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पाकिस्तान सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, कहा-'विपक्षी नेताओं पर लगा प्रतिबंध हटाओ'

न्यायालय ने अपना विस्तृत निर्णय सुनाते हुए सरकार को आदेश दिया कि वह विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह का नाम ईसीएल के हटाए.

पाकिस्तान सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, कहा-'विपक्षी नेताओं पर लगा प्रतिबंध हटाओ'
फाइल फोटो

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को आदेश दिया कि वह विपक्ष के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह पर लगाया गया यात्रा प्रतिबंध हटाए. 

फर्जी खाता मामले की होगी जांच
न्यायालय ने आदेश दिया कि देश की भ्रष्टाचार रोधी इकाई 35 अरब रुपए के ‘फर्जी खाता मामले’ में उनकी संलिप्तता की जांच करे. शीर्ष अदालत द्वारा गठित संयुक्त जांच दल (जेआईटी) की सिफारिशों पर ‘एग्जिट कंट्रोल लिस्ट’ (ईसीएल) में 172 लोगों का नाम शामिल किया गया है. ईसीएल में नाम होने वाला व्यक्ति विदेश नहीं जा सकता.

राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो को भेजी गई रिपोर्ट
न्यायालय ने अपना विस्तृत निर्णय सुनाते हुए सरकार को आदेश दिया कि वह विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह का नाम ईसीएल के हटाए. ‘डॉन’ के अनुसार हालांकि उसने ‘फर्जी खाता मामले’ में जेआईटी द्वारा एकत्र सबूत एवं रिपोर्ट राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) को भेज दी.

32 फर्जी खातों पर ध्यान केंद्रीत
जेआईटी की जांच में 32 फर्जी खातों पर ध्यान केंद्रित किया गया है. ऐसा आरोप है कि इन खातों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, उनकी बहन फरयाल तालपुर और कई अन्य लोगों को व्यापक स्तर पर वित्तीय फायदा हुआ.  न्यायमूर्ति इजाज उल अहसन ने आदेश लिखते हुए कहा, ‘‘नाम हटने से एनएबी की जांच नहीं रुकेगी और यदि संज्ञेय अपराधों में इन लोगों की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उसे उनका नाम फिर से ईसीएल में रखने के लिए संघीय सरकार से उचित अनुरोध करने या कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने से रोका नहीं जाएगा.’’ 

न्यायालय ने अपने पहले के आदेश में सरकार को बिलावल और शाह का नाम ईसीएल से हटाने का आदेश दिया था लेकिन कैबिनेट ने विस्तृत आदेश का इंतजार किया. विस्तृत आदेश के बाद सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि सरकार अदालत के आदेश को लागू करेगी या समीक्षा याचिका दायर करेगी, इस संबंध में फैसला किया जाएगा.