कुछ बड़ा करने की तैयारी में China? Indian Border से 1300 किमी दूर बनाया सीक्रेट Airbase, तस्वीरों से खुला राज

चीन शिनजियांग प्रांत के लोप नूर में तेजी से एयरबेस विकसित कर रहा है. इसकी हवाई पट्टी को काफी लंबा किया गया है, ताकि बड़े जहाज और स्पेसशिप भी आसानी से लैंड किए जा सकें. इसके अलावा, आसपास भी काफी निर्माण किया गया है, जिससे पता चलता है कि चीन की तैयारी कुछ बड़ा करने की है. 

कुछ बड़ा करने की तैयारी में China? Indian Border से 1300 किमी दूर बनाया सीक्रेट Airbase, तस्वीरों से खुला राज
फोटो: NPR

बीजिंग: चीन के रहस्मय अभियान (China Secret Mission) को लेकर एक और खुलासा हुआ है. कॉमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन शिनजियांग के लोप नूर (Lop Nur) में एक सीक्रेट एयरबेस (Airbase) विकसित कर रहा है. इस एयरबेस को चीन का एरिया-51 (Area-51) नाम दिया गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैसे तो बीजिंग ने यहां 2016 में काम शुरू किया था, लेकिन अब वो युद्ध गति से आगे बढ़ रहा है. उनका अनुमान है कि चीन इस एयरबेस को सैन्य अंतरिक्ष गतिविधियों (Military Space Activities) में तेजी लाने के लिए इस्तेमाल करेगा. 

Airstrip का किया गया विस्तार

अमेरिकी संस्था NPR ने मैक्सार टेक्नोलॉजीज की सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर चीन (China) के इस सीक्रेट एयरबेस का खुलासा किया है. तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने बरसों से वीरान पड़े इस एयरबेस को फिर से विकसित करना शुरू किया है. इस बेस की हवाई पट्टी को काफी लंबा किया गया है, ताकि बड़े जहाज और स्पेसशिप भी आसानी से लैंड किए जा सकें.

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China ने उतारा था Space Plane!

शिनजियांग प्रांत के लोप नूर (Lop Nur) में बन रहा चीन का ये सीक्रेट एयरबेस भारत के लेह से 1,340 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस एयरबेस के पास कई कंक्रीट की बिल्डिंग भी बनती दिखाई दी हैं, जिससे पता चलता है कि चीन कुछ बड़ा करने की फिराक में है. NPR की रिपोर्ट में कहा गया है कि लोप नूर चीन का पुराना परमाणु परीक्षण स्थल है. 2020 में कई जानकारों ने दावा किया था कि चीन ने एक हाइली क्लासिफाइड स्पेस प्लेन को इस एयरबेस पर उतारा था. हालांकि, कोई नहीं जानता कि चीन का स्पेस प्लेन कैसा दिखता है.

क्या कहते हैं Experts?

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस (Carnegie Endowment for International Peace) के वरिष्ठ विशेषज्ञ अंकित पांडा (Ankit Panda) को लगता है कि यह चीन की सैन्य अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बेस है, जिसे अब चीन तेजी से बढ़ाने में जुटा हुआ है. वहीं, सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स हार्वर्ड और स्मिथसोनियन के खगोलशास्त्री जोनाथन मैकडॉवेल (Jonathan McDowell) ने बताया कि यह एयर स्ट्रिप अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने के लिए काफी बड़ी है. 

Missiles के लिए साइलो का निर्माण

चीनी अधिकारियों ने सैटेलाइट तस्वीरों तस्वीरों के खुलासे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. इससे पहले, चीन द्वारा उत्तर-पश्चिमी शहर युमेन के पास एक रेगिस्तान में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (Intercontinental Ballistic Missiles) के लिए 100 से अधिक नए साइलो का निर्माण करने की बात सामने आई थी. साइलो ऐसे स्टोरेज कंटेनर होते हैं, जिनके अंदर लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें रखी जाती हैं. इसका मतलब साफ है कि बीजिंग की योजना आने वाले दिनों में कई और खतरनाक मिसाइलों के परीक्षण की है.

 

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