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पिछले तीन सालों में कम हुआ कॉलेजों में प्लेसमेंट, बढ़ गया एजुकेशन लोन का एनपीए

यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Sep 02, 2018, 10:03 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. रविवार के अखबारों की बात करें तो सभी अखबारों ने एशियाड में भारत के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है.

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कॉलेजों में प्लेसमेंट घटा तो एजुकेशन एनपीए भी बढ़ा

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दैनिक भास्कर: दैनिक भास्कर के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि पिछले तीन सालों में कॉलेजों में प्लेसमेंट के घटने की वजह से छात्र काफी परेशान हैं. खबर के मुताबिक यही कारण है कि पिछले तीन साल में एजुकेशन लोन का एनपीए (बैड लोन) बढ़कर करीब नौ प्रतिशत हो गया है. यह 6 हजार 434 करोड़ रु. हो गया है. खबर में तीन हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग और एमबीए कॉलेजों को एफिलिएशन देने वाली संस्था ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के हवाले से जानकारी दी गई है कि पिछले तीन साल में औसतन करीब 55 से 60 प्रतिशत (लगभग 6 लाख) इंजीनियरिंग और एमबीए के छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया है. हालांकि इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि जितने छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हुआ, उनमें से कितने ऐसे छात्र हैं जिन्होंने एजुकेशन लोन लिया है.

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खुद की गलती से हुआ एक्सीडेंट तो बीमा नहीं: SC

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हिन्दुस्तान: हिन्दुस्तान अखबार के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि यदि कोई व्यक्ति वाहन चलाते समय स्वयं कोई दुर्घटना करता है और उसमें कोई दूसरा वाहन शामिल न हो तो परिजन मुआवजे का दावा नहीं कर सकते. खबर में जानकारी दी गई है कि जस्टिस आरवी रमण और एसए नजीर की पीठ अगरतला में हुए हादसे में मृतक के परिजनों को मुआवजे के मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट के फैसले पर बीमा कंपनी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान पीठ ने कहा, उक्त मामले में यह सत्य है कि मृतक चालक वाहन का मालिक था और दुर्घटना लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने से हुई है. कानून की नजर में वह थर्ड पार्टी नहीं है. खबर में बताया गया है कि कोर्ट ने कहा, दावेदार अपनी गलती के कारण दुर्घटनाग्रस्त होने पर बीमा का दावा नहीं कर सकते. पीठ ने त्रिपुरा हाईकोर्ट द्वारा दिए फैसले को निरस्त करते हुए बीमा कंपनी की अपील स्वीकार कर ली.

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फर्जी कागजात से एचडीएफसी बैंक को लगाई 120 करोड़ की चपत

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अमर उजाला: अमर उजाला अखबार के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि महंगी लग्जरी कारों का कारोबार करने वाली गुरुग्राम की दो नामी कंपनियों ने एचडीएफसी बैंक से फर्जी दस्तावेज के आधार पर 120 करोड़ का लोन हासिल कर लिया था. खबर के मुताबिक बैंक को जब कंपनी की हेराफेरी का पता चला तो मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से की गई. छानबीन के बाद पुलिस ने कंपनी के दो अधिकारियों ऋषपाल सिंह टोड और मनधीर सिंह टोड व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. आर्थिक अपराध शाखा मामले की छानबीन कर रही है. खबर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से जानकारी दी गई है कि एचडीएफसी के वाइस प्रेसिडेंट संजय शर्मा ने बताया कि महंगी कारों का कारोबार करने वाली दोनों कंपनी का ऑफिस गुरुग्राम सेक्टर-53 में है.

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दिल्ली में एटीएम से उड़ाए 1.17 करोड़ रुपये

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नवभारत टाइम्स: नवभारत टाइम्स के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है राजधानी दिल्ली में इलाहाबाद बैंक के विभिन्न जगहों पर लगे एटीएम से 1 करोड़ रुपये 17 लाख रुपये उड़ा लिए गए. खबर के मुताबिक यह हरकत किसी और ने नहीं, बल्कि एटीएम में कैश भरने वाली कंपनी के कर्मियों ने ही की है. खबर में नोएडा पुलिस के हवाले से बताया गया है कि इस काम को 7 जुलाई से लेकर 29 अगस्त के बीच 17 बार में अंजाम दिया गया. सूत्रों के हवाले से खबर में जानकारी दी गई है कि दो कर्मचारियों को पुलिस ने पकड़ लिया है जबकि एक फरार है. पुलिस के मुताबिक खबर में बताया गया है कि साउथ दिल्ली के 24 एटीएम में कैश भरने का कॉन्ट्रैक्ट लॉजिकैश कंपनी के पास है. 15 एटीएम रोजाना भरे जाते हैं. कैश गाड़ी में दो गार्ड और 2 कस्टोडियन होते हैं. मेन कस्टोडियन के पास स्पेशल कार्ड रहता है. इसी के जरिए इस वारदात को अंजाम दिया गया.

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सुप्रीम कोर्ट की जज ने कहा, मुझे प्रभावित करने की हुई कोशिश

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने खुली अदालत में बताया है कि होटल रॉयल प्लाजा से संबंधित एक मामले में उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की गई थी. खबर के मुताबिक किसी ने उन्हें फोन किया था, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि फोन किसने और कब किया था. खबर में जानकारी दी गई है कि जस्टिस अरुण मिश्र और बनर्जी की पीठ 30 अगस्त को अदालत संख्या आठ में सुनवाई कर रही थी. उसी समय जस्टिस बनर्जी ने इस बात का रहस्योद्घाटन किया. इस पर जस्टिस मिश्र ने कहा, न्यायाधीश को प्रभावित करने का प्रयास अदालत की अवमानना है. खबर में बताया गया है कि इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने जस्टिस बनर्जी से अनुरोध किया कि वे खुद को सुनवाई से अलग नहीं करें, क्योंकि इसका दूसरे लोग इस्तेमाल कर सकते हैं.