बाघों का गढ़ कहे जाने वाले बांधवगढ़ में 2 हजार साल से विश्राम कर रहे हैं भगवान विष्णु, देखें तस्वीर

पौराणिक कथाओं के अनुसार लंका से लौटने के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण के लिए यहां एक किले का निर्माण कराया था

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Sep 25, 2018, 13:08 PM IST

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व के लिए दुनिया भर में फेमस है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि टाइगर रिजर्व या कहें की वन्यजीव के अलावा बांधवगढ़ की अपना पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी है. कहते हैं बांधवगढ़ का नाम यहां मौजूद एक पहाड़ के नाम पर रखा गया था, लेकिन पौराणिक कथाओं में बांधवगढ़ का अलग ही उल्लेख मिलता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार लंका से लौटने के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण के लिए यहां एक किले का निर्माण कराया था, बाद में इस किले का नाम बंधव मतलब भाई और गढ़ मतलब किला के नाम पर बांधवगढ़ पड़ गया. मान्यता है कि भगवान राम ने लक्ष्मण को यह उपहार उन्हें लंका पर नजर रखने के लिए दिया था. 

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विश्राम मुद्रा में भगवान विष्णु

seven hooded serpent SheshNag

यहां भगवान विष्णु की ऐसी प्रतिमा मौजूद है जो कि कम ही देखने को मिलती है. इस प्रतिमा में भगवान विष्णु विश्राम मुद्रा में हैं. यह प्रतिमा देखने में जितनी आकर्षक है उतनी ही रहस्मयी भी है.(फोटो साभारः twitter/@ddggn)

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प्रतिमा करीब 2 हजार वर्ष पुरानी

2 thousand years old statue

बांधवगढ़ में मौजूद इस विष्णु प्रतिमा को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं और इस अद्भुत प्रतिमा की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद करते हैं. कहते हैं बांधवगढ़ में मौजूद भगवान विष्णु की यह प्रतिमा करीब 2 हजार वर्ष पुरानी है. (फोटो साभारः twitter/@MPTourism)

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भगवान विष्णु की विश्राम करती प्रतिमा

seven hooded serpent SheshNag

प्रतिमा के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए कई वैज्ञानिक भी इसे देखने आते हैं और इसके पीछे के रहस्य को जानने की कोशिश करते हैं.(फोटो साभारः twitter/@IntolerantMano2)

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भगवान विष्णु की प्रतिमा

Statue of Lord vishnu

क्षीर सागर में विश्राम करती भगवान विष्णु की यह प्रतिमा कम ही देखने को मिलती है, जिसके चलते न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.(फोटो साभारः twitter/@topindiantours)

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किला एक रहस्य

Fort in Bandhavgarh

वहीं बांधवगढ़ में मौजूद किला भी एक रहस्य की ओर लेकर जाता है. बांधवगढ़ में मौजूद इस किले के बारे में कई किवदंतियां प्रचलित हैं. यहां के स्थानीय लोगों के मुताबिक इस किेले में अब कोई नहीं आता-जाता, लेकिन सैलानी यहां आए दिन अपना बसेरा डाले रहते हैं.(फोटो साभारः twitter/@ddggn)

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शिव पुराण में किले का उल्लेख

Discription in Shiv Puran

जहां एक ओर इस किले के निर्माण का उल्लेख नारद पंच और शिव पुराण में मिलता है तो वहीं कहा जाता है कि इसका निर्माण रीवा के राजा व्याघ्रदेव ने कराया था.(फोटो साभारः twitter/@topindiantours)

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किले के लिए एक ही मार्ग

 Bandhavgarh Fort

इस किले के अंदर जाने के लिए सिर्फ एक ही मार्ग है और यह मार्ग घने जंगलों के बीच से होकर गुजरता है. वहीं जंगल के अंदर एक सुरंग भी है, जो कि सीधे रीवा निकलता है.(फोटो साभारः twitter/@BinaKak)

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राजा मार्तंड सिंह

Martand Singh

कहते हैं रीवा के राजा मार्तण्ड सिंह और गुलाब सिंह इस किले का इस्तेमाल गुप्त रणनीति बनाने के लिए करते थे. किले का प्रयोग एक खूफिया स्थान के रूप में किया जाता था. राजा मार्तण्ड सिंह किले तक पहुंचने के लिए इसी सुरंग का इस्तेमाल करते थे. (फोटो साभारः twitter/@i_WanderingSoul)

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पत्थरों को तराशकर बनाई गई प्रतिमा

Statue of Lord vishnu reclining on seven hooded snake

किले की सीमा में ही भगवान विष्णु की प्रतिमा देखने को मिलती है. जो कि पत्थरों को तराशकर बनाई गई है. बांधवगढ़ में भगवान विष्णु की एक दो नहीं बल्कि 12 अवतार की प्रतिमाएं मौजूद हैं. (फोटो साभारः twitter/@topindiantours)