Pakistan: अब कट्टरपंथियों के निशाने पर Dharamsala, हिंदू समाज की याचिका पर SC ने दिया ये आदेश

पाकिस्तान (Pakistan) में अब एक प्राचीन धर्मशाला को तोड़कर मल्टीप्लेक्स बनाने की कार्रवाई शुरू हो गई है. इसे लेकर हिंदू समाज सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है.

Pakistan: अब कट्टरपंथियों के निशाने पर Dharamsala, हिंदू समाज की याचिका पर SC ने दिया ये आदेश
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) में वर्ष 1947 में देश के विभाजन के बाद से हिंदू-सिखों की संपत्तियां कट्टरपंथियों और सरकार के निशाने पर हैं. अब वहां पर एक प्राचीन धर्मशाला को तोड़कर मल्टीप्लेक्स बनाने की कार्रवाई शुरू हो गई है. जिसका हिंदू समाज विरोध कर कर रहा है.

हिंदू नेता ने दायर की याचिका

इस मामले में सोमवार को पाकिस्तान (Pakistan) के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के अध्यक्ष डॉक्टर रमेश कुमार ने इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर की है. डॉ रमेश कुमार ने कहा कि कराची (Karachi) के सदर टाउन-आई में लगभग 716 वर्ग गज की संपत्ति धर्मशाला (Hindu Dharamsala) थी. उन्होंने अदालत के सामने प्राचीन धर्मशाला की तस्वीरें भी रखीं. 

डॉ रमेश कुमार ने कहा कि इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETB) ने संपत्ति को किसी निजी व्यक्ति को पट्टे पर दिया था. वह व्यक्ति अब एक मल्टीप्लेक्स बनाने के लिए उस धर्मशाला को ध्वस्त कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसका विरोध करने पर ईटीपीबी के अध्यक्ष ने तर्क दिया है कि सिंध हाई कोर्ट (SHC) ने उन्हें यह जगह पट्टे पर देने की अनुमति दी है. 

कोर्ट ने जताई मामले पर हैरानी

दस्तावेज देखने के बाद पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of Pakistan) ने हैरानी जताई. कोर्ट ने कहा कि SHC का ऐसा आदेश उसके सामने नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘यह तस्वीर स्पष्ट रूप से दिखाती है कि इमारत 1932 में निर्मित धर्मशाला (Hindu Dharamsala) की है. जिसे इमारत पर लगी संगमरमर की पट्टी पर पढ़ा जा सकता है. यह एक संरक्षित धरोहर भवन होना चाहिए.’ 

धर्मशाला ढ़हाने से रोकने का आदेश

मामले की सुनवाई कर रहे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस गुलज़ार अहमद की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने हिंदू धर्मशाला को ढहाए जाने से रोकने का आदेश दिया. कोर्ट ने कराची प्रशासन को इस धरोहर संपत्ति को पट्टे पर देने को भी कहा. 

खबरों के मुताबिक पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of Pakistan) ने आदेश दिया कि किसी भी ध्वस्त सामग्री को हटाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. कराची के कमिश्नर को यह काम करके अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करानी होगी. कोर्ट ने इस मामले में पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल को भी नोटिस जारी किया.

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