2040 के बाद जानवर नहीं बल्कि पेड़-पौधों से तैयार मीट खाएंगे लोग, स्वाद में नहीं होगा कोई फर्क

 2040 तक जानवरों के मीट की जगह पेड़-पौधों से तैयार किया जाने वाला मीट ले सकता है. जी हां, बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप. आने वाले 20 सालों में दुनिया भर में 60 प्रतिशत से ज्यादा मीट जानवरों से नहीं बल्कि पेड़-पौधों से तैयार उत्पादों से मिलेगा.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 16, 2019, 11:05 AM IST

नई दिल्लीः दुनिया भर में ज्यादातर लोग नॉनवेज खाते हैं. ऐसे में हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के सामने आने से नॉनवेज पसंद करने वाले लोगों को झटका लग सकता है, क्योंकि इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले 20 सालों में मतलब 2040 तक में लोगों को जानवरों का मीट मिलना पूरी तरह से तो नहीं, लेकिन 60 परसेंट तक बंद हो सकता है. 2040 तक जानवरों के मीट की जगह पेड़-पौधों से तैयार किया जाने वाला मीट ले सकता है. जी हां, बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप. आने वाले 20 सालों में दुनिया भर में 60 प्रतिशत से ज्यादा मीट जानवरों से नहीं बल्कि पेड़-पौधों से तैयार उत्पादों से मिलेगा.

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नॉनवेज खाने वालों को होने वाली बीमारियां

Non-toxic diseases

रिपोर्ट के मुताबिक 2040 तक लोगों को 35 प्रतिशत मीट कल्चर्ड और 25 प्रतिशत पेड़-पौधों से तैयार मीट मिलेगा. वहीं आमतौर पर मिलने वाले मीट की अपेक्षा यह बेहद पौष्टिक होगा. जिससे ज्यादा नॉनवेज खाने वालों को होने वाली बीमारियों से भी छुटकारा मिलेगा. 

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पेड़-पौधों से तैयार मीट का स्वाद बिल्कुल जानवर के मांस जैसा होगा

Taste of meat made from trees will be exactly like the meat of the animal

लेकिन अगर आपको इस बात की चिंता है कि यह खाने में कैसा होगा, तो इस बात की भी चिंता छोड़ दीजिए, क्योंकि पेड़ पौधों से तैयार मीट (मांस) का स्वाद बिल्कुल जानवर के मांस जैसा होगा. यह आप के लिए नुकसान दायक बिल्कुल नहीं होगा.

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कल्चर्ड मीट

Cultured meat

रिपोर्ट के मुताबिक पेड़-पौधों से तैयार किए जाने वाले इस मीट में वे सभी खूबियां होंगी जो सामान्य तौर पर आम मीट में होती हैं. बता दें कल्चर्ड मीट जानवरों को नुकसान पहुंचाए बिना उनकी कोशिकाओं से तैयार किया जाता है.

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मांस उद्योग से कार्बन उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी होती है

Meat industry also increases carbon emissions

बता दें दुनिया भर में मांस के लिए बड़े पैमाने पर जानवरों को पाला जा रहा है, जिसके चलते यह उद्योग का रूप ले चुका है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन में इस बात की भी तस्दीक करते रहे हैं कि मांस उद्योग का हमारे पर्यावरण पर नुकसानदायक असर पड़ता है और इससे कार्बन उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी होती है.