चीन के बच्चों में 3 वर्ष की उम्र से ही की जा रही राष्‍ट्रवाद की 'कोडिंग', जानिए कैसे?

भविष्य की पीढ़ियों को कैसे मजबूत बनाया जाता है, ये हमें चीन से सीखना चाहिए.

चीन के बच्चों में 3 वर्ष की उम्र से ही की जा रही राष्‍ट्रवाद की 'कोडिंग', जानिए कैसे?

नई दिल्‍ली: भविष्य की पीढ़ियों को कैसे मजबूत बनाया जाता है, ये हमें चीन (China) से सीखना चाहिए. भारत के कुछ युवा गलत दिशा में भटक गए हैं लेकिन चीन के बच्चे अपने देश के लिए 3 वर्ष की उम्र से ही कंप्यूटर पर तपस्या कर रहे हैं. किसी भी देश के बच्चे और छात्र उस देश का भविष्य होते हैं. बच्चों के मन और मस्तिष्क में बचपन से जिस भावना को विकसित किया जाता है वही भावना आगे चलकर उस देश के विकास का कोड बन जाती है. भारत के कई छात्रों के मन में अलगाववाद, टुकड़े-टुकड़े वाली सोच, हिंसा की कोडिंग की जा रही है और किसी सॉफ्टवेयर की तरह चलने वाले इनके दिमागों में नफरत के वायरस का प्रवेश कराया जा रहा है. ऐसा करने वालों को चीन से सबक लेना चाहिए. जहां 3 वर्ष तक के छोटे-छोटे बच्चों के दिमाग में भी राष्ट्रवाद की कोडिंग की जा रही है.

कंप्‍यूटर कोडिंग की शिक्षा
चीन में 3-8 वर्ष तक के बच्चों को बचपन से ही कंप्‍यूटर कोडिंग की शिक्षा देना एक फैशन बनता जा रहा है. जिस उम्र में भारत के ज्यादातर छोटे बच्चे मोबाइल फोन पर वीडियो गेम्‍स और कार्टून देखने के आदि हो जाते हैं, उस उम्र में चीन के बच्चे आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) और रोबोट्स (Robots) बनाने के लिए कंप्‍यूटर कोडिंग कर रहे हैं.

यहां तक कि कुछ बच्चे तो इस काम में इतने विशेषज्ञा हो चुके हैं कि वो उम्र में बड़े दूसरे बच्चों को कोडिंग की ट्रेनिंग भी देने लगे हैं. चीन में छोटे-छोटे बच्चों को कंप्‍यूटर कोडिंग सिखाना सिर्फ शौक की बात नहीं है बल्कि इसके पीछे चीन की लंबी योजना है. चीन चाहता है कि आने वाले वर्षों में कंप्‍यूटर अप्‍लीकेशंस और कोडिंग के विशेषज्ञों की एक पूरी सेना तैयार कर दी जाए.

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चीन ऐसा इसलिए करना चाहता है ताकि वो रोबोट टेक्‍नोलॉजी और आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में एकछत्र राज कर पाए. चीन अभी से इस क्षेत्र में बहुत आगे है. अगर भविष्य में चीन के ये बच्चे चीन की साइबर सेना का हिस्सा बन जाते हैं तो फिर चीन दुनिया के किसी भी देश को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है. चीन की सरकार अपने देश को एक सुपरपावर बनाना चाहती है. नई पीढ़ी में निवेश किए बगैर ये सपना पूरा नहीं हो सकता. इसलिए चीन छोटे-छोटे बच्चों को कोडिंग सिखाने वाले इन कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है.

भारत में भी बच्चे 3 साल जितनी छोटी उम्र से ही मोबाइल फोन या टेबलेट का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं. लेकिन भारत में बच्चों की इस आदत के बेहतर इस्तेमाल के बारे में कोई नहीं सोचता.

इस वर्ष चीन का IT क्षेत्र 38 हज़ार करोड़ रुपये का हो जाएगा. जबकि भारत की IT इंडस्ट्री चीन के मुकाबले 40 गुना बड़ी है और इसका आकार 12 लाख 68 हज़ार करोड़ रुपये का है. लेकिन भारत सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में सुपरपावर बनने की इस रेस को चीन के हाथों हार भी सकता है क्योंकि भारत के छात्रों को सॉफ्टवेयर का नहीं बल्कि प्रदर्शनों का एक्‍सपर्ट बनाया जा रहा है.

चीन के बच्चे ही नहीं चीन के युवा भी अपने देश को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं. एक अध्‍ययन के मुताबिक 2017 से अब तक चीन के वो 16 हज़ार वैज्ञानिक अपने देश लौट चुके हैं जो दूसरे देशों में काम कर रहे थे. इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन में आज जितने वैज्ञानिक शोध होते हैं उनमें से 12 प्रतिशत उन वैज्ञानिकों द्वारा किए जाते हैं..जो पहले दूसरे देशों में काम कर चुके हैं.

यानी चीन के बच्चों से लेकर युवा तक और कंप्‍यूटर विशेषज्ञों से लेकर वैज्ञानिक तक सब अपने देश को सुपरपावर बनाने की कोशिश में जुटे हैं. जबकि भारत का भटता हुआ युवा प्रदर्शनों की प्रयोगशालाओं में फंस कर रह गया है. आज ऐसे युवाओं को चीन में हो रही राष्ट्रवाद की कोडिंग के बारे में जानना चाहिए.