close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

सूखे और गरीबी से परेशान किसान का सहारा बनीं बेटियां, पिता के साथ खेत में चला रही हैं हल

. परभणी के पिंगली गांव में रहने वाले बाबुराव राठौड़ की अपनी कोई जमीन नहीं है. वह भूमिहार है. अब तक वह किसी और की जमीन पर मजदूरी करते थे.

गजानन देशमुख | Jul 23, 2019, 14:19 PM IST

परभणीः सूखे और गरीबी की मार झेल रहे एक पिता को अपनी बेटियों के साथ खेत में हल चलाना पड़ रहा है. घटना महाराष्ट्र के परभणी की है, जहां के पिंगली गांव में एक किसान की दोनों बेटियां घर में बैल ना होने की वजह से खुद ही हल चलाती हैं. परभणी के पिंगली गांव में रहने वाले बाबुराव राठौड़ की अपनी कोई जमीन नहीं है. वह भूमिहार है. अब तक वह किसी और की जमीन पर मजदूरी करते थे, लेकिन पिछले कई सालों से उन्होनें देवस्थान की जमीन सिंचाई के लिए किराए से ली है.

1/7

बाबूराव के पास अपने बैल नहीं हैं

Baburao does not have his own bull

बाबूराव के छह बच्चे हैं, जिनमें पांच बेटियां और 1 सबसे छोटा बेटा है. दो बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी है. वहीं बाबूराव, उसकी पत्नी लक्ष्मी और तीन बेटियां मिलाकर अब खेती का काम करते हैं. बाबूराव के पास अपने बैल नहीं हैं. माली हालत इतनी खराब है, कि वह पैसे देकर किसी से किराए पर भी बैल नहीं ला सकते. ऐसे में उन्होने अपनी तीनों बेटियों के साथ खेती में हल चलाना शुरू किया.

2/7

बाबूराव की बेटियां अपने पिता के साथ खेतों में हल चलाती हैं

Baburao's daughters solve the fields with their father

देवस्थान से ठेके पर ली जमीन पर अब पूरा राठोड परिवार खेती का काम करता है. अगर वह किराए पर बैल लें तो उन्हें प्रति एकड़ एक हजार रुपये देना होगा, लेकिन बाबूराव के पास रुपयों की कमी को देखते हुए उनकी बेटियों ने बैलों की जगह काम करने का फैसला लिया और अब वही अपने पिता के साथ खेतों में हल चलाती हैं.

3/7

गरीबी के कारण वह उनको अच्छी शिक्षा नहीं दे पाए बाबूराव

 He was unable to teach them due to poverty

बाबूराव का कहना है की वह अपने बेटियों पर गर्व महसूस कर रहा है. गरीबी के कारण वह उनको अच्छी शिक्षा नहीं दे सका. खुद की जमीन नहीं थी तो देवस्थान समिति से ठेके पर जमीन ली. जमीन से बड़े-बड़े पत्थर निकाले गए. उसे खेती योग्य बनाया और अब दोनो बेटियों के साथ मिलकर उस पर हल चलाता है. 

4/7

अपनी बेटियों से ऐसा काम नहीं कराना चाहते हैं बाबूराव

Baburao wants to not do such things with his daughters

वह अपनी बेटियों से ऐसा काम नहीं कराना चाहता है, लेकिन रुपयों की कमी के चलते बेटियों से ऐसा काम कराने पर वह मजबूर हो गया है. इसका उन्हें दुख तो होता है, लेकिन वह और कर भी क्या सकते हैं.

5/7

पूरा परिवार दूसरे के खेत में जाकर गन्ना कटाई करता है

The whole family reaches sugarcane by going to the farm of another

चार साल पहले उन्होंने ठेके पर जमीन ली. जिसके लिए कर्ज निकाला. कर्ज के हफ्ते चुकाने के लिए पैसे नहीं थे तो बच्चियों का स्कूल छुट गया. गन्ना कटाई के मौसम में यह पूरा परिवार दूसरे के खेत में जाकर गन्ना कटाई करता है. जब थोड़ी बहुत बारिश होती है तो अपने ठेकेपर ली हुई जमीन पर आकर खेती का काम करता है.

6/7

पिता का कर्ज उतारना चाहती हैं बेटियां

Daughters want to take off debt

बाबूराव की बेटी धनश्री ने बताया कि अपने परिवार के लिए उसने कंधे पर हल लिया है. वह किसी भी तरह से मेहनत कर अपने पिता का कर्ज उतारना चाहती है. वह अपने परिवार को खुश देखना चाहती है.

7/7

सुखाग्रस्त इलाके में आता है परभणी

 Parbhani comes in a dry area

दो सालों से महाराष्ट्र सृूखे की मार झेल रहा है. परभणी वैसे भी सुखाग्रस्त इलाके में आता है. पिछले दो सालों में परिवार पर दो लाख से भी जादा का कर्ज हो चुका है. इसलिए इस पूरे परिवार ने अब यह कर्ज चुकाने के लिए हल कंधे पर ले लिया है.