आखिर कहां से आई Imran Khan में इतनी ताकत? US को Army Base देने से किया साफ इनकार, लगाए गंभीर आरोप

अपने लेख में इमरान खान ने लिखा है कि अमेरिकी अभियान में शामिल होने के बाद पाकिस्तान को एक सहयोगी के रूप में निशाना बनाया गया. खासतौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और अन्य आतंकी गुटों ने हमें निशाना बनाया. अमेरिकी ड्रोन हमलों का खामियाजा भी पाक को भुगतना पड़ा.

आखिर कहां से आई Imran Khan में इतनी ताकत? US को Army Base देने से किया साफ इनकार, लगाए गंभीर आरोप
फाइल फोटो: रॉयटर्स

इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने अफगानिस्तान में तालिबान आतंकियों पर निगरानी रखने के लिए अमेरिका को अपना सैन्य अड्डा देने से साफ इनकार कर दिया है. खान ने कहा कि विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान में निगरानी रखने के लिए यदि हम अपना सैन्य अड्डा US को देते हैं, तो हमें उसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इस स्थिति में आतंकवादी पाकिस्तान को निशाना बना सकते हैं. 

Imran ने US पर कसा तंज

अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ में लिखे एक लेख में इमरान खान (Imran Khan) ने US पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते. हमने पहले ही बहुत भारी कीमत चुकाई है. Pak PM ने अमेरिका पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि जब दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के साथ अमेरिका इतने समय में अफगानिस्तान (Afghanistan) के अंदर से जंग नहीं जीत सका, तो वो हमारे सैन्य ठिकानों से यह जंग कैसे जीत पाएगा? इमरान के इस लेख के बाद एक सवाल यह जरूर खड़ा हो गया है कि उनमें अचानक से अमेरिका के खिलाफ खुलकर बोलने की ताकत कहां से आई.

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Taliban का किया समर्थन

इमरान खान ने लिखा है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए भागीदार बनने के लिए तैयार है, लेकिन जैसे-जैसे अमेरिकी सैनिक पीछे हटेंगे, हम अपने को जोखिम में डालने से बचेंगे. खान ने अफगानिस्तान में बनने वाली सरकार में तालिबान को शामिल करने का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि हम अफगानिस्तान के किसी भी सैन्य अधिग्रहण का विरोध करते हैं. यह सिर्फ गृहयुद्ध का कारण बनेगा. तालिबान भी पूरे देश पर जीत हासिल नहीं कर सकता है. लिहाजा, तालिबान को गठित होने वाली सरकार में हिस्सेदार बनाया जाना चाहिए.

‘अब हम किसी का पक्ष नहीं लेंगे’

PM खान ने कहा कि अतीत में पाकिस्तान ने आपस में लड़ रहे अफगानी गुटों के बीच हस्तक्षेप करके गलती की थी, लेकिन हमने उस अनुभव से सीखा है. हम अब किसी के पक्षधर नहीं हैं. अफगान लोगों द्वारा चुनी गई सरकार के साथ हम काम करने को तैयार हैं. इतिहास बताता है कि अफगानिस्तान को कभी भी बाहर से नियंत्रित नहीं किया जा सका है. उन्होंने यह भी कहा कि अफगान में अमेरिकी कार्रवाइयों का समर्थन करने की वजह से पाकिस्तान भी आतंकवादियों के निशाने पर आ गया है. 

Drone हमलों से कुछ नहीं मिला 

अपने लेख में इमरान खान ने लिखा है कि अमेरिकी अभियान में शामिल होने के बाद पाकिस्तान को एक सहयोगी के रूप में निशाना बनाया गया. खासतौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और अन्य आतंकी गुटों ने हमें निशाना बनाया. इमरान ने कहा कि हमारी चेतावनी के बावजूद अमेरिका ने ड्रोन हमले किए, जिनसे कुछ हासिल नहीं हुआ. युद्ध में जीत नहीं मिली बल्कि ड्रोन हमले से अमेरिकियों के लिए नफरत पैदा हुई और जिसका खामियाजा पाकिस्तान को भी उठाना पड़ा.

US की झूठी उम्मीद पड़ी भारी

इमरान खान ने लिखा, ‘आतंक के सफाए की झूठी उम्मीद में अमेरिका ने पहली बार पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की सीमा से लगे अर्ध-स्वायत्त कबायली इलाकों में सेना भेजने के लिए दबाव डाला. इससे कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन इसने कबायली इलाकों की आधी आबादी को आंतरिक रूप से विस्थापित होना पड़ा. अकेले उत्तरी वज़ीरिस्तान में दस लाख लोग विस्थापित हुए. अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और गांव के गांव तबाह हो गए. 

Pak ने झेला Terrorism

उन्होंने कहा कि सेना भेजने के अमेरिकी फैसले के चलते पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आत्मघाती हमले बढ़ गए. अफगानिस्तान, इराक में अमेरिकी सैनिकों की तुलना में आत्मघाती हमले में अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. पाकिस्तान के विरुद्ध आतंकियों ने मोर्चा खोल दिया. अकेले खैबर पख्तूनख्वा में 500 पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई. इमरान ने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान और अमेरिका के हित समान हैं. उन्होंने कहा कि हम शांति की बहाली चाहते हैं, गृहयुद्ध नहीं. दोनों देशों का मकसद स्थिरता और आतंकवाद का खात्मा है.  

 

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