नौ सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली: अपनों की आवाज दबाने वाला China लोकतंत्र पर India और US को दे रहा लेक्चर

नौ सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली यह कहावत चीन (China) पर बिल्कुल सटीक बैठती है. चीन अपने नागरिकों को बोलने से रोकता है, अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करता है,अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाता है और अब वह लोकतंत्र को लेकर भारत और अमेरिका को लेक्चर दे रहा है.

नौ सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली: अपनों की आवाज दबाने वाला China लोकतंत्र पर India और US को दे रहा लेक्चर
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान (फाइल फोटो)

बीजिंग: लोकतंत्र का गला घोंटने वाला चीन (China) भारत और अमेरिका को लोकतंत्र पर लेक्चर दे रहा है. दरअसल, ड्रैगन भारत और अमेरिका (India & America) की बढ़ती नजदीकी से परेशान है. ऐसे में जब नई दिल्ली पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने लोकतंत्र की बात करते हुए चीन पर निशाना साधा, तो वो तिलमिला उठा और चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान (Zhao Lijian) लोकतंत्र पर प्रवचन देने लगे.  

इस बयान से भड़का China

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने भारत यात्रा के दौरान लोकतंत्र (Democracy) का हवाला देते हुए जिस तरह चीन (China) पर निशाना साधा और जिस तरह नई दिल्ली के साथ मजबूत रिश्तों को दर्शाया, उससे बीजिंग आगबबूला हो गया है. गौरतलब है कि ब्लिंकन ने लोकतंत्र के खिलाफ बढ़ते वैश्विक खतरे पर बयान देते हुए कहा था कि भारत और अमेरिका को एक साथ इन खतरे वाले विचार के खिलाफ खड़ा होना चाहिए. 

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‘पेटेंट नहीं है Democracy’  

ब्लिंकन के बयान के संबंध में ब्लूमबर्ग के रिपोर्टर ने बुधवार को झाओ लिजियान से सवाल किया कि क्या अमेरिकी विदेश मंत्री का इशारा चीन की तरफ था? तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने लोकतंत्र पर लेक्चर देना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि लोकतंत्र मानवता का साझा मूल्य है. यह किसी देश का पेटेंट नहीं है. लोकतंत्र को साकार बनाने का तरीका उसे विविध करना है, न कि पैटर्न बनाना. लोकतंत्र का इस्तेमाल टकराव को भड़काने के लिए नहीं किया जा सकता है’. 

नाम लिए बगैर साधा निशाना

अमेरिका का नाम लिए बगैर चीनी प्रवक्ता ने कहा कि कुछ देश लोकतांत्रिक होने का दावा करते हैं, लेकिन वे अन्य मुद्दों के साथ-साथ नस्लीय भेदभाव, राजनीतिक ध्रुवीकरण की समस्याओं का सामना कर रहे होते हैं. क्या यह उस तरह का लोकतंत्र है, जिस पर उन्हें गर्व है? मालूम हो कि अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर विवाद है. विशेषतौर पर अल्पसंख्यकों के शोषण, मानवाधिकारों के उल्लंघन और कोरोना महामारी को लेकर बीजिंग लगातार वॉशिंगटन के निशाने पर रहा है. 

‘पैसों के बिना Vote नहीं मिलते’ 

अमेरिका के बाद झाओ लिजियान ने भारत पर अप्रत्यक्ष जुबानी प्रकार किए. चुनाव में पैसों के इस्तेमाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘कुछ देशों में पैसे के बिना आपको वोट नहीं मिल सकते. राजनीतिक दल अपने हितों को जनता से ऊपर रखते हैं. यह लोकतंत्र है या अमीरों का उत्थान? कुछ लोकतांत्रिक देशों में दूसरों का विकास होता है. ये लोकतंत्र है या आधिपत्य? क्या आप ऐसा लोकतंत्र चाहते हैं’? झाओ ने आगे कहा कि कौन सा देश लोकतांत्रिक है और कौन सा निरंकुश है, यह तय करने का तरीका किसी निश्चित देश द्वारा तय नहीं किया जाना चाहिए.  

 

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