जानिए भारतीय नौसेना से जुड़ी सारी बातें, कब और कैसे किया गया विस्तार

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4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है. 

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भारतीया नौसेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी सेना है. 

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जून 2019 में जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक भारतीय नौसेना में तकरीबन 67,250 लोग बहाल हैं. 

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इसके अलावा नौसेना के जंगी बेड़े में 137 वॉरशीप और 235 एयरक्रॉफ्ट शामिल है.

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मार्च 2018 तक एक एयरक्रॉफ्ट करियर, एक ट्रांसपोर्ट डॉक, आठ लैंडिंग शिप टैंक, 11 डिस्ट्रॉयर, 14 फ्राइट्स, 1 न्यूकिलियर पॉवर्ड अटैक पंडुब्बी, एक बैलिस्टिक मिसाइल पंडुब्बी, और 15 कंवेशनली-पॉवर्ड अटैक पंडुब्बी इस भारतीय नौसेना के जखीरे में तैनात हैं.

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INS Vikramaditya भारतीय नेवी में हाल ही में शामिल किया गया एक विमानवाहक युद्धपोत है. आईएनएस विक्रमादित्य का अर्थ होता है सूर्य की तरह प्रतापी. भारतीय नेवी को यह विमानवाहक पोत 2013 में यूक्रेन से मिला. कीव श्रेणी का यह पोत जंगी बेड़े में शामिल कर लिया गया है. यह एक 22 मंजिली इमारत के बराबर है. इस पर मिग-29-के (K) लड़ाकू विमान, कामोव-31, कामोव-28, सीकिंग, एएलएच ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टर सहित तीस विमान तैनात किए जा सकते हैं और एंटी मिसाइल प्रणालियां भी तैनात हैं. जिसका मतलब है कि एक हजार किलोमीटर के दायरे में कोई  भी दुश्मन के लड़ाकू विमान और युद्धपोत भटक भी नहीं सकेंगे.

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अरिहंत क्लास पंडुब्बी एक न्यूकिलियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल है जो एडवांसड तकनीकी वेजल प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है. इसका मतलब है दुश्मनों का घातक हथियार. अरिहंत एक स्ट्रैटजिक स्ट्राइक न्यूकिलियर पंडुब्बी है जिसे 2009 में कमिशन किया गया. इस जहाज में सिंगल 7 ब्लेडों वाला प्रोपेलर भी लगा है. यह तकरीबन 12-15 नॉट की गति पा सकता है जो बढ़कर 24 नॉट तक पहुंच सकती है. पनडुब्बी के पास 4 लॉन्च ट्यूब है और 12 के-15 सागरिका मिसाइल भी हैं जिन्हें जहाज के गर्भ में रखा जाता है

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आईएनएस कलवरी एक डिजल-बिजली जनित हमलावर पनडुब्बी है. यह स्कॉर्पिन क्लास का एक अत्याधुनिक पनडुब्बी है जो भारतीय नेवी ने तैयार किया है. पनडूब्बी को फ्रांस के नेवल डिफेंस और ऊर्जा कंपनी ने तैयार किया है. आईएनएस कलवरी आईएनएस करंज और आईएनएस खंडेरी क्लास की पनडुब्बी है. बाकी दोनों को डिकमीशन्ड कर दिया गया है लेकिन आईएनएस कलवरी अब तक सक्रिय रूप से कमिशन्ड है. 

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भारतीय नौसेना का पहले 1613 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी की युद्धकारिणी सेना के रूप में इंडियन मेरीन के नाम से संगठित की गई थी.

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1685 ई. में इंडियन मरीन से बदलकर 'बंबई मेरीन' हुआ जो 1830 ई. तक चला.

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8 सितंबर 1934 ई. को भारतीय विधानपरिषद् ने भारतीय नौसेना अनुशासन अधिनियम पारित किया और रॉयल इंडियन नेवी की संस्थापना हुई. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय नौसेना का विस्तार हुआ.