4 टन हल्दी से सजा कोलकाता का ये दुर्गा पूजा पंडाल, इस मायने में है खास

सारे देश में 10 अक्टूबर से मां दुर्गा की अराधना के दिन यानि की नवरात्र शुरू हो चुके हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Oct 14, 2018, 13:52 PM IST

नवरात्र के दिनों में गुजरात में डांडिया खेला जाता है वहीं, कोलकाता में दुर्गोत्सव की तैयारियां भी चरम पर हैं. जैसे-जैसे अष्टमी के दिन नजदीक आ रहे हैं पंडाल और माता की मूर्ति को सजाने का काम तेजी से हो रहा है. 

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बनावट और सजावट के लिए नए-नए प्रयोग

Innovations for texture and decoration

हर साल की तरह कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के तमाम शहरों में दुर्गा पूजा पंडालों की सजावटों के लिए कई खास प्रयोग किए जा रहे हैं. कहीं पर माता की प्रतिमा को सजाने के लिए फूलों का इस्तेमाल किया गया है. 

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हल्दी से सजा संतोषपुर लेक पल्ली

Haldi Sentence Santoshpur Lake Palli

वहीं, कोलकाता के संतोषपुर लेक पल्ली क्षेत्र में पंडाल को सजाने के लिए फूल और पत्ती के अलावा ढेर सारी हल्दी का इस्तेमाल किया गया है. पंडाल की ज्यादातर चीजों का निर्माण हल्दी से ही किया गया है. इस पंडाल में आने वाले लोगों को न सिर्फ हल्दी की कलाकारी दिखेगी, बल्कि उसकी खुशबू को भी श्रद्धालु महसूस कर सकेंगे. 

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शुभ मानी जाती है हल्दी

Turmeric is considered auspicious

पंडाल के संयोजकों का कहना है कि हिंदू धर्म में हल्दी का काफी महत्व माना जाता है और वह काफी शुभ होता है. हल्दी का इस्तेमाल न सिर्फ पूजा में होता है बल्कि इसके बिना कोई भी शुभ कार्य अधूरा माना जाता है. उन्होंने कहा कि हल्दी एक विष रोधक भी है, जो मन से नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने का काम करता है.

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तमिलनाडु से मंगवाई गई हल्दी

Turmeric is procured from Tamil Nadu

इस पूजा पंडाल को तैयार करने में चार टन (4,000 किलोग्राम) शुद्ध हल्दी का इस्तेमाल किया गया है. खास बात ये है कि पंडाल को हल्दी से सजाने के लिए एक मसाला कंपनी से करार किया गया है.

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सूखी और साबुत हल्दी का इस्तेमाल

Use of dry and whole turmeric

पंडाल बनाने के लिए 80 फीसद सूखी-साबुत हल्दी और 20 फीसद पिसी हल्दी का प्रयोग किया गया है. यह खासतौर पर तमिलनाडु से मंगवाई गई है. पंडाल के अंदर-बाहर, सब जगह हल्दी ही हल्दी नजर आएगी. पूरा पंडाल इसकी खुशबू से महक उठेगा.

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हल्दी का दोबारा हो सकेगा इस्तेमाल

Turmeric can be used again

पूजा कमेटी का कहना है कि दुर्गा पूजा पंडाल में इस्तेमाल हुई लगभग 30 फीसदी हल्दी को दोबारा प्रयोग में लाया जा सकेगा. पंडाल की समिति ने इसके लिए पहले से ही मसाला कंपनी से करार कर लिया है. पूजा खत्म होने के बाद कंपनी इसको जरूरतमंद लोगों को बांट दी जाएगी.