राजस्थान: घायल अवस्था में मिला विदेशी पक्षी, वन विभाग ने जमकर की मेहमाननवाजी

जब वह स्वस्थ हो गया, तो वनकर्मियों ने उसे मचलाना तालाब में छोड़ दिया. पानी में जाते ही पेलीकन में नई जान आ गई और तैरता हुआ वनकर्मियों की आंखों से ओझल हो गया. 

राजस्थान: घायल अवस्था में मिला विदेशी पक्षी, वन विभाग ने जमकर की मेहमाननवाजी

प्रतापगढ़: चार दिन पहले वन विभाग को ग्रामीणों ने सूचना दी थी कि मचलाना गांव के निकट एक कुए में बड़ा-सा सफेद पक्षी गिर गया है. इस पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. वनकर्मियों ने देखा कि कुए में व्हाइट पेलिकन घायल अवस्था में है. ग्रामवासियों के सहयोग से उसे कुए से बाहर निकाला गया और वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर पर लाया गया. 

पेलिकन के पंखों के नीचे कुछ गहरा घाव हो गया था. जिससे वह बीमार हो गया और उड़ नहीं पा रहा था. चार दिनों तक पशु चिकित्सालय में उसका इलाज करवाया गया. घाव सूखाने के लिए इंजेक्शन लगाए गए. इस बीच रेस्क्यू सेंटर में पेलिकन की खूब खातिरदारी की गई. 

पेलिकन को खाने के लिए मछलियां दी गई. शुरू में तो वह मछलियों को खाने से इंकार करते हुए चोंच से पकड़ कर हवा में उछालता रहा. बाद में जब इसे लगा कि यहां कोई खतरा नहीं है, तो इसने पेट भर कर मछलियां खाई. वनकर्मियों ने इस विदेशी मेहमान मादा पेलिकन का माप लिया तो इसकी लंबाई 55 इंच, चोंच की लंबाई एक फीट से अधिक और वजन 10 किग्रा दर्ज किया. पंखों का फैलाव करीब 8 फीट है.

जब वह स्वस्थ हो गया, तो वनकर्मियों ने उसे मचलाना तालाब में छोड़ दिया. पानी में जाते ही पेलिकन में नई जान आ गई और तैरता हुआ वनकर्मियों की आंखों से ओझल हो गया. व्हाइट पेलिकन को हवासिल नाम से भी जाना जाता है. भारत में यह मेहमान पक्षी वाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के शेड्यूल 5 में शामिल है. 

यह पानी में तैरने और हवा में उड़ने वाला बड़ा पक्षी है. इसकी चोंच कुछ खास तरह की बहुत लंबी, मोटी और चपटी होती है, जिसके नीचे एक बड़ी-सी थैली होती है. शिकार करते ही मछली को इसी थैली में डाल देता है. यह मुख्यतः मछली खाता है. इसे हर रोज लगभग 1 किग्रा. मछली की जरूरत होती है.

यह मुख्यतः साइबेरिया और पूर्वी यूरोप से जब वहां बर्फ पड़ने लगी है तो हजारों किलोमीटर उड़ान भरकर प्रजनन और भोजन के लिए भारत में आते हैं. शीत ऋतु की दस्तक के साथ ही इस पक्षी का भारत में आना आरंभ हो जाता है. प्रतापगढ़ जिले के मचलाना बांध में माइग्रेटरी बर्ड व्हाइट पेलिकन को पहली बार देखा गया है. इसकी बांध में मौजूदगी ने पक्षीविदों के चेहरों पर भी खुशी ला दी. इस माइग्रेटरी बर्ड का यहां दिखाई देना अच्छा संकेत है. ये पक्षी साफ पर्यावरण में ही रहना पसंद करते हैं.