Xi Jinping का वॉर प्लान, 3 लाख सुपर सोल्जर बनाएगा China; जानें भारत के लिए कितना बड़ा खतरा
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Xi Jinping का वॉर प्लान, 3 लाख सुपर सोल्जर बनाएगा China; जानें भारत के लिए कितना बड़ा खतरा

चीन तीन लाख सैनिकों को सुपर सोल्जर (China Super Soldiers) की तरह तैयार करेगा और उनका इस्तेमाल जंग के दौरान करेगा. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट में खासतौर पर शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बयान का जिक्र है. 

Xi Jinping का वॉर प्लान, 3 लाख सुपर सोल्जर बनाएगा China; जानें भारत के लिए कितना बड़ा खतरा

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी सेना चीन के पास है. फिर भी चीन की सैनिकों वाली भूख मिटती नहीं है. आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया की सबसे बड़ी सेना होने के बाद भी चीन 3 लाख नए सैनिकों की भर्ती करने जा रहा है. क्या आप जानते हैं कि इतने सैनिकों की भर्ती क्यों हो रही है? बॉर्डर पर लड़ने के लिए इनकी भर्ती हो रही है और इसलिए ये खबर हर भारतीय से जुड़ी है, क्योंकि भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है.

नई जंग शुरू करने के लिए की जा रही भर्ती?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने सेना में नई भर्ती के निर्देश दिए हैं. ऐसी आशंका है कि नई भर्ती बॉर्डर पर सैनिकों की भीड़ बढ़ाने और नई जंग शुरू करने के लिए की जा रही है. जिस देश के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना हो. सैन्य संसाधनों में जिसका नाम दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल हो. उसे 3 लाख सैनिकों की जरूरत अगर पड़ रही है तो इसका मतलब ये हुआ कि तैयारी बहुत बड़ी है. और इस तैयारी के सूत्रधार हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जो चीन की सेना के मुख्य कमांडर भी हैं. सेना से जुड़े एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने चीन की सेना में नई भर्ती के निर्देश दिए.

सीधे तौर पर भारत के लिए खतरा

दावा किया जा रहा है कि 3 लाख सैनिकों की भर्ती बॉर्डर पर चीन की ताकत बढ़ाने के लिए होगी. एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन को अपना टारगेट पूरा करने के लिए तीन लाख सैनिकों की जरूरत है. अगर बॉर्डर पर 3 लाख नए चीनी सैनिकों की तैनाती के दावे पर यकीन करें तो ये एक बड़ा खतरा है और ये खतरा सीधे तौर पर भारत के लिए है. अब सवाल ये है कि क्या चीन युद्ध चाहता है?

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सैनिकों को सुपर सोल्जर की तरह तैयार करेगा चीन

रिपोर्ट के मुताबिक चीन तीन लाख सैनिकों को सुपर सोल्जर की तरह तैयार करेगा और उनका इस्तेमाल जंग के दौरान करेगा. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट में खासतौर पर शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बयान का जिक्र है. शी जिनपिंग ने सेना के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा लड़ना और जीतना सेना का पहला और आखिरी लक्ष्य होना चाहिए. 2027 में पीपल्स लिबरेशन आर्मी का शताब्दी समारोह होगा और तब तक हमें अपने निर्धारित लक्ष्य पूरे करने होंगे. लक्ष्य को पूरा करने के लिए नई प्रतिभाओं की जरूरत है.

क्या हैं साल 2027 तक शी जिनपिंग के लक्ष्य?

आखिर शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने 2027 तक के लिए ऐसे क्या लक्ष्य तय किए हैं, जिसके लिए उन्हें भारी भरकम फौज की जरूरत होगी. कई रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि हो सकता है चीन 2027 तक उन इलाकों पर कब्जा करने के लिए जंग करे, जिसपर वो अपना दावा जताता है. यानी इशारा, भारत की ओर है. रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जेकेएस परिहार ने कहा, 'शी जिनपिंग की सैन्य तैयारी साल 2027 तक तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए है. इसका मतलब कहीं ये तो नहीं कि 2027 तक चीन भारत के खिलाफ युद्ध शुरू कर सकता है?'

