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इमरान सरकार अब और बिलबिलाएगी, जिन पर है देश को नाज वही करेंगे हड़ताल

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ऑल पाकिस्तान (Pakistan) अंजुमन-ए-ताजिरान के केंद्रीय महासचिव नईम मीर ने रविवार को मीरपुरखास में व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका एजेंडा प्रधानमंत्री इमरान खान को हटाना नहीं है, बल्कि केवल नीतियों का निवारण करना है. मीर ने कहा, 'व्यापारियों का सरकार की नीतियों और प्रतिगामी करों से मोहभंग हो गया है.'

इमरान सरकार अब और बिलबिलाएगी, जिन पर है देश को नाज वही करेंगे हड़ताल
पाकिस्तान के कारोबारी इमरान खान की सरकार से नाराज हैं.

इस्लामाबाद: कई तरह की परेशानियां झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan) के ऊपर एक बड़ी आफत आ आने वाली है. पहले ही प्रचंड आर्थिक परेशानी झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan) के व्यापारी देशव्यापाही हड़ताल पर जाने वाले हैं. व्यापारिक संगठन ने सरकार की 'हानिकारक आर्थिक नीतियों' के खिलाफ 29-30 अक्टूबर को दो दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. कहते हैं व्यापारी ही किसी देश की ताकत होते हैं, लेकिन पाकिस्तान (Pakistan) में यही समाज सरकार से नाराज हैं. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ऑल पाकिस्तान (Pakistan) अंजुमन-ए-ताजिरान के केंद्रीय महासचिव नईम मीर ने रविवार को मीरपुरखास में व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका एजेंडा प्रधानमंत्री इमरान खान को हटाना नहीं है, बल्कि केवल नीतियों का निवारण करना है. मीर ने कहा, 'व्यापारियों का सरकार की नीतियों और प्रतिगामी करों से मोहभंग हो गया है.'

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने व्यापारियों को सुविधाएं प्रदान कीं, तो वह सभी देय करों का भुगतान करने के लिए तैयार होंगे. मीर ने कहा, 'दुर्भाग्य से सरकार एक व्यापार अनुकूल नीति को लागू नहीं कर रही है. बल्कि, इसकी नीतियां सीधे व्यापार और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं.' मीर ने सरकार से उनकी मांगों को स्वीकार करने की पेशकश की ताकि वह देशव्यापी हड़ताल के आह्वान को वापस ले सकें.

मालूम हो कि जुलाई 2018 में इमरान खान ने पाकिस्तान (Pakistan) की सत्ता संभाली थी, जिसके बाद से वह देश की अर्थव्वस्था सुधारने के लिए हर संभव कोशिश करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हालत और ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं. करीब डेढ़ साल बाद भी उनकी सरकार के खिलाफ अवाम में बेहद गुस्सा पाया जा रहा है और इसकी एक बड़ी वजह महंगाई को बताया जा रहा है. सरकार के एक साल पूरे होने पर पाकिस्तान (Pakistan)ी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया था, इमरान ने लोगों से 'घबराना नहीं है' का आश्वासन देकर एक कल्याणकारी राज्य का वादा किया था. लेकिन, पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को काबू करने के प्रयास में उनके वादे धरे के धरे रह गए और आम लोगों की जिंदगी दुश्वार होती गई. बीते एक साल में पाकिस्तान (Pakistan)ी रुपये का मूल्य तीस फीसदी तक गिरा है और महंगाई नौ फीसदी की दर से बढ़ी है.

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समाचार पत्र जंग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की स्थिति पर नजर रखने वाले जानकार मानते हैं कि देश में आज के हालात परमाणु परीक्षण के बाद लगाए गए वैश्विक प्रतिबंध के दौर से भी बुरे हैं. हर गुजरते दिन के साथ लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने अपनी रिपोर्ट में 'एएफपी' के हवाले से बताया कि कराची की 30 वर्षीय शमा परवीन सस्ती सब्जी की तलाश में अपने घर से कई किलोमीटर दूर की मंडी में जाने लगी हैं. उन्होंने कहा, 'अब तो टमाटर तक के भाव आसमान छू रहे हैं. जिंदगी दुश्वार हो गई है.'

मेहंदी डाई बेचने वाले 60 वर्षीय मोहम्मद अशरफ ने कहा, 'रोजमर्रा के खर्च के लिए मेरा एक हजार रुपये कमाना जरूरी है. लेकिन, आजकल मुश्किल से पांच से छह सौ रुपये कमा पा रहा हूं. सोचता हूं कि अगर बीमार पड़ गया तो दवा कैसे खरीदूंगा. लगता है, मर जाऊंगा.'

अर्थव्यवस्था को गर्त से निकालने के लिए पाकिस्तान (Pakistan) सरकार ने सऊदी अरब जैसे देशों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से कर्ज लिया है. आईएमएफ की ढांचागत सुधार की शर्तो ने दिक्कतें और बढ़ा दी हैं. उसकी शर्तो में के कारण बिजली जैसी मूलभूत चीजों के दाम बढ़ गए हैं.