महामना से लेकर T-18 तक इन ट्रेनों को हमने बना दिया बदसूरत

भारत सरकार रेलवे में यात्रा करने वाले लोगों के लिए कई प्रकार की सुविधा मुहैया कराता है. हालांकि रेलवे के मुताबिक वह वस्तु इस्तेमाल के बाद छोड़कर जानी होती है. लेकिन यात्रियों की मंशा तो कुछ अलग ही रहती है. वह इसे इस्तेमाल करने के साथ अपने घर भी लेकर चल देते हैं या उसे खराब कर देते हैं.

आशु दास | Dec 22, 2018, 09:45 AM IST

भारतीय रेल की सबसे तेज रफ्तार ‘ट्रेन 18’ पर गुरुवार को परीक्षण के दौरान पत्थर फेंके गए. गुरुवार को ट्रेन का दिल्ली से आगरा के बीच परीक्षण किया जा रहा था, इसी दौरान कुछ लोगों ने ट्रेन के एक डिब्बे पर पत्थर फेंके. इस दौरान सौ करोड़ की लागत वाली इस ट्रेन के एक डिब्बे का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया.

 

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तेजस में चोरी

देश की सबसे आधुनिक ट्रेन तेजस की मुंबई से गोवा के बीच पहली यात्रा से पहले ही उसके कोचों की खिड़कियों के शीशे लोगों ने तोड़ दिए थे. मई 2017 में शुरू हुई तेजस एक्सप्रेस ट्रेन के कोचों के शीशे लोगों ने क्षतिग्रस्त कर दिए थे. पहली यात्रा से पहले ट्रेन में हुए पत्थराव को अधिकारियों ने गंभीर तौर पर नहीं लिया, लेकिन जब तेजस का पहला सफर खत्म हुआ तो सब आश्चर्यचकित रह गए. पहले सफर में यात्रा करने वाले लोगों ने तेजस में लगी हाई क्वालिटी स्किन के साथ छेड़छाड़ की. इतना ही नहीं कुछ यात्री अपने साथ हेडफोन्स को भी उठाकर ले गए. 

 

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नल, शावर सब कुछ चोरी

तेजस से पहले महामना एक्सप्रेस अपनी पहली ट्रिप पूरी कर वाराणसी से वडोदरा पहुंची तो यात्रियों के चेहरे पर खुशी थी, लेकिन अधिकारियों ने जब यार्ड को देखा था तो उनके होश उड़ गए थे. ट्रेन की पहली ट्रिप के बाद ही डिब्बों से 3 नल, 4 शावर जेट और डिब्बों के बीच में लगे 2 पायदान चोरी हो चुके थे. 

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टूटने की स्थिति में शीशे

इसके अलावा सीटों और टॉयलट्स की हालत बेहद खराब थी. सीटों पर स्क्रैच और कुछ शीशे लगभग टूटने की स्थिति में थे. रेलवे अधिकारियों का कहना था कि यह सब किसने किया इस बारे में तो कोई जानकारी नहीं है. लेकिन जिन्होंने भी ऐसा किया है, निश्चित रुप से उन्हें पब्लिक प्रॉपर्टी की कोई कद्र नहीं है.

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तौलिए और चादर भी हुए चोरी

पश्चिम रेलवे से जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते वित्तीय वर्ष के दौरान ट्रेन से 1.95 लाख तौलिए चुरा लिए गए. इसके अलावा 81,736 चादरें, 5,038 तकिया, 55,573 तकिया कवर और 7,043 कंबल गायब होने का मामला सामने आया है. चोर इतने में ही संतुष्ट नहीं हुए इसके अलावा भी पूरे साल में 200 टॉयलेट मग, हजार टैप और 300 फ्लश पाइप चुराए गए. इन सभी चीजों की कीमत 62 लाख रुपये है. आंकड़े इतने ज्यादा हैं कि आप जानकर चौंक जाएंगे. भारतीय रेलवे को बीते तीन साल में 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. आपको बता दें कि ट्रेन में मिलने वाली बेडशीट की कीमत 132 रुपए होती है, वहीं तौलिए की कीमत 22 रुपए और तकिया 25 रुपए की होती है.

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आम आदमी पर निर्भर करता है सबकुछ

हाल में हुई ये दो घटनाएं साबित करती हैं कि किसी व्यवस्था के फेल होने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है. यह आम आदमी पर निर्भर करता है कि वह किसी व्यवस्था का कैसे इस्तेमाल करता है. ये घटनाएं यह भी साबित करती हैं कि एक नागरिक के रूप में हम अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते. अधिकार की लंबी-लंबी बातें करते हैं, लेकिन जब कर्तव्य निर्वहन की बात आती है तब हमें पता ही नहीं होता कि ‘कर्तव्य’ किस चिड़िया का नाम. कुल मिलाकर हम भारतीय अच्छी चीजों के लायक नहीं हैं.