इस दुर्लभ बीमारी के शिकार हो चुके हैं परवेज मुशर्रफ, चलना-फ‍िरना और खड़ा रहना भी मुश्किल हो चला है
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इस दुर्लभ बीमारी के शिकार हो चुके हैं परवेज मुशर्रफ, चलना-फ‍िरना और खड़ा रहना भी मुश्किल हो चला है

बीते शनिवार को पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति की इसी बीमारी के चलते हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें "आपातकाल" में अस्पताल ले जाया गया था.

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली : पाकिस्‍तान के पूर्व सैन्‍य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ एक दुर्लभ बीमारी के शिकार हो चुके हैं. इस बीमारी के चलते उनका चलना-फिरना यहां तक की खड़ा रहना भी मुश्किल हो चला है. फिलहाल लंदन में रहे रहे मुशर्रफ इस दुर्लभ बीमारी का इलाज करा रहे हैं. बीते शनिवार को पाकिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति की इसी बीमारी के चलते हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें "आपातकाल" में अस्पताल ले जाया गया था.

ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) के ओवरसीज अध्यक्ष अफजल सिद्दीकी के अनुसार, मुशर्रफ एमाइलॉइडोसिस के चलते रिएकशन हो गया था, जोकि काफी दुर्लभ बीमारी है. इसी के कारण उनकी हालत बेहद खराब हो गई और उन्‍हें इमरजेंसी में उपचार के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराना पड़ा. पार्टी के मुताबिक, पूर्व फौजी हुक्‍मरान को डॉक्टरों द्वारा पूरी तरह से ठीक होने तक आराम करने की सलाह दी गई है. 

सिद्दीकी ने खुलासा किया कि पिछले साल अक्टूबर से मुशर्रफ इस दुर्लभ बीमारी से पीडि़त हैं. उन्‍होंने कहा कि बीमारी ने पूर्व राष्ट्रपति के तंत्रिका तंत्र को कमजोर कर दिया. उस समय लंदन में उनका इलाज चल रहा था.

उन्‍होंने बताया कि "एमाइलॉयडोसिस के कारण, टूटे हुए प्रोटीन विभिन्न अंगों में जमा होने लगते हैं, इसके परिणामस्वरूप परवेज मुशर्रफ को खड़े होने और चलने- फि‍रने में कठिनाई होती है."

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पाकिस्‍तान के पूर्व सैन्‍य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ...

एपीएमएल अधिकारी ने तब कहा कि मुशर्रफ का इलाज पांच या छह महीने तक जारी रह सकता है. सिद्दीकी ने कहा कि अपने पूरी तरह ठीक होने पर मुशर्रफ का इरादा पाकिस्तान लौटने का है.

31 मार्च 2014 को मुशर्रफ को 3 नवंबर 2007 को संविधान को निलंबित करने के लिए दोषी ठहराया गया था. हालांकि, मार्च 2016 में "इलाज के लिए" वह पाकिस्‍तान छोड़कर दुबई चले गए गए थे और तभी से वापस नहीं लौटे हैं. 

दरअसल, यह बीमारी असामान्य प्रोटीन के अंगों में बनने के कारण होती है. यह प्रोटीन बोन मैरो में पैदा होकर किसी भी अंग में जमा हो जाता है. इससे हृदय, गुर्दा, नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र प्रभावित होता है.

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