अब नहीं कर पाएंगे वॉट्सएप और गूगल डुओ जैसे एप से कॉलिंग, लगेगी रोक

जी न्यूज की इस खास पेशकश में आप अपने शहरों की कुछ चुनिंदा और खास खबरें हिन्दी में बस एक क्लिक में पढ़ सकते हैं.

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नई दिल्ली: दैनिक भास्कर के गुरुवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर में बताया गया है कि सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए इंटरनेट टेलीफोनी नियमों पर स्पष्टीकरण जारी किया है. खबर में यह भी बताया गया है कि एक एप से दूसरे एप या फोन नंबर पर कॉलिंग को इंटरनेट टेलीफोनी कहते हैं. खबर में आगे दावा किया गया है कि संशोधन के मुताबिक अधिकृत लाइसेंस वाली कंपनियों को ही इसकी इजाजत होगी. खबर के मुताबिक वॉट्सएप और गूगल डुओ जैसे एप के जरिए कॉलिंग की अनुमति नहीं होगी. खबर में आगे यह भी कहा गया है कि एयरटेल, वोडाफोन, जियो जैसी कंपनियां डेटा या वाई-फाई नेटवर्क के जरिये यह सुविधा दे सकती हैं. सामान्य कॉल की तरह एप के जरिये कॉल पर भी टर्मिनेशन चार्ज लगेगा. खबर में बताया गया है कि जिस कंपनी के नेटवर्क पर कॉल आती है, उसे टर्मिनेशन चार्ज मिलता है. खबर के मुताबिक ट्राई ने घरेलू कॉल के लिए 6 पैसे और अंतरराष्ट्रीय कॉल के लिए 30 पैसे प्रति मिनट का चार्ज तय कर रखा है.

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रियाद: दैनिक भास्कर के सूरत संस्करण में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि खाड़ी के दो देशों- सऊदी अरब और कतर के बीच 2013 से लगातार तनाव बढ़ रहा है. खबर के मुताबिक इसका कारण है- व्यापार संबंधी समस्याएं और आतंकवाद. खबर में बताया गया है कि अब सऊदी अरब 5 हजार करोड़ रुपए में नहर खुदवाकर खुद को कतर से दूर करने की तैयारी में है. खबर के मुताबिक नहर 60 किमी लंबी, 200 मीटर चौड़ी और 20 मीटर गहरी होगी. खबर में बताया गया है कि ये नहर बनाने के लिए सऊदी अरब ने तमाम इंटरनेशनल कंपनियों से टेंडर मंगाए हैं. खबर में आगे बताया गया है कि नहर कौन बनाएगा, ये तय करने में ही तीन महीने लगेंगे जबकि काम पूरा करने में दो साल तक का समय लग सकता है. खबर में दावा किया गया है कि अरब और कतर के बीच की सल्वा नहर को ही खोदकर उसे इंटरनेशनल बॉर्डर के तौर पर विकसित किया जाएगा. खबर के मुताबिक सल्वा नहर कतर की सीमा से 5 किमी पहले तक खोदी जाएगी. इस बीच ये सवाल भी उठ रहा है कि कंटीले तारों और दीवारों का विकल्प छोड़कर सऊदी अरब को सीमा पर नहर बनाने की क्या जरूरत पड़ गई. इसके जवाब में रियाद प्रशासन का कहना है कि- "हम इसे सिर्फ सीमा रेखा नहीं बल्कि पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करना चाह रहे हैं. इस नहर में बोट और याच चलवाने की योजना है. साथ ही यहां वाटर स्पोर्ट्स भी कराए जाएंगे."

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उज्जैन/होशियारपुर: दैनिक जागरण के चंडीगढ़ संस्करण में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि अपनी फिटनेस को लेकर प्रसिद्ध मध्य प्रदेश के उज्जैन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सचिन अतुलकर से मिलने होशियारपुर के दसूहा की एक युवती उज्जैन पहुंच गई. खबर के मुताबिक युवती का कहना है कि वह सोशल मीडिया पर एसपी की तस्वीरें देखने के बाद उनकी बॉडी व फिटनेस के प्रति आकर्षित हो गई है और उनसे एक बार मिलना चाहती है. खबर में यह भी बताया गया है कि युवती की मानसिक हालत ठीक नहीं है, उसके पिता ने भी बताया कि बेटी तलाकशुदा है और पिछले दिनों वह बिना कुछ बताए उज्जैन पहुंच गई. खबर में आगे बताया गया है कि सोमवार को उसकी मां व अन्य लोग उसे वापस लाने उज्जैन पहुंचे थे. काफी समझाने के बाद वह होशियारपुर लौटने को तैयार हुई. खबर के मुताबिक बुधवार दोपहर बाद करीब चार बजे युवती को लेकर परिजन उसे उज्जैन से लेकर होशियारपुर के लिए रवाना हुए. खबर में यह भी बताया गया है कि युवती की एसपी से मुलाकात नहीं हो पाई.

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नई दिल्ली: नवभारत टाइम्स के मुंबई संस्करण में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि सवा अरब से ज्यादा की आबादी वाले भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के हिसाब से डॉक्टरों की उपलब्धता न के बराबर है. खबर के मुताबिक इस मामले में भारत दुनिया के कई पिछड़े मुल्कों से भी पीछे है. खबर में बताया गया है कि नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2018 से पता चला है कि देश में हर 11,000 लोगों के महज एक डॉक्टर है. जबकि सामान्य तौर पर 1,000 लोगों पर एक डॉक्टर का औसत होना चाहिए. यानि भारत में 11 गुना डॉक्टरों की जरूरत है. खबर में दावा किया गया है कि यह बीमारी, हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ फाइनेंस का सालाना आंकड़ा है. इसमें अलग-अलग राज्यों की स्थितियों पर भी बात की गई है. खबर में आगे यह भी बताया गया है कि देश के ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. खबर के मुताबिक हालांकि सरकार देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये का हेल्थ कवर देने जा रही है, बावजूद इसके सेहत पर प्रति व्यक्ति खर्च में बढ़ोतरी जरूरी है.

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नई दिल्ली: हिन्दुस्तान अखबार के गुरुवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गई एक खबर में बताया गया है कि योग बीमारियों से लड़ने में कारगर है और इसकी वैज्ञानिक पुष्टि भी होती है. खबर में दावा किया गया है कि एम्स के कई विभागों में दिल, मधुमेह, श्वांस और किडनी के रोगियों को दवा के साथ-साथ योग कराया गया तो बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए. खबर में यह भी बताया गया है कि एम्स के अलावा पीजीआई जैसे बढ़े संस्थान भी अब रोगियों को दवा के साथ विशेषज्ञों की देखरेख में योग की सलाह दे रहे हैं. खबर में एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संदीप सेठ के हवाले से बताया गया है कि एम्स में हृदय रोगियों को स्वास्थ्य लाभ के लिए पिछले साल कार्डियो रिहेबलिटेशन योग नाम का कार्यक्रम शुरू किया गया. इसके तहत 20 मरीजों को चुना गया. मरीजों को दवाओं के साथ योग और ध्यान कराया गया. इनमें से एक मरीज का हृदय 20 फीसदी काम कर रहा था. पिछले एक साल में दवाओं के साथ योग करने से उसकी हृदय संचालन क्षमता 30% हो गई. ये नतीजा बेहद सकारात्मक है.

 

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