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कांच की बोतलों से रेत बना रहा है 12वीं का छात्र, पर्यावरण को बचाने की अनोखी मुहिम

लैंडफिल साइट्स की तस्वीरें देखकर आप ज़रूर सोचते होंगे कि हमारे घरों के निकला कचरा कैसे पहाड़ बन गया है. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 11, 2019, 21:38 PM IST

ये कचरा अब कैसे बम बन चुका है. कोई कुछ करता क्यों नहीं. लेकिन जब आपके दिमाग में ये सवाल उठ रहे थे तभी एक 17 साल का लड़का इसका जवाब ढूंढ रहा था. 12वीं क्लास में पढ़ने वाले उदित सिंघल ने इस पर रिसर्च की है. कैसे landfil sites का आकार इतना बड़ा हो गया है.

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प्लास्टिक की तरह कांच भी नहीं होता डिकम्पोजड

Glass does not even have plastic like decimposed

रिसर्च के दौरान उदित को जवाब मिला की कचरे के पहाड़ का रूप देने में कांच की बोतलों की सबसे ज्यादा भूमिका होती है. उन्होंने पाया कि कचरे में इसका भार भी ज्यादा होता है और ये लाखों साल तक डिकम्पोज़ड भी नहीं होती. उदित ने जब अपने घर पर कांच की बोलतों को जमा होते हुए देखा तो सोचा कि आख़िर इसका क्या होगा...क्योंकि अगर ये बोतलें यूं ही लैंडफिल साइट्स में जाती रहीं तो प्लास्टिक की तरह ये भी पर्यावरण के लिए समस्या बन जाएगीं.

 

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समस्या का हल ढूढना है जरूर

The solution to the problem is definitely to find

उदित सिंघल के सामने कांच की बोतलों को रिसाइकल करने की चुनौती थी. उदित की ये खोज ख़त्म हुई न्यूज़ीलैंड में, .लेकिन एक बच्चे को कांच की बोलतें रिसाइकल करने में इतनी रूचि क्यों है ये न्यूज़ीलैंड की कंपनी समझ नहीं पा रही थी और ये मशीन खरीदना उदित के परिवार के बजट के बाहर की बात थी, तो उदित ने न्यूज़ीलैंड दूतावास से संपर्क किया और दूतावास में मशीन भारत लाने में उनकी पूरी मदद कि.

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रेत में तब्दील करती है कांच की बोलतें

Species of glass in the sand

उदित इस मशीन के ज़रिये कांच की बोतलों को रेत में तब्दील कर देते हैं. उदित ने पहले अपने घर और आस-पास के लोगों से कांच की बोतलें लेकर उन्हें रेत बनाना शुरू किया और अब उन्होंने अपनी एक वेबसाइट तैयार की है जहां लोग ये अपना पता और नंबर दे सकते हैं और उदित वहां से बोतलें लेकर उन्हें रेत में बदल देंगे.

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वेबसाइट के जरिए कर सकते हैं संपर्क

The contact can be done through the website

उदित ने कहा, ''आप अपना नाम, नंबर और लोकेशन इस वेबसाइट पर दे दीजिये. मुझे इसका नोटिफिकेशन मिल जाएगा और हम एक या दो दिन में आपसे बोतलें ले लेंगे. 

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खास है ये रेत

This is special sand

ख़ास बात ये है कि ये रेत नदियों से निकलने वाले रेत से बेहतर है. क्योंकि इसमें सिलिका की मात्रा अधिक है जिससे इसकी पकड़ ज्यादा मज़बूत हो जाती है और इसको सुखने में भी बहुत कम वक़्त लगता है. अगर उदित के क़दम को बढ़ावा मिलता है तो न सिर्फ़ कांच की बोतलें रिसाइकल होंगी बल्कि नदियां भी सुरक्षित हो जाएंगी क्योंकि तब लोग इमारत बनाने के लिए नदियों से निकलने वाले रेत की जगह बोतलों से बने रेत का इस्तेमाल करेंगे.

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जरूरी है इसका विकल्प भी ढढूना

It is also necessary to make the choice

वहीं, इस मामले पर पर्यावरणविद पंकज सरन का कहना है कि कांच की बोतलें भी उतनी ही बड़ी समस्या हैं जितनी कि प्लास्टिक, इस समस्या का हल ढूंढना बेहद ज़रूरी है.