भारत के पास क्या विकल्प हैं?

शी जिनपिंग का जोर ना सिर्फ नये सैनिकों की भर्ती पर है, बल्कि उन्हें आधुनिक तरीके से लड़े जाने वाले युद्ध के लिए तैयार करने में भी है. डोकलाम की जंग के बाद से चीन की सरकार अपनी सेना को ज्यादा मजबूत बनाने में जुटी हुई है. डोकलाम में मुंह की खाने के बाद भी चीन की सेना ने लद्दाख से लेकर सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ की कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार ये कोशिश नाकाम रही. कहीं ऐसा तो नहीं, कि इस बार भारी भरकम फौज के जरिए चीन युद्ध जैसा दुस्साहस करे. अगर ऐसा हुआ तो भारत के पास क्या विकल्प हैं?

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चीन के जख्म को कुरेदती है गलवान में हार

साल 2020 में चीन के सैनिकों ने गलवान में कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन पहले से सतर्क भारत ने 1962 की तरह इस बार कोई भूल नहीं की. गलवान में जय हिंद की छाती तन गई और चीन की गर्दन मुड़ गई. 20 के बदले हमने 40 मारे. गलवान में हम जीते, वो हारे. और यही हार चीन के जख्म को बार-बार कुरेदती है. इसलिए चीन की कोशिश बॉर्डर, खासकर LAC पर अपनी सेना को बलवान बनाने की है, ताकि दोबारा गलवान ना हो.

18 देशों के साथ है चीन का सीमा विवाद

चीन का सीमा विवाद सिर्फ भारत के साथ नहीं है, बल्कि दुनिया के 18 देश ऐसे हैं जिनकी जमीन पर चीन अपना दावा ठोकता है. भारत, वियतनाम, जापान, नेपाल, उत्तर कोरिया, फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, भूटान, ताइवान, लाओस, ब्रुनेई, तजाकिस्तान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और मंगोलिया इन 18 देशों से चीन का सीमा विवाद है.

अब चीन को छूट देने की गलती नहीं करता भारत

चीन के विस्तारवाद के सबूत ना सिर्फ जमीन पर, बल्कि समंदर में भी मिले हैं. साउथ चाइना सी से लेकर हिंद महासागर तक चीन घुसपैठ की नापाक हरकतों से बाज नहीं आता. अच्छी बात ये है कि भारत अब चीन को जरा सी भी छूट देने की गलती नहीं करता. भारतीय सेना ने गलवान में जिस तरह चीन के सैनिकों की गर्दन मरोड़ी, ठीक उसी तरह समंदर में भी दुश्मन को डुबाने के लिए हम तैयार हैं.

भारत और चीन में किसकी सेना कितनी मजबूत?

ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रक्षा बजट 4 लाख 78 हजार करोड़ रुपये है तो चीन का बजट 15 लाख 74 हज़ार करोड़ रुपये है. यानी भारत के रक्षा बजट के चीन का रक्षा बजट तीन गुने से भी ज्यादा है. एक्टिव सैनिकों की तुलना करें तो भारत के पास 14 लाख 45 हजार सैनिक हैं और चीन के पास 21 लाख 85 हजार सैनिक हैं. भारत के पास 2119 एयरक्राफ्ट हैं और चीन के पास 3260 एयरक्राफ्ट हैं. इनमें से फाइटर एयरक्राफ्ट की बात करें तो भारत के पास 542 हैं और चीन के पास 1200 हैं. भारत के पास 775 हेलीकॉप्टर हैं और चीन के पास 902 हेलीकॉप्टर हैं. भारत के पास टैंकों की संख्या 4730 है और चीन के पास 3205 यानी यहां पर चीन से भारत आगे है. भारत के पास 1 एयरक्राफ्ट कैरियर है और चीन के पास 2 है. सबमरीन की बात करें तो भारत के पास 17 सबमरीन हैं और चीन के पास 79 सबमरीन मौजूद हैं.

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