भारत रत्न बाबा साहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन के दिलचस्प किस्से

1/10

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था और मृत्यु आज ही के दिन यानी 6 दिसंबर 1956 को हुई. अंबेडकर का जन्म महाराष्ट्र के महू गांव में हुआ. 

2/10

अंबेडकर उस महार जाति से आते थे, जिनकी प्रदेश में शौर्य गाथा सुनाई जाती है. कहा तो यह भी जाता है कि महारों के नाम पर ही प्रदेश का नाम महाराष्ट्र पड़ा. इनके नाम पर आजादी के समय में एक रेजीमेंट भी हुआ करता था.

3/10

अंबेडकर संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष थे, जिन्हें संविधान निर्माण का जिम्मा दिया गया था. संविधान को बनाने में कुल 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे थे. 

4/10

अंबेडकर के साथ ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सभी 6 लोगों ने संविधान बनाने का मसौदा तय किया था.

5/10

बाबासाहेब को अंबेडकर टाइटल उनके ब्राह्माण गुरू महादेव अंबेडकर ने दिया था. वे उनसे काफी प्रभावित थे. वे अंबावाडी गांव से थे जिसके नाम पर उन्होंने अपना नाम अंबेडकर रखा था. इससे पहले अंबेडकर खुद को भीमराव सकपाल के नाम से परिचित कराते थे.

6/10

अंबेडकर महिलाओं के सम्मान और उत्थान की बातें किया करते थे. उन्होंने महिलाओं के समाजिक अधिकारों की पैरोकारी की और अनुसूचित जाति और जनजाति को शिक्षित करने की वकालत भी की.  जिनके अधिकारों के लिए जीवनपर्यंत लड़ते रहे. आर्थिक समानता की बात करने वाले अंबेडकर ने विधि और कानूनी पढ़ाई के जरिए सबको शिक्षा और बराबरी के अधिकारों की बात को सबके सामने रखा.

7/10

भीमराव अंबेडकर भारत के विभाजन पर नाखुश थे. उनका मानना था कि विभाजन वह भी धर्म के हिसाब से किसी भी देश के लिए सही नहीं. उन्होंने उसका पुरजोर विरोध किया. विभाजन की त्रासदी को गलत ठहराते हुए अंबेडकर ने एक किताब भी लिखी, जिसका शीर्षक था , पाकिस्तान- भारत विभाजन के बाद. इसमें उन्होंने धर्म के प्रति अपने विचारों का बखूबी बखान किया था. उनकी नजर में धर्म का मतलब सबको समान अधिकार देना था.

8/10

अंबेडकर बौद्ध धर्म के अनुयायी थे. भीमराव अंबेडकर ने काफी लंबे समय तक बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की. अंत में उनके पार्थिव अवशेष का अंतिम संस्कार बौद्ध धर्म के नियमों के अनुसार ही किया गया. मुबंई के दादरी में उनका अंतिम संस्कार हुआ. जो अब चैत्य भूमि के नाम से जाना जाता है. अंबेडकर की पुण्य तिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है. महापरिनिर्वाण का मतलब है 'मौत के बाद निर्वाण' जो बौद्ध धर्म में काफी अहम माना जाता है.

9/10

अंबेडकर ने जीवन भर छूआछूत का विरोध किया था. उन्होंने जाति प्रथा को समाज का सबसे बड़ा दुश्मन मान लिया था और उसी के खिलाफ लड़ते आए थे. संविधान में भी अंबेडकर ने सबको बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए मौलिक अधिकारों में अनुच्छेद 14 और 15 की पैरोकारी की.

10/10

आजादी की लड़ाई के दौरान गांधीजी के साथ अंबेडकर का पूना समझौता काफी चर्चित रहा. यह पहला मौका था जब शोषित वर्गों को अधिकार से वंचित न कराने के लिए उन्होंने राजनीतिक मसौदे के तहत गोलमेज समझौता किया. इसमें उन्होंने शोषित वर्गों की राजनीतिक भूमिका और उनके अधिकारों की वकालत की.