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इस बगिया की तो बात ही निराली है, पेड़ों में छिपे हैं बजरंगबली और शिवलिंग!

युवा किसान ने अपने बगिया में पेड़-पौधे तैयार करने के बाद उसे अपने हाथों से काटकर बजरंगबली, शिवलिंग, त्रिशुल, गदा और शेर जैसे तमाम धार्मिक प्रतीकों का रूप दिया है.

Jan 12, 2018, 07:25 AM IST

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में एक युवा किसान ने अपनी बगिया इस कदर सजाई है कि उसे देखने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी पर्यटक आ रहे हैं. इस युवा किसान ने अपने बगिया में पेड़-पौधे तैयार करने के बाद उसे अपने हाथों से काटकर बजरंगबली, शिवलिंग, त्रिशुल, गदा और शेर जैसे तमाम धार्मिक प्रतीकों का रूप दिया है.

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Interesting pics, Shivling, Ganesh, शिवलिंग, बगीचा

इन प्राकृतिक छटाओं और उसकी सुंदरता का लुत्फ उठाने के लिए जौनपुर, वाराणसी, आजमगढ़ समेत प्रदेश के अन्य जिले से भी लोग आ रहे हैं. वहीं अमेरिका से भी एक अधिकारियों का दल यहां आकर इस खूबसूरत बगीचे का दीदार कर चुका है. युवा किसान ने बताया कि यह बगिया उसने 'स्वच्छ भारत, स्वच्छ वातावरण' की दृष्टि से बनाया है.

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जौनपुर जिले से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित इमलो गांव का यह स्थान कोई सरकारी पार्क या किसी धनाड्य व्यक्ति का फार्म हाउस नहीं है बल्कि यह एक साधारण किसान के अपने खून-पसीने से सींचा गया बगीचा है. वह किसान है रामबचन बिन्द. रामबचन ने अपने गांव में पर्यटन स्थल बनाने के साथ-साथ पर्यावरण बनाने का सपना लेकर अपनी जमीन पर पांच वर्ष पहले ही इन पेड़-पौधों को अपने खून-पसीने से सींचना शुरू कर दिया था. पेड़ जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे-वैसे रामबचन अपने हाथों से  तरासकर देवताओं और पशु-पक्षी का रूप देता गया.

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रामबचन के मेहनत का परिणाम है कि उसके बगीचे में घुसते ही जंगल का राजा शेर दहाड़ मारते दिखाई पड़ जाएगा. उसके पास ही दो मोर नाच रहे हैं. बगल में एक खूबसूरत कलश इस बगीचे की सुन्दरता को बढ़ा रहा है. उसके बाद बजरंगबली सामने खड़े दिखाई देंगे. उसी के बगल में गणेश जी विराजमान हैं.

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गणेश जी के पीछे शिवलिंग स्थापित है. जिसके बगल में विशाल त्रिशुल बनाया गया है और उसके पीछे स्वास्तिक चिन्ह. पूरे बगीचे में धार्मिक भावना फैलाती दिखाई पड़ती है. इसी के बगल में हाथी झूमता नजर आएगा. सबसे पीछे एक मंदिर बनाया जा रहा है. लेकिन उसे अभी पूरी तरह से तैयार होने में दो महीने लग सकते हैं.

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मंदिर के पास गिद्धराज जटायू भी विराजमान हैं. इस तरह प्रकृति से जुड़ी तमाम आकृति पर्यटकों को अपने तरफ आर्कषित कर रही है. रामबचन का सपना अब साकार होता दिखाई पड़ रहा है. प्रतिदिन पूर्वांचल के जनपदों से पर्यटक आने लगे हैं. अभी पिछले 15 दिसंबर को अमेरिका से चार सदस्यीय टीम आकर इस खूबसूरत बगिया का दीदार कर गयी है.