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दो दोस्तों ने शुरू की थी भारत की ये बड़ी कंपनी, एक हिन्दुस्तानी तो दूसरा पाकिस्तानी

भारत-पाकिस्‍तान की सरहद पर गोलियों-बमों की आवाज से सरहदी बाशिंदों की रातें आंखों में गुजर रही हैं. लेकिन, यह जानकर आपको आश्‍चर्य होगा कि देश की एक सबसे बड़ी कंपनी की नींव ऐसे दो अजीज दोस्‍तों ने मिलकर रखी थी, जिनमें से एक पाकिस्‍तानी और एक हिंदुस्‍तानी था.

Aug 05, 2018, 11:25 AM IST

भारत-पाकिस्‍तान की सरहद पर गोलियों-बमों की आवाज से सरहदी बाशिंदों की रातें आंखों में गुजर रही हैं. लेकिन, यह जानकर आपको आश्‍चर्य होगा कि देश की एक सबसे बड़ी कंपनी की नींव ऐसे दो अजीज दोस्‍तों ने मिलकर रखी थी, जिनमें से एक पाकिस्‍तानी और एक हिंदुस्‍तानी था.

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Friendship Day 2018: Success story of Mahindra and Mahindra

Friendship Day 2018: Success story of Mahindra and Mahindra

भारत-पाकिस्‍तान की सरहद पर गोलियों-बमों की आवाज से सरहदी बाशिंदों की रातें आंखों में गुजर रही हैं. लेकिन, यह जानकर आपको आश्‍चर्य होगा कि देश की एक सबसे बड़ी कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) की नींव ऐसे दो अजीज दोस्‍तों ने मिलकर रखी थी, जिनमें से एक पाकिस्‍तानी और एक हिंदुस्‍तानी था. आज फ्रेंडशिप-डे के मौके पर इन्हीं दोस्तों द्वारा शुरू की गई कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के सफर की दिलचस्प कहानी बता रहा है. (फोटोः चेन्नई स्थित महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑफिस पर लगा रूफटॉप सोलर प्लांट)

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Pakistani Malik Ghulam Muhammad and KC Mahindra Started M&M in 1945

Pakistani Malik Ghulam Muhammad and KC Mahindra Started M&M in 1945

पाकिस्तानी गुलाम मोहम्मद ने रखी थी नीव : अविभाजित भारत के लुधियाना में 1945 में दो भाइयों केसी महिंद्रा, जेसी महिंद्रा और मलिक गुलाम मोहम्‍मद ने महिंद्रा एंड मोहम्‍मद के रूप में कंपनी की नीव रखी थी. भारत की आजादी और पाकिस्‍तान बनने के बाद गुलाम मोहम्‍मद पाकिस्‍तान चले गए और वहां के पहले वित्त मंत्री बन गए. 1948 में कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया गया. मोहम्मद के पाकिस्तान में बसने के बाद कंपनी की तरक्की की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ रही थी. 1991 में आनंद महिंद्रा इस ग्रुप के डिप्टी डायरेक्टर बने. तब से लेकर आज तक महिंद्रा ग्रुप नई ऊंचाईयों को छूने में लगा हुआ है.

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Mahindra & Mahindra Market Cap

Mahindra & Mahindra Market Cap

2 लाख से ज्यादा लोग करते हैं काम : दिलचस्प है कि महिंद्रा ग्रुप में इस समय 2 लाख से भी ज्यादा लोग काम कर रहे हैं. कंपनी की मार्केट कैप करीब 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए है. 1991 में आनंद महिंद्रा द्वारा इस ग्रुप की कमान संभालने से लेकर अब तक कंपनी ने दुनिया भर में अपना कारोबार फैला लिया है. कंपनी की सफलताओं के इस 24 साल के सफर में महिंद्रा ने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं.

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1991 was the crucial year for Mahindra & Mahindra

1991 was the crucial year for Mahindra & Mahindra

महिंद्रा के लिए काफी अहम था साल 1991 : दिलचस्प है भारतीय अर्थव्यवस्था और महिंद्रा ग्रुप दोनों के लिए 1991 काफी अहम साल है. इस साल भारत ने अर्थव्यवस्था को उदार बनाना शुरू किया था, जिसके बाद तेज ग्रोथ का दौर शुरू हुआ. 1991 में आनंद महिंद्रा महिंद्रा ग्रुप के डिप्टी डायरेक्टर बने थे. पिछले 24 साल में इंडियन इकोनॉमी की तरह महिंद्रा ग्रुप भी बुलंदी पर पहुंच गया है.

