120 साल की उम्र में भी इबादत की पक्की है ये अम्मा, आज भी रखती है पूरे रोजे

काशीपुर के महुआखेड़ा गंज गांव की रहने वाली रफीकन के परिवार में 5 बेटे, 3 बेटियां, बहुएं और उनके बच्चे हैं. परिवार के लोग बताते है कि इतनी गर्मी के बाबजूद भी रफीकन जहां रोजे रख रही है और पांचों वक्त की नमाज भी पड़ती हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | May 29, 2019, 12:44 PM IST

काशीपुर, भगीरथ शर्मा: कहते है जब मन में खुदा के लिए पाक इबादत हो तो रोजा रखने के लिए उम्र की कोई सीमा मायने नहीं रखती है. इसी जुमले को काशीपुर के महुआखेड़ा गंज की रहने वाली 120 वर्षीय रफीकन ने सही साबित कर दिखाया है. उम्र भी उनके इस जज्बे के आगे आड़े नहीं आ रही है.

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अल्लाह की इबादत

Worship of Allah

रमजान के पाक महीने में इन दिनों मुस्लिम समाज शिद्दत भूखे प्यासे रहकर रोजा रख रहे हैं. उन्हीं में से रोजेदार रफीकन भी हैं. 120 साल की रफीकन की तबियत अब नासाज रहती है, लेकिन अल्लाह के लिए इबादत वह रोजे के जरिए आज भी कर रही हैं. 

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पांचों वक्त की पढ़ती हैं नमाज

reads Namaj all five times

काशीपुर के महुआखेड़ा गंज गांव की रहने वाली रफीकन के परिवार में 5 बेटे, 3 बेटियां, बहुएं और उनके बच्चे हैं. हर कोई अपनी बूढ़ी मां के साथ खुश रहता है, परिवार के लोग बताते है कि इतनी गर्मी के बाबजूद भी रफीकन जहां रोजे रख रही है, वहीं पांचों वक्त की नमाज भी पड़ती हैं. बच्चे ही नहीं बल्कि पूरा गांव रफीकन को इस उम्र में इबादत करते देख बहुत खुश होता है. बहू रेहाना कहती है कि परिवार का पूरा दिन अल्लाह की इबादत में गुजर रहा है.  

 

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हुआ था करिश्मा

Had been charisma

उनके परिवार के सदस्यों और पड़ोस में रहने वाले लोगों के मुताबिक, 120 साल की रफीकन का इंतकाल भी हो चुका था, लेकिन खुदा के करिश्मा के चलते हैं वह जिंदा हो गई. परिवार के सदस्यों ने बताया कि करीब 3 साल पहले रफीकन का इंतकाल हो चुका था. परिवार के सभी सदस्य गमजदा थे और रफीकन का जनाजा भी तैयार हो चुका था. लेकिन तब ही अचानक उनकी सांस चलती हुई दिखाई दी. 

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मौत को करीब से देख

See death closely

खुद रफीकन भी अपने इंतकाल की बात को स्वीकारते हुए बताती हैं कि खुदा के घर उन्हें खाना भी मिला और उसके बाद फरिश्तों ने उन्हें धक्का देकर यह कह कर भेज दिया कि अभी तुम्हारी उम्र पूरी नहीं हुई है. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. उसके बाद से रफीकन और भी खुदा की इबादत में डूब गई और अब आलम यह है कि 120 साल की उम्र में भी रफीकन कड़ी गर्मी में खुदा की इबादत करते हुए रोजे रख रही हैं.