72 साल से पानी की कमी से जूझ रहा यह गांव, अब शादी के रिश्ते भी आने हुए बंद

भारत पाक सीमा पर स्थित राजस्थान के इस गांव के लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया है. साथ ही शादी के संपने संजोने वाले इस गांव के युवा लड़की वालों से रिश्ते की बाट जोह रहे हैं.

72 साल से पानी की कमी से जूझ रहा यह गांव, अब शादी के रिश्ते भी आने हुए बंद
महिलाएं पानी के मटके भर के ले जाती है. (प्रतीकात्मक फोटो)

कुलदीप गोयल, अनूपगढ़: भारत-पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सटे एक गांव में पेयजल संकट के कारण हाहाकार मचा हुआ है. पेयजल संकट के अलावा मूलभूत सुविधाओं के लिए यह गांव जदोजहद कर रहा है. जिस कारण गांव से ग्रामीणों ने पलायन करना शुरू कर दिया है. 

इसके साथ ही एक बड़ी समस्या से गांव के युवा लड़के जूझ रहे हैं. यहां के युवाओं के लिए शादी का रिश्ता आना बंद हो चुका है. 
जिस कारण इस गांव के युवा शादी के रिश्ते की आस में अन्य क्षेत्रों में जाकर बस रहे हैं. राजस्थान के अनूपगढ़ के इस गांव में पानी की किल्लत इतनी ज्यादा है कि ये पानी का उपयोग घी की तरह करते हैं.

जी हां इस गांव का नाम है 14 केबी. जो अनूपगढ़ पंचायत में बसा हुआ है. यहां आजादी के 72 वर्षों के बाद भी मूलभूत सुविधाओं को पाने के लिए ग्रामीण जद्दोजहद कर रहे हैं. गांव में लोगों को पीने के लिए पानी ही मयस्सर नहीं है. आलम ऐसा है कि आप जानकर हतप्रत रह जाएंगे.

पानी का संकट के कारण घर का एक सदस्य नल की ओर ताकता रहता है कि कब नल में पानी आएगा. क्योंकि इसका कोई टाइम टेबल फिक्स नहीं है.

यहां सुबह होने वाली पानी की सप्लाई दोपहर को होती है. दोपहर को आने वाला पानी शाम को और शाम को आने वाला पानी रात को. जिस कारण लोगों को अपनी दैनिक दिनचर्या की जरूरतें पूरी करने के कारण पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है. 

गांव में जलदाय विभाग द्वारा पेयजल के लिए एक जी.एल.आर. बनाया गया है, लेकिन यह जी.एल.आर. और इसमें सप्लाई के लिए आने वाली पाइप लाइने पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है. लिहाजा जब सप्लाई छोड़ी जाती है तो ग्रामीण पाइन लाइन में से पानी भरते है. 

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सभी घरों को 2 मटके पानी हिस्से में आता है, जिसका समय भी निर्धारित नहीं है. उन्होंने बताया कि पानी सप्लाई के समय कोई भी ग्रामीण मौके पर पहुंच जाता है तो वह ड्रम तथा मटके भर देता है नही तो वाटर वक्र्स के पानी से बने दो गड्ढे भर जाते है.

जिससे महिलाएं पानी के मटके भर के ले जाती है. महिलाओं ने बताया कि घर में फिटकरी से पानी को साफ कर उपयोग में लेते है. उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि आज भी पानी को घी की तरह इस्तेमाल करने पर मजबूर है.

ग्रामीणों ने जी मीडिया को बताया कि लगभग पांच वर्ष पूर्व गांव में 50 से 60 घरों की आबादी थी. लेकिन विशेषकर पानी नही मिलने के कारण गांव के 25 परिवार पलायन कर गए है. ग्रामीणों के अनुसार हर चुनावों में नेता आते हैं और बड़े बड़े वायदे करते हैं. लेकिन हासिल कुछ भी नहीं होता. 

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