वायु प्रदूषण : दिल्ली सहित 66 शहरों पर कार्रवाई करेगा NGT, लगेगा करोड़ों का जुर्माना

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार पर प्रदूषण को रोकने में विफल रहने पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के फैसले को सही करार देते हुए पर्यावरणविद व वैश्विक संगठनों ने अपना पक्ष रखा है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Oct 22, 2018, 14:00 PM IST

वैश्विक संगठनों का कहना है कि प्रदूषण को रोकने में विफल रहने पर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) पर कार्ययोजना नहीं तैयार करने वाले शहरों पर भी जुर्माना लगाया जाना चाहिए.

1/8

स्टील पिकलिंग यूनिट्स को बंद करने के निर्देश

Instructions for Closing Steel Pickling Units

संगठन की ओर से दावा किय़ा गया है कि दिल्ली के अलावा देश के 102 में से 66 शहरों पर भी इस तरह का जुर्माना लगाकर कार्रवाई की जानी चाहिए. एनजीटी ने दिल्ली सरकार पर आवासीय क्षेत्रों में लगी स्टील पिकलिंग यूनिट्स के खिलाफ कार्रवाई न करने के चलते यह जुर्माना लगाया और सरकार से इन यूनिट्स को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी निर्देश दिया. 

2/8

37 शहरों ने अपूर्ण की योजना

37 cities plan incomplete

इसके साथ ही एनजीटी ने वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए इस कार्यक्रम को लागू करने की गति बेहद धीमी भी बताई है. एनजीटी ने पाया कि सितंबर 2018 तक 102 शहरों में से 73 शहरों ने कार्ययोजना जमा कराई जिसमें से सिर्फ 36 शहरों की ही कार्ययोजना तैयार है, जबकि 37 शहरों की योजना अभी भी अपूर्ण है. साथ ही 29 शहरों ने अभी तक अपनी कार्ययोजना जमा ही नहीं की है.

3/8

स्वास्थ्य पर पड़ रहा है गहरा प्रभाव

Deepening effect on health

निर्वाना बीइंग के संस्थापक और पर्यावरणविद् जयधर गुप्ता ने कहा, "यह बात स्वास्थ्य और जिंदगी की है, इसमें अगर आप लापरवाही करोगे तो बहुत खतरनाक साबित होगा. देश में जुगाड़ की जो हमारी आदत है, इसी के साथ आप लोगों के स्वास्थ्य के साथ खेल रहे हो. पूरे भारत को लगता है कि प्रदूषण केवल दिल्ली का विषय है और कहीं प्रदूषण नहीं है. उन्हें यह नहीं पता कि यह हर जगह है. प्रदूषण की कहानी दिल्ली से आगे तो कहीं गई ही नहीं है और डब्लूएचओ की जो सूची है उसमें शीर्ष 15 में से 14 शहर भारत के ही हैं और दिल्ली उसमें छठे नंबर पर है तो आप सोच सकते हैं कि उन शहरों के क्या हाल हैं जो दिल्ली से ऊपर हैं."

4/8

कार्ययोजान नहीं सौंपने वाले शहरों पर लगे जुर्माना

Fines imposed on cities not assigning work

उन्होंने कहा, "एनजीटी को कार्ययोजना नहीं सौंपने वाले शहरों पर बिल्कुल जुर्माना लगाना चाहिए, यह अधिकरण इसलिए ही है कि न्यायापालिका की भी भूमिका है कि वह स्वास्थ्य और जिंदगी की रक्षा करे. और अगर वह जुर्माना नहीं लगाएंगे तो एक तरीके से यह प्रदूषण को नकारने वाली बात होगी. किसी को तो कड़क होना पड़ेगा ना. जब सरकार और नेता हमारी जिंदगी की रक्षा नहीं कर रहे तो न्यायापालिका को यह करना पड़ेगा."

5/8

एनजीटी नहीं तो कौन करेगा प्रदूषण पर निगरानी

If not the NGT, who will monitor the pollution

जयधर गुप्ता ने कहा, "सरकार इसलिए प्रदूषण पर कार्रवाई नहीं करती क्योंकि वह इसे वोटबैंक का मुद्दा नहीं समझती. वो कह रहे हैं कि एनजीटी करेगा और एनजीटी नहीं करेगा तो फिर कौन करेगा." वहीं गैर सरकारी संस्था ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया ने इस बारे में कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत को योजना बनाने से लेकर उसे लागू करने तक हर कदम पर हस्तक्षेप करके यह सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि लोगों के हितों की रक्षा हो. क्या यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह बिना कोर्ट के हस्तक्षेप के नीतियों को लागू करे? हम लोग देख रहे हैं कि सरकार लगातार पर्यावरण से जुड़े कानून कमजोर करके और प्रदूषण फैलाने वाले कंपनियों के हित में नीतियों में बदलाव कर रही है." 

6/8

अप्रैल में मांगी गई लोगों की प्रतिक्रिया

Reactions of people sought in April

उन्होंने कहा, "आम लोगों और मीडिया के काफी दबाव के बाद पर्यावरण मंत्रालय ने अप्रैल में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के ड्राफ्ट को लोगों की प्रतिक्रिया के लिये अपने बेवसाइट पर सार्वजनिक किया था. लेकिन पांच महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कार्यक्रम को लागू नहीं किया जा सका है. वायु प्रदूषण की खराब स्थिति पर सवाल उठाने पर राज्य और केंद्र सरकार एक-दूसरे पर उंगली उठाने लगते हैं."

 

7/8

एनजीटी का काम है प्रदूषण पर निगरानी रखना

NGT's work is to monitor pollution

एनजीटी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरणविद् जयधर गुप्ता ने कहा, "एनजीटी का काम ही है प्रदूषण पर निगरानी रखना और जो आबादी है उसकी सेहत और जिंदगी को बचाना. देखिए जो बच्चा हमारे यहां जन्म ले रहा है, वह सात सिगरेट दिल्ली में पी रहा है, चार सिगरेट मुंबई में पी रहा है तो ऐसे कैसे चलेगा."

 

8/8

गलत बर्ताव दंड का प्रावधान

Provision of wrong conduct penalties

जुर्माने लगने से इन शहरों पर प्रभाव पड़ेगा के सवाल पर उन्होंने कहा, "देखिए गलत बर्ताव पर दंड का प्रावधान है और अच्छे बर्ताव को प्रोत्साहन देते हैं, तो एनजीटी का कड़क होना, उन प दंड लगाना इसीलिए है कि गंदी आदतों को सजा में तब्दील करें और यही फार्मूला पूरी दुनिया में काम करता है, और यहां तो ज्यादा काम करेगा, क्योंकि हम लोग तो डंडे से जल्दी बात समझते हैं. तो यही एक तरीका है."