 

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Mahindra & Mahindra business in Tractors to IT sector

Mahindra & Mahindra business in Tractors to IT sector

ट्रैक्टर से लेकर सॉफ्टवेयर में फैला कारोबार : आज ट्रैक्टर से लेकर सॉफ्टवेयर तक इसका कारोबार फैला हुआ है. ग्रुप की इस कामयाबी के पीछे आनंद महिंद्रा का बड़ा हाथ है. आज वह महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन एंव मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. 60 वर्षीय आनंद महिंद्रा 1997 में ग्रुप के एमडी बने थे.

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Anand Mahindra done his graduation from Harvard business school

Anand Mahindra is Howard graduate

हार्वर्ड से की ग्रैजुएशन : हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से ग्रैजुएशन की पढ़ाई करने वाले आनंद ने शायद तभी जान लिया था कि नए बिजनेस में उतरे बगैर ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर ले जाना मुमकिन नहीं है. निजी क्षेत्र के लिए अर्थव्यवस्था के दरवाजे खुल जाने के बाद देश में बिजनेस का माहौल बदल रहा था. देशी और विदेशी कंपनियां इस मौके को भुनाने की कोशिश कर रही थीं. ऑटो, आईटी, बैंकिंग, रिटेल जैसी क्षेत्रों में देशी और विदेशी कंपनियां उतर रही थीं. आनंद ने सबसे पहले उन बिजनेस की पहचान की, जिनमें ग्रोथ की संभावना सबसे ज्यादा थी.

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Mahindra & Mahindra first focus on Auto Industry

Mahindra & Mahindra first focus on Auto Industry

ऑटो इंडस्ट्री पर पहला फोकस : उनका पहला फोकस ऑटो इंडस्ट्री पर था. इससे पहले भी महिंद्रा ग्रुप ने पैसेंजर कार मार्केट में उतरने की कोशिश की थी. उसने 1995 में अमेरिकी कंपनी फोर्ड मोटर के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाया था. इसमें दोनों की बराबर हिस्सेदारी थी. इस जेवी ने भारत में एस्कॉर्ट नाम से कार पेश करने की योजना बनाई थी. लेकिन, यह ज्वाइंट वेंचर कामयाब नहीं रहा. इससे नाकामी का आनंद के हौसले पर कोई असर नहीं पड़ा.

 

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Mahindra & Mahindra Started operations in MUV segment

Mahindra & Mahindra Started operations in MUV segment

एमयूवी सेगमेंट में उतरे : उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर काम कर चुके अपने इंजीनियर्स को भारतीय बाजार के लिए मल्टी यूटिलिटी व्हीकल (एमयूवी) का कॉन्सेप्ट तैयार करने का काम सौंपा. उनकी यह कोशिश कामयाब रही. महिंद्रा ने 2002 में भारतीय बाजार में स्कॉर्पियो नाम से अपनी पहली एमयूवी पेश की. यह पूरी तरह से भारत में विकसित गाड़ी थी.

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Mahindra & Mahindra Scorpio is most favorite SUV in India

Mahindra & Mahindra Scorpio is most favorite SUV in India

स्कॉर्पियो की बादशाहत : स्कॉर्पियो की कामयाबी के बाद आनंद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. मल्टी नेशनल ऑटो कंपनियों के भारतीय बाजार में आने के बावजूद स्कॉर्पियो सबसे ज्यादा बिकने वाली एमयूवी बन गई. भारतीय बाजार में आज भी इसकी बादशाहत कायम है.

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Mahindra & Mahindra becomes case study in Harvard university

Mahindra & Mahindra becomes case study in Harvard university

हार्वर्ड में केस स्टडी बनी महिंद्रा : हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने इसकी कामयाबी को अपनी केस स्टडी का हिस्सा बनाया है. आज महिंद्रा कई देशों में इसका एक्सपोर्ट कर रही है. इसी प्लेटफॉर्म पर उसने एक्सयूवी 500 पेश किया है, जिसे काफी सराहा गया है. स्कॉर्पियो की कामयबी से आनंद के हौंसले को पंख लग गए.

