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PHOTOS: बच्चों के भविष्य के लिए खराब सड़क से जान जोखिम में डाल स्कूल पहुंचता है यह दिव्यांग शिक्षक

ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर शिक्षक बबलू खपेड़ गुजरते हैं. बबलू दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन हालात कैसे भी हो वे रोज करीब 7 किलोमीटर का सफर तय कर अपने स्कूल पहुंचते हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Aug 24, 2019, 11:53 AM IST

सचिन जोशी/झाबुआः शारीरिक अक्षमता मजबूत हौसलों को उड़ान भरने से नही रोक सकती. आज हम आपको ऐसे ही मजबूत इरादों वाले शिक्षक से मिलवाने जा रहे हैं. जो दोनों पैरों से दिव्यांग है, लेकिन इस दिव्यांग शिक्षक की ईमानदार कोशिश मध्यप्रदेश को गौरवशाली बना रही है. खस्ताहाल सड़क से गुजरने को मजबूर किचड़ से सने कच्चे, ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर शिक्षक बबलू खपेड़ गुजरते हैं. बबलू दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन हालात कैसे भी हो वे रोज करीब 7 किलोमीटर का सफर तय कर अपने स्कूल पहुंचते हैं.

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52 बच्चों के इकलौते शिक्षक हैं बबलू

 Bablu is the only teacher of 52 children

परेशानियां तो कई है, लेकिन उनके हौंसले और अपना कर्तव्य निभाने की जिद के आगे परेशानियों ने भी घुटने टेक दिए हैं. 52 बच्चों के इकलौते शिक्षक ग्राम पिपलदेहला की जिस प्राथमिक शाला में बबलू पढ़ाते है. वहां कक्षा पहली से पांचवी तक में 52 बच्चें हैं. 

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बबलू अकेले ही इन बच्चों को एक कमरे में बैठाकर पढ़ाते हैं

 Bablu single-handedly teaches these children in a room

दिव्यांग तो बबलू हैं, लेकिन लाचार जिले का सिस्टम है. इस संस्था के वह इकलौते शिक्षक हैं और वह अकेले ही इन बच्चों को एक कमरे में बैठाकर पढ़ाने को मजबूर हैं.   

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एक और शिक्षक की मांग कर रहे छात्र

 Students seeking another teacher

एक ही शिक्षक होने के बावजुद पिपलदेहला गांव के बच्चे अपने शिक्षक से खासे खुश हैं. स्कूल की घंटी बजते ही गांव के बच्चें नंगे पैर दौड़कर अपनी स्कूल पहुंच जाते हैं. बच्चे अपने शिक्षक का पढ़ाया हर पाठ ध्यान से पढ़ते हैं, लेकिन वे एक और शिक्षक की मांग कर रहे हैं. ताकि पढ़ाई और अच्छे से हो सके.

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मांग के बाद भी नही हुई सुनवाई

Hearing did not take place even after demand

आदिवासी झाबुआ जिले की कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है. पिपलदेहला में शिक्षक की कमी को लेकर भी शिक्षक बबलु की ओर से मांग की जा चुकी है. बबलू ने कई बार अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त शिक्षक की पदस्थापना के लिए पत्राचार किया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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व्यवस्था दुरूस्त करने का दावा

System maintenance claim

पश्चिमी मध्प्रदेश के आदिवासी झाबुआ जिले की 108 प्राथमिक और 42 माध्यमिक शालाएं शिक्षक विहीन हैं. शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता को लेकर प्रशासन के सामने चुनौतियां कई हैं. कलेक्टर प्रबल सिपाहा कमी को स्वीकार रहे हैं और जल्द ही व्यवस्थाएं दुरूस्त करने का दावा कर रहे हैं. 

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ग्राम पिपलदेहला के बच्चों को अपने शिक्षक पर गर्व है

The children of village Pipaldehla are proud of their teacher

वहीं गिरती शिक्षा व्यवस्था की बीच बबलू के प्रयास मिसाल दे रहे हैं, कि जुबान की जगह शिक्षा आचरण से दी जाए तो निश्चित ही विद्यार्थी परिणाम से ऊपर उठकर संस्कार आधारित होगें. ग्राम पिपलदेहला के बच्चों को अपने शिक्षक पर गर्व है.