शिक्षक को ऐसी दी विदाई, देखने वालों की भर आईं आंखें

रिटायर हुए श्री सेवतकर मानते है कि उन्होंने गांव और उनके छात्रो को हमेशा परिवार का हिस्सा माना. यही वजह है कि छात्रों और उनके परिजनों के प्रति पारिवारिक रिश्ते जैसा माहौल रहा. तुकाराम सेवतकर पिछले 10 सालों से हेडमास्टर के पद पर थे. 29 नवंबर को वह पद से रिटायर हुए. 

शिक्षक को ऐसी दी विदाई, देखने वालों की भर आईं आंखें

बैतूलः मध्‍य प्रदेश के बैतूल जिले के पंढरीढाना गांव में एक शिक्षक को रिटायरमेंट पर ग्रामीणों ने बेहद अनूठे और शाही अंदाज में विदाई दी गई. इस अनोखे तरीके से की गई विदाई की हर जगह चर्चा हो रही है. सेवानिवृत्त हुए शिक्षक को गांव वालों ने ऐसी विदाई दी जैसे किसी की शादी हो रही हो. इस दौरान छात्रों के साथ मिलकर ग्रामीणों ने उन्हें पगड़ी पहनाई, घोड़ी पर बैठाया साथ ही रास्ते में जगह-जगह तिलक लगाकर और मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया. इस दौरान रंगारंग कार्यक्रम हुआ और गांव में पदस्थ हेड मास्टर की शोभायात्रा निकाली गई.

लगन और लोकप्रिय छवि का मिला इनाम 
हेडमास्टर साहब को ऐसी विदाई मिली जो हर किसी को नसीब नहीं होती है. यह हेडमास्टर हैं तुकाराम सेवतकर. वह प्रभातपट्टन ब्लॉक के पंढरीढाना प्राइमरी स्कूल में पिछले 10 सालों से हेडमास्टर के पद पर थे. 29 नवंबर को वह पद से रिटायर हुए. शिक्षा के प्रति अपनी लगन, बच्चों और ग्रामीणों के बीच अपनी साफ सुथरी लोकप्रिय छवि रखने के चलते उन्‍हें हर कोई मिसाल के रूप में देखता था और इसी के चलते पूरे गांव ने मिलकर अपने चहेते हेडमास्टर को यादगार विदाई देने का फैसला लिया.

शिक्षक की इस तरह की विदाई समारोह से विभाग के बड़े अफसर भी खुश हैं. वे अन्य शिक्षकों को उनसे प्रेरणा लेने की बात कह रहे हैं. 

ऐसे किया गया स्वागत
29 नवंबर के दिन गांव में जैसे ही शिक्षक तुकाराम सेवतकर पहुंचे तो उनका शाही स्वागत हुआ. उन्हें सिर पर साफा बांधकर घोड़ी पर बैठाया गया. घोड़ी के सामने महिलाएं-पुरुष और बच्चे ढोल-नगाड़ों की गूंज पर पारंपरिक नृत्य कर रहे थे. 

बच्चों ने आदिवासी वेशभूषा पहन रखी थी, इसके अलावा ग्रामीण भी इस कार्यक्रम में उत्साह के साथ भागीदारी कर रहे थे. शिक्षक की शोभायात्रा को पूरे गांव में घुमाया गया और इस दौरान आतिशबाजी भी की गई. यह शोभायात्रा गांव के प्राइमरी स्कूल पर खत्म हुई. इसके बाद ग्रामीणों ने बाकायदा एक विदाई कार्यक्रम कर हेटमास्टर तुकाराम सेवतकर की विदाई को यादगार बना दिया.

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गांव वालों को परिवार की तरह माना
इस विदाई को देखकर शिक्षक की भी आंखें भर आईं. रिटायर हुए श्री सेवतकर मानते है कि उन्होंने गांव और उनके छात्रो को हमेशा परिवार का हिस्सा माना. यही वजह है कि छात्रों और उनके परिजनों के प्रति पारिवारिक रिश्ते जैसा माहौल रहा. बच्चों को किताब हो या अन्य कोई समस्या उन्होंने अपनी दिक्कत मानकर उसे सुलझाने में मदद तो की ही, साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों से कभी मुह नही मोड़ा. जैसे-जैसे हेडमास्‍टर की विदाई का कार्यक्रम आगे बढ़ रहा था वैसे-वैसे ना सिर्फ बच्‍चे बल्कि गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं.

साथी टीचर केआर बोबडे का कहना है की टीसी सेवतकर अच्छे टीचर है जो रिटायर्ड हो रहे है उनकी विदाई ग्रामीणों ने अच्छे से की है इससे दूसरे टीचरो को भी प्रेरणा लेनी चाहिए. 

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