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तस्वीरों में देखिए वंदे भारत एक्सप्रेस की 8 खूबियां, 15 फरवरी को पीएम करेंगे रवाना

ट्रेन में एक कोच से दूसरे कोच में जाने के लिए गैंगवे पूरी तरह सील किया गया है. इससे यात्रियों को परेशानी नहीं होगी और पूरी ट्रेन के साथ ही ड्राइवर का केबिन भी वातानुकूलित है.

पीएम मोदी देश की पहली इंजनरहित ट्रेन 'वंदे भारत एक्सप्रेस' को 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. 15 फरवरी को प्रधानमंत्री सुबह 10 बजे ट्रेन को रवाना करेंगे. वंदे भारत 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी जिसमें कुल 16 कोच हैं, जो कि चेयरकार हैं, 16 में से 12 कोच नॉर्मल चेयरकार हैं. हर बोगी में 78 सीटें हैं.

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विदेश से आयात किए गए ट्रेन के कुछ पार्ट

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केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में ट्रेन-18 को वंदे भारत एक्सप्रेस नाम दिया था. इस ट्रेन को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है. ट्रायल के दौरान ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार पर दौड़ाया गया, इसके साथ ही यह भारत की सबसे तेज गति से दौड़न वाली ट्रेन बन गई. ट्रेन के कुछ पार्ट्स को विदेश से आयात किया गया है. ट्रेन के कोच में स्पेन से मंगाई गई विशेष सीट लगी है, जिनहें जरूरत पर 360 डिग्री तक घुमाया जा सकता है.

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वंदे भारत के सफर से समय की बचत होगी

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आधुनिक सुविधाओं से लैस और बिना इंजन के दौड़ने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को बुलेट ट्रेन के मॉडल पर तैयार किया गया है. ट्रेन को ट्रायल के दौरान 180 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर दौड़ाया गया है. नई ट्रेन शताब्दी की जगह लेगी, अभी शताब्दी की रफ्तार 130 किमी प्रति घंटे तक है. ऐसे में नई एक्सप्रेस ट्रेन के सफर से लोगों के समय में 15 से 20 प्रतिशत तक की बचत होगी.

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ट्रेन के पहले कोच में लगा है ड्राइविंग सिस्टम

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वंदे भारत एक्सप्रेस की खास बात यह है कि इसमें आपको दूसरी ट्रेनों की तरह इंजन दिखाई नहीं देगा. जिस पहले कोच में ड्राइविंग सिस्टम लगया गया है, उसमें 44 सीटें दी गई हैं. वहीं ट्रेन के बीच में लगे दो एग्जीक्यूटिव कोच में 52 सीटें होंगी. इसके अलावा अन्य कोच में 78 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की गई है.

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ट्रेन के 80 फीसदी पुर्जों को देश में ही बनाया गया

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ट्रेन को तैयार करने में 100 करोड़ की लागत आई है. इसे रिकॉर्ड 18 महीने में सोचा और तैयार किया गया है. अगर इस ट्रेन को विदेश से मंगाया जाता तो इसकी कीमत करीब 200 करोड़ रुपये होती. रेलगाड़ी में लगने वाले 80 फीसदी पुर्जे भी मेक इन इंडिया के तहत देश में ही बनाए गए हैं.

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ट्रेन में बेबी केयर के लिए अलग से जगह

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ट्रेन के कोच में स्पेन से मंगाई गई विशेष सीट लगाई गई हैं, इन्हें जरूरत पड़ने पर 360 डिग्री तक घुमाया जा सकता है. अभी इसे दिल्ली से वाराणसी के रूट पर चलाया जाएगा. आने वाले समय में उम्मीद है कि इसे देश के प्रमुख रेल मार्गों पर चलाया जाएगा. कोच में दिव्यांगों के लिए विशेष रूप से दो बाथरूम और बेबी केयर के लिए विशेष स्थान दिया गया है.

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सफर के दौरान पैर रखने के लिए अलग से जगह

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सफर के दौरान यात्रियों के पैर रखने के लिए अलग से जगह दी गई है. इसके अलावा हर सीट के पीछे पानी की बोतल या अन्य खाने-पीने की सामग्री रखने के लिए अन्य ट्रेनों से बेहतर स्पेस दिया गया है. सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन के हर कोच में छह सीसीटीवी लगाए गए हैं. ड्राइवर के कोच में एक सीसीटीवी इंस्टॉल किया गया है, जहां से यात्रियों पर नजर रखी जा सकती है. ट्रेन में टॉक बैक की भी सुविधा दी गई है, यानी आपात स्थिति में यात्री ड्राइवर से बात भी कर सकते हैं. इसी तरह की सुविधा मेट्रो में भी दी जाती है.

 

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कोच में जंजीर की जगह मिलेगा स्विच

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ट्रेन में जंजीर अब पुरानी बात हो जाएगी. वंदे भारत एक्सप्रेस में दो इमरजेंसी स्विच लगाए गए हैं. आपात स्थिति में इसे दबाकर मदद ली जा सकती है. ट्रेन में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए हर छोटी-बड़ी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है.

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वैकल्पिक कोच में मोटराइज्ड इंजन की व्यवस्था

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वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 16 कोच हैं. वैकल्पिक कोच में मोटराइज्ड इंजन की व्यवस्था है ताकि पूरी ट्रेन एक साथ तेजी से चल सके और रुक सके. यह रेलगाड़ी एक ट्रेन सेट है. ऐसे में ये ट्रेन आगे व पीछे किसी भी दिशा में चल सकती है. सामान्य गाड़ियां एक ही दिशा में चलती हैं. इन गाड़ियों को दूसरी तरफ इंजन लगा कर मोड़ना पड़ता है जिसमें समय और पैसे दोनों खर्च होते हैं.