close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बच्चों को पढ़ने से रोकते हैं नक्सली, मासूमों ने स्कूल जाने के लिए उठाया तीर-धनुष

इस गांव में अधिकतर आदिवासी और सबर जाति के लोग रहते हैं. यह गांव विकास से कोसों दूर है. सड़कें नहीं होने के कारण लोगों को जंगल से होकर गांव जाना पड़ता है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Nov 12, 2018, 11:44 AM IST

इस गांव में सड़कें नहीं होने के कारण लोगों को जंगल से होकर गांव जाना पड़ता है. गांव के बच्चे इस रास्ते से स्कूल जाने से कतराते हैं. उन्हें सदैव अज्ञात नक्सलियों का डर सताता रहता है.

1/5

स्कूल जाने से कतराते हैं गांव के बच्चे

Children carry bow & arrows to protect themselves from Naxals

जमशेदपुर से तकरीबन 80 किलोमीटर दूर झारखंड और बंगाल की सीमा पर एक गांव है पोचपानी, जहां अधिकतर आदिवासी और सबर जाति के लोग रहते हैं. यह गांव विकास से कोसों दूर है. सड़कें नहीं होने के कारण लोगों को जंगल से होकर गांव जाना पड़ता है. गांव के बच्चे इस रास्ते से स्कूल जाने से कतराते हैं. उन्हें सदैव अज्ञात नक्सलियों का डर सताता रहता है.

2/5

हाथों में तीर-धनुष थाम स्कूल जाते हैं बच्चे

children have to pass through forest area

बच्चे स्कूल जाना भी बंद नहीं करना चाहते हैं. नक्सलियों के डर से ये ग्रुप में अपने-अपने हाथों में तीर-धनुष थामकर स्कूल जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

3/5

'जंगल में दिखते हैं नक्सली'

children said naxal spoted in forest

स्कूली छात्र बुधु सबर का कहना है कि कुछ दिनों से स्कूल आने जाने के वक्त कुछ लोग जंगल में दिखते हैं. वे इशारा कर बुलाते हैं, लेकिन हमलोगों की तादाद और हाथो में तीर-धनुष देखकर उनकी हिमत नहीं होती है.

 

4/5

बच्चों ने अपनी सुरक्षा में थामे तीर-धनुष

children carry bow and arrow

वहीं, एक अन्य छात्र काला सबर का कहना है कि जंगल में जो लोग दिखते हैं वो हमारे गांव के नहीं हैं. वे अजीब भाषा बोलते हैं. हमें डर लगता है. इनसे मुकाबला करने के लिए हम तीर-धनुष लेकर स्कूल जाते हैं.

5/5

'आदिवासियों के कारण ही नहीं हो रहा गांव का विकास'

naxal affects development works in village

लोगों का कहना है कि आदिवासियों के कारण ही गांव का विकास नहीं हो सका है. एकबार नक्सलियों ने सड़क निर्माण के काम को बंद करा दिया, जो आज तक बंद पड़ा है. उनके डर से बच्चों को हाथों में तीर-धनुष लेकर स्कूल जाना पड़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)