Coronavirus: मेडिकल सहायता लेकर चीन रवाना हुआ भारतीय वायुसेना का विशेष विमान

आज भेजी गई सहायता चीन के लोगों के प्रति भारत के लोगों की मित्रता और एकजुटता का प्रतीक है. आपको बता दें कि दोनों देश इस साल राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. 

Coronavirus: मेडिकल सहायता लेकर चीन रवाना हुआ भारतीय वायुसेना का विशेष विमान
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) के प्रकोप से जूझ रहे पड़ोसी देश चीन की तरफ भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है. आज (26 फरवरी) को 15 टन आपातकालीन चिकित्सा उपकरणों के साथ भारतीय वायुसेना का विशेष विमान चीन के वुहान शहर के लिए रवाना हुआ. विमान में चिकित्सा उपकरण, दवाइयां, मास्क और दस्ताने चीन भेजे गए. आपको बता दें कि चीन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मास्क और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति प्रदान करने का अनुरोध किया था. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 फरवरी, 2020 को राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) को लिखा था और जरूरत की इस घड़ी में सहायता की पेशकश की थी. आज भेजी गई सहायता चीन के लोगों के प्रति भारत के लोगों की मित्रता और एकजुटता का प्रतीक है. आपको बता दें कि दोनों देश इस साल राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. 

आपको बता दें कि चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप से 2600 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई है जबकि रोजाना सैकड़ों नए मामले सामने आ रहे हैं. चीन के 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग' के मुताबिक मंगलवार को कोरोना वायरस के 508 के नए मामले मिले. सोमवार को कोरोना के 409 दर्ज किए गए थे.

बता दें कि चीन के कुछ ऐसे भी प्रांत हैं जहां अब कोरोना वायरस के नए मामले देखने को नहीं मिल रहे हैं. सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा था कि कोरोना वायरस की महामारी चीन में अपने 'उच्चतम' स्तर पर पहुंच चुकी है. WHO के प्रमुख टेड्रोस अधानोम ने कहा, "कोरोना वायरस का कहर चीन में 23 जनवरी से 2 फरवरी तक 'उच्चतम' स्तर पर रहा. 2 फरवरी के बाद से कोरोना वायरस के नए केस पाए जाने की संख्या में अब लगातार गिरावट आ रही है."

हालांकि WHO के विशेषज्ञ और WHO-चीन के ज्वाइंट मिशन के प्रमुख ब्रूस एलीवर्ड ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा, "दूसरे देशों में कोरोना वायरस की बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है. कोरोना वायरस के नए मामलों के पहले से कम मिलने के बावजूद अभी चीन के सामने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने की बहुत बड़ी चुनौती है."

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