'किसी की हिम्मत नहीं जो दे मेरे काम में दखल', दबाव के आरोपों पर बोले चीफ जस्टिस
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'किसी की हिम्मत नहीं जो दे मेरे काम में दखल', दबाव के आरोपों पर बोले चीफ जस्टिस

जस्टिस गुलजार अहमद ने लाहौर (Lahore) में आयोजित एक आयोजन में 'मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में न्यायपालिका की भूमिका' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'न्यायपालिका स्वतंत्र तरीके से काम कर रही है और इसमें किसी तरह का कोई दखल नहीं है.'

'किसी की हिम्मत नहीं जो दे मेरे काम में दखल', दबाव के आरोपों पर बोले चीफ जस्टिस

इस्लामाबाद: आर्थिक मोर्चे पर लंबे समय से बदहाली की मार झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan) में कहीं भी और कुछ भी सही नहीं है. यहां पर बात सियासत से इतर न्यायपालिका (Judiciary) की जहां देश के चीफ जस्टिस गुलजार अहमद (Chief Justice Gulzar Ahmed) को एक सार्वजनिक मंच से कहना पड़ा कि न्यायपालिका पर सेना (Army) या आईएसआई (ISI) जैसी किसी एजेंसी का दबाव नहीं है. 

जस्टिस गुलजार ने यह भी कहा कि कोई भी फैसला सुनाने से पहले  देश की न्यायपालिका कभी भी अन्य संस्थानों से निर्देश नहीं लेती है. जस्टिस गुलजार अहमद ने लाहौर (Lahore) में आयोजित एक आयोजन में 'मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में कोर्ट की भूमिका' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'न्यायपालिका स्वतंत्र तरीके से काम कर रही है और इसमें किसी तरह का कोई दखल नहीं है.'

मैंने कभी दबाव में काम नहीं किया: चीफ जस्टिस

उन्होंने कहा कि मुझ पर कभी किसी संस्था से दबाव नहीं पड़ा और न ही मैंने किसी संस्था की बात सुनी है. कोई मुझे अपना फैसला लिखने के बारे में मार्गदर्शन नहीं करता है. मैंने कभी कोई फैसला किसी और के कहने पर नहीं किया है और न ही मुझे कुछ भी कहने की किसी को हिम्मत है. 

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22 करोड़ लोगों के देश में एक जनरल हावी

इससे पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अली अहमद कुर्द ने आरोप लगाया कि सुरक्षा संस्थान शीर्ष न्यायपालिका को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 22 करोड़ लोगों के देश में एक जनरल हावी है. इसी जनरल ने न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों की सूची में 126वें नंबर पर भेज दिया है. न्यायमूर्ति अहमद ने कहा कि उनके काम में किसी ने भी हस्तक्षेप नहीं किया और उन्होंने गुण-दोष के आधार पर मामलों का फैसला किया.

इन मामलों का दिया गया हवाला

गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश अहमद के पहले उसी मंच से इस्लामाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अथर मिनाल्ला ने स्वीकार किया कि कुर्द की कुछ आलोचनाएं वैध हैं तथा नुसरत भुट्टो और जफर अली शाह जैसे मामलों में फैसले इतिहास का हिस्सा हैं.

इसके बाद इस्लामाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अतहर मिनल्लाह ने कुर्द का आभार जताते हुए कहा, 'हमारे लिए यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि बार एसोशिएशन और बाकी लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं.'

(एएनआई इनपुट के साथ)

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