 

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Mahindra & Mahindra acquires Punjab Tractors in 2007

Mahindra & Mahindra acquires Punjab Tractors in 2007

2007 में किया पंजाब ट्रैक्टर्स अधिग्रहण : 2007 में महिंद्रा ने पंजाब ट्रैक्टर्स का अधिग्रहण किया. इस अधिग्रहण से उन्हें घरेलू ट्रैक्टर बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिली. आज महिंद्रा न सिर्फ भारत की बल्कि दुनिया की ट्रैक्टर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. हालांकि, फ्रांस की ऑटो कंपनी रेनॉ के साथ महिंद्रा का ज्वाइंट वेंचर कामयाब नहीं रहा. इस जेवी ने लोगन नाम से भारतीय बाजार में कार पेश की थी. बाद में यह वेंचर खत्म हो गया.

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Mahindra & Mahindra had a bid for Satyam computers

Mahindra & Mahindra had a bid for Satyam computers

सत्यम के लिए लगाई बोली : उधर, ट्रक बाजार में उतरने के लिए महिंद्रा ने अमेरिकी कंपनी नविस्टार के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाया है. 2008 में महिंद्रा ने दो पहिया बनाने वाली कंपनी काइनेटिक मोटर्स का अधिग्रहण किया. उसने इसका नाम बदलकर महिंद्रा 2 व्हीलर्स कर दिया है. 2009 में सत्यम कम्प्यूटर में घोटाले के बाद सरकार ने इसे बेचने के लिए कंपनियों से बोलियां मंगाई थी. आनंद महिंद्रा ने सत्यम के लिए बोली लगाने का फैसला किया.

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Tech Mahindra buys Satyam Computers in 2009

Tech Mahindra buys Satyam Computers in 2009

टेक महिंद्रा ने खरीदी सत्यम : महिंद्रा ग्रुप की सॉफ्टवेयर कंपनी टेक महिंद्रा ने सबसे ज्यादा बोली लगाकर इसे खरीदने में कामयाब हुई. अब टेक महिंद्रा और सत्यम कम्प्यूटर का विलय हो गया है और महिंद्रा सत्यम नाम से नई कंपनी वजूद में आई है. यह देश की बड़ी आईटी कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गई है. 2010 में महिंद्रा ग्रुप ने दो बड़े अधिग्रहण किए. पहले उसने रेवा इलेक्ट्रिक कार का अधिग्रहण किया. बाद में उसने कोरिया की ऑटो कंपनी सैंगयोंग को खरीदा.

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Mahindra & Mahindra Group revenue rise to 93,896 crores

Mahindra & Mahindra Group revenue rise to 93,896 crores

इन कारोबार में उतर चुका है महिंद्रा ग्रुप : आज महिंद्रा ग्रुप रियल एस्टेट, हॉलीडे रिसॉर्ट, रिटेल, डिफेंस, एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, एविएशन सहित कई दूसरे बिजनेस में मौजूद है. ग्रुप का सालाना रेवेन्यू 93,896 करोड़ रुपए यानी 14 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. एक दशक पहले यह महज 1.35 अरब डॉलर था. ग्रुप की कंपनियों की संख्या एक दर्जन से ज्यादा है.

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Mahindra & Mahindra has its operations in more than 80 Countries

Mahindra & Mahindra has its operations in more than 80 Countries

80 से ज्यादा देशों में कारोबार : महिंद्रा ग्रुप देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले ग्रुपों में एक है. दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में इसका कारोबार फैला हुआ है. इस समय महिंद्रा ग्रुप का फोकस अपने आईटी और एविएशन बिजनेस पर है.

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Know who is Anand Mahindra, the chairman of Mahindra & Mahindra Group

Know who is Anand Mahindra, the chairman of Mahindra & Mahindra Group

एक नजर में आनंद महिंद्रा : 1 मई को जन्में आनंद महिंद्रा, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से ग्रेजुएट हैं. उनके परिवार में पत्नी अनुराधा महिंद्रा और दो बेटियां हैं. आनंद महिंद्रा को फोटोग्राफी, फिल्में देखना बहुत पसंद है. 1997 में वह महिंद्रा ग्रुप के एमडी नियुक्त किए गए. 2003 में ग्रुप के वाइस-चेयरमैन बने और 2012 में महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन बने. आनंद महिंद्रा के ट्विटर पर 67 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.