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ग्लोबल वॉर्मिंग से सिर्फ पानी की समस्या ही नहीं, बल्कि इस जानवर के हमले भी बढ़ेंगे

इन दिनों ग्लोबल वॉर्मिंग वैश्विक समस्या बन गई है. भारत, चीन, अमेरिका, इंग्लैंड समेत दुनिया के तमाम देश इससे निपटने के लिए विचार और तैयारी कर रहे हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 24, 2019, 11:01 AM IST

दुनियाभर में ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन लगातार बढ़ने के कारण किसी देश में पहाड़ों की बर्फ पिघल रही है तो कहीं पर ज्वालामुखी फट रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे ही ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन होता है, तो हालात खराब हो सकते हैं. हालही में एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि इस सदी के अंत तक ग्रीनलैंड में 4.5 प्रतिशत तक बर्फ पिघल जाएंगी, जिससे समुद्र के स्तर पर 13 इंच की वृद्धि होगी. साइंस एडवांसेस नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि ऐसा भी हो सकता है कि साल 3000 तक यहां बर्फ ही न बचे.

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बढ़ेंगे मगरमच्छ के हमले

Crocodile attacks will increase

ग्लोबल वार्मिग के चलते मगरमच्छ के हमलों की संख्या में वृद्धि हो सकती है. एक ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ ने रविवार को इस बात का खुलासा किया है. सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में चार्ल्स डारविन विश्वविद्यालय में पर्यावरण और आजीविका अनुसंधान संस्थान के एक प्राणी शास्त्री एडम ब्रिटन ने कहा, "तापमान में वृद्धि के साथ ही मगरमच्छ ऐसे क्षेत्रों में चले जाएंगे जहां वे पहले कभी नहीं बसे थे."

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धरती होगी गर्म तो बढ़ेगा मगरमच्छ का फैलाव

Earth will become hot then spread of crocodile

उन्होंने कहा कि आबादी के इस प्रसार का तात्पर्य यह है कि अब ये सरीसृप उन लोगों के सम्पर्क में आएंगे जो पहले कभी इनके सम्पर्क में नहीं आए थे. ब्रिटन ने कहा, "जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है इसका मतलब यह है कि इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में मगरमच्छ के हमलों में बढ़ोत्तरी होगी क्योंकि ज्यों-ज्यों यह गर्म होता जा रहा है, यह मगरमच्छों के फैलाव को बदलने जा रही है."

 

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इंडोनेशिया में सामने आ चुके हैं मामले

Issues that have surfaced in Indonesia

उन्होंने आगे कहा, "हम इंडोनेशिया में देख रहे हैं कि मगरमच्छ उन जगहों पर जा रहे हैं जिन्हें या तो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा है या काफी लंबे समय से नहीं देखा है और इससे हमें हमलों की श्रृंखला भी देखने को मिल रही है."

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निवास स्थान के कारण हो रहा है नुकसान

Loss due to habitation

ब्रिटेन ने यह भी कहा, "अपने निवास स्थान के नुकसान के बाद मगरमच्छ इन स्थानों को स्थानांतरित हो जाएंगे और उन जगहों पर चले जाएंगे, जहां लोग उनके आदि नहीं हैं." ब्रिटेन के मुताबिक, उत्तरी क्वींसलैंड के इलाकों में इन मगरमच्छों को देखा जा चुका है जिन्हें पहले शायद ही वहां देखा गया है.