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UN में पिटने के बाद और बौखलाया पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे पर बुलाई एक उच्च स्तरीय बैठक

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद से कुश्मीर मुद्दे पर बुरी तरह पिटने के बाद पाकिस्तान और बौखला गया है. 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कश्‍मीर मुद्दे पर एक उच्‍च स्‍तरीय बैठक बुलाई है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कश्‍मीर मुद्दे पर एक उच्‍च स्‍तरीय बैठक बुलाई है.

इस्लामाबाद: संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद से कुश्मीर मुद्दे पर बुरी तरह पिटने के बाद पाकिस्तान और बौखला गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कश्‍मीर मुद्दे पर एक उच्‍च स्‍तरीय बैठक बुलाई है. बैठक में पाकस्तिान हुकूमत कश्‍मीर मामले में आगे की रणनीति तय करेगा. इस बैठक में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के डीजी, ISPR के डीजी और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी शामिल होंगे. भारत की इस उच्‍च स्‍तरीय बैठक पर खास नजर है. 

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को भारत से बातचीत की सलाह दी है. ट्रम्प ने शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के साथ तनाव कम करना चाहता है तो उसे द्विपक्षीय वार्ता की अहमियत समझनी होगी. 

जम्‍मू कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 में परिवर्तन के मुद्दे को पाकिस्‍तान की शह पर चीन ने यूएनएससी की बैठक में उठाया लेकिन शुक्रवार को हुई बैठक में पाकिस्‍तान और चीन को दुनिया के किसी और मुल्‍क का समर्थन नहीं मिला. रूस समेत दूसरे देशों ने भारत का समर्थन किया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्रम्प को फोन लगाकर अमेरिका को अपने पक्ष में करने की कोशिश की लेकिन अमेरिका ने इसे द्विपक्षीय मामला बताकर उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

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व्हाइट हाउस के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी होगन गिडले ने एक बयान जारी किया जिसके मुताबिक, "आज ट्रम्प और इमरान के बीच क्षेत्र में हो रही हलचल पर बात हुई. ट्रम्प ने इसी दौरान इमरान को सलाह दी कि अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के साथ तनाव कम करना चाहता है तो उसे द्विपक्षीय वार्ता की अहमियत समझनी होगी." 

रूस-फ्रांस और अमेरिका आए भारत के साथ
रूस, फ्रांस और अमेरिका ने भारत का साथ दिया और कश्मीर मुद्दे को भारत का आंतरिक मसला बताया. संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के एंबेसडर सैयद अकबरुद्दीन ने बैठक के बाद भारत का पक्ष रखा और चीन पाकिस्‍तान को खरी खरी सुनाई. अकबरुद्दीन ने कहा, ये पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मसला है. ये भारत की संवैधानिक व्‍यवस्‍थाओं के तह उठाया गया कदम है. किसी दूसरे देश का इससे कोई लेना देना नहीं है.

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