भोपाल गैस त्रासदी : कहानी उस रात की, जिसने लील लीं हजारों जिंदगियां
1984 में दो और तीन दिसंबर की दरम्यानी रात को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई थी गैस त्रासदी.
नई दिल्ली : दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ ऐसा हुआ, जिसने देश-दुनिया का झकझोर के रख दिया था. इस रात को यहां के यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के प्लांट से जहरीली गैस का रिसाव हुआ, जो पूरे शहर में फैल गई. इस समय शहर के लोग चैन की नींद सो रहे थे. लेकिन इस गैस ने तीन हजार से अधिक लोगों को सुबह जागने ही नहीं दिया और उन्हें मौत की नींद सुला दिया. सुबह हुई तो शहर में चीख पुकार मच गई. जानिए इस भोपाल गैस त्रासदी की पूरी कहानी. (सभी फोटो सोशल मीडिया से ली गई हैं)
यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से हुआ था रिसाव

1984 की उस दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी के प्लांट नंबर 'सी' के टैंक नंबर 610 में भरी जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस में पानी भर गया. केमिकल रिएक्शन से बने दबाव को टैंक सह नहीं पाया और वो खुल गया. इससे जहरीली गैस का रिसाव होने लगा. हवा के साथ ये गैस पूरे इलाके में फैल गई और आंखें खुलने से पहले ही हजारों लोग मौत की नींद सो गए.
अलार्म सिस्टम था बेअसर

तीन मिनट में गैस ने ढाया कहर

अस्पतालों में भी जगह नहीं बची

3 हजार से अधिक मौत

5 लाख लोग हुए थे प्रभावित

2006 में तत्कालीन प्रदेश सरकार के एक शपथ पत्र में माना गया था कि भोपाल के लगभग 5 लाख 20 हजार लोग इस जहरीली गैस से सीधे रूप से प्रभावित हुए थे. इसमें 2,00,000 बच्चे थे, जिनकी उम्र 15 साल से कम थी और 3,000 गर्भवती महिलाएं थीं. आंशिक रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या लगभग 38,478 थी. 3900 तो बुरी तरह प्रभावित और पूरी तरह अपंगता के शिकार हो गए थे.
8 घंटे बाद खत्म हुआ था गैस का असर

पीढ़ियां झेल रही दंश

यज्ञ ने बचाई परिवार की जान

हालांकि, इस सब के बीच ऐसा भी परिवार था जो पूरी तरह इस गैस से सुरक्षित बच निकला. माना जाता है कि इस गैस कांड में भोपाल का कुशवाहा परिवार बिना किसी हानि के बच गया था क्योंकि उस परिवार में हर दिन यज्ञ किया जाता था. जिस दिन गैस रिसाव हुआ उस दिन भी इस परिवार में यज्ञ चल रहा था, जिससे जहरीली गैस का उनके घर में असर नहीं हुआ. यज्ञ को वातावरण में प्रदूषण के समाधान के लिए वैज्ञानिक समाधान माना जाता है.
2014 में हुई आरोपी की मौत

गैस कांड में लोगों की मौत का जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के मालिक वारेन एंडरसन को माना गया. लेकिन उस पर कोई कार्रवाई हो सके इससे पहले ही वो भारत से भाग निकलने में कामयाब हो गया. माना जाता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने वारेन एंडरसन को विशेष विमान से भोपाल से निकलने की सुविधा उपलब्ध करवाई थी. हालांकि, एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उस समय की केंद्र सरकार से आदेश मिलने के बाद वारेन को भोपाल से बाहर जाने दिया गया. 29 सितंबर, 2014 को वारेन का अमेरिका के फ्लोरिडा में निधन हो गया.

