के नीचे बन्दरों को दिखाकर उन्होंने कुछ खाने का सामान रखा, और फिर कटोरियों को घुमा दिया फिर बन्दरो को उसे ढूंढने दिया. एक के बाद एक कटोरी खाली निकलने के बाद भी बन्दरो ने अपने खाने का सामान आखिर ढूंढ ही लिया.

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अपनी लगातार मेहनत के कारण लोकेंद्र सिंह जान गए है कि बन्दरो से कैसा व्यवहार किया जाए जिससे वे इंसानों से डरे नहीं. हालांकि उनका भी यह मानना है कि इसके लिए जानवरो को प्यार के साथ साथ कुछ खाने का लालच भी दिया जाए तो वे जल्द ही अपनी और आकर्षित हो जाते है. कुछ देर में उन्होंने इन बन्दरो में ऐसा विश्वास जमाया की हमारे संवाददाता भी जब इन बन्दरो के बीच पहुँचे तो यह बंदर उनसे भी दोस्ताना व्यवहार करने लगे.

Madhya Pradesh: Monkey and this man's Friendship is unmatched, never live apart

लोकेंद्र सिंह को राज्यपाल से उत्कृष्ठ शिक्षक का 2018 में पुरुस्कार भी मिला है, लोकेंद्र सिंह बताते है जैसे ही उन्हें पुरुस्कार मिला था वो सीधे उसे लेकर बंदरो के पास पहुंचे और उन्हें दिखाने लगे. उन्हें अपने खुशियों के पल इन बेजुबान बंदरो के साथ बांटने में अच्छा लगता है. लोकेंद्र सिंह को आगर के बन्दरो के बारे में यह तक मालूम है कि बन्दरो के 7 अलग अलग झुंड है और कौन सा झुंड कहा रहता है. लोकेंद्र सिंह चाहते है कि बन्दरो को समझने की जरूरत है उनके संरक्षण की सख्त जरूरत है.

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इस दुनिया में इंसान हो या जानवर हर किसी को प्यार की जरूरत होती है. किसी को अच्छी केयर मिल जाये, तो उसकी ज़िंदगी बदल सकती है और अगर यही प्यार और केयर किसी बेसहारा जानवरो को मिले तो उन्हें भी सुकून मिलता हैं और उन्हें अपना भी बनाया जा सकता है. इंसान सभी जंगलों पर धीरे धीरे कब्जा करता जा रहा है जिससे धीरे धीरे जानवरो का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है, आगर मालवा के मंकी मेन से सीख लेने की आवश्यकता है जिससे इन बेजुबान जानवरो को प्यार से अपना बनाया जा सके और इनका संरक्षण भी किया जा सके.