जमीन, हवा के बाद पानी में मजबूत होना चाहता है चीन, भारत के लिए बनेगा मुसीबत!

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन हिंद महासागर और अन्य सागरों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के लिए पाकिस्तान में ग्वादर सहित अन्य विदेशी बंदरगाहों तक अपना विस्तार कर रहा है.

आशु दास | Jan 16, 2019, 15:23 PM IST

चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता पर अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में वाणिज्यिक बंदरगाहों तक पहुंच बढ़ाने की चीनी सेना की कोशिशों से भविष्य में बंदरगाहों तक सैन्य साजोसामान मुहैया कराने की आवश्यकता पूरी होगी. संभावना है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) अपने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू साजोसामान अभियान, आपूर्ति, पुन: पूर्ति के लिए वाणिज्यिक बंदरगाहों और असैन्य जहाजों का इस्तेमाल करेगी. 

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कोरियाई प्रायद्वीप की भी हुई पहचान

रिपोर्ट में कोरियाई प्रायद्वीप की पहचान एक ऐसे क्षेत्र के रूप में की गई है जहां अस्थिरता और अनिश्चितता की स्थिति है. साथ ही भारत के साथ लगती चीन की सीमा पर क्षेत्रीय विवादों के संबंध में भी चिंताएं जताई गई है. सीमा विवाद के कारण 2017 में विवादित डोकलाम क्षेत्र में तनावपूर्ण गतिरोध पैदा हुआ था.

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स्वदेशी विमानवाहक पोत का निर्माण

पेंटागन ने कहा कि चीन अपना पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत बना रहा है. इस जहाज का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्रीय रक्षा अभियान में मदद देना होगा. उसने कहा, ‘‘बीजिंग संभवत: हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए इस जहाज का इस्तेमाल करेगा.’’ 

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2018 में हुआ था परीक्षण

इस जहाज का प्रारंभिक परीक्षण मई 2018 में हुआ था और इसके 2019 तक बेड़े में शामिल होने की संभावना है. 

 

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युद्ध के लिए हो रही है तैयारी

उल्लेखनीय है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल की शुरुआत में सेना के साथ मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने सेना से युद्ध और अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है. 

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अमेरिका करेगा मदद

भारत और चीन के बीच काफी समय से चल रही तनातनी को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय राजनीति को करीब से जानने वाले विशेषज्ञों ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा है अगर भारत और चीन के बीच युद्ध की स्थिति उत्पन्न होती है तो अमेरिका भारत के समर्थन में आगे आ सकता है.  मीडिया सूत्रों के मुताबिक वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के सीनियर फेलो जैक कूपर ने कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि अमेरिका, भारत और चीन के बीच चल रहे बॉर्डर विवाद में दखल देने की कोशिश करेगा, लेकिन मुझे यह जरूर लगता है कि चीन और भारत के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते अमेरिका के साथ भारत के सुरक्षा संबंध और मजबूत होंगे.'