जयपुर के नौजवान का एशियन गेम्स में जलवा, देश को तीरंदाजी में दिलाया रजत पदक

रजत चौहान ने जब तीरंदाजी करियर शुरू किया था तब उन्होंने सोचा न था कि यह एक महंगा खेल है. प्रोफेशनल लेवल की आर्चरी किट की कीमत दो लाख रुपए थी. मिडल क्लास परिवार के रजत असमंजस में थे कि इतनी बड़ी कीमत वह कैसे जुटाएंगे. 

एशियन गेम्स में जयपुर के रजत ने जीता रजत

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एशियन गेम्स में जयपुर के रजत ने जीता रजत

एशियन गेम्‍स 2018 के 10वें दिन मंगलवार को भारतीय महिला और पुरुष टीम ने तीरंदाजी के कंपाउंड इवेंट में रजत पदक हासिल किए. रजत चौहान, अमन सैनी और अभिषेक वर्मा की पुरुष तीरंदाजी टीम ने कंपाउंड टीम स्पर्धा का रजत पदक जीता. फाइनल में 229-229 से बराबरी के बाद भारतीय टीम शूट-ऑफ में दक्षिण कोरिया से हार गई और उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा. 

रजत के घर में जश्न का माहौल

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रजत के घर में जश्न का माहौल

इस हार के कारण भारतीय टीम 2014 में इंचियोन में हुए एशियाई खेलों में इसी इवेंट में जीते गए अपने स्वर्ण पदक को नहीं बचा सकी लेकिन जयपुर के रजत चौहान के घर बेटे की इस उपलब्धि पर सेलीब्रेशन का माहौल है. भारतीय तीरंदाजी टीम के खिलाड़ी और जयपुर के रजत चौहान की टीम को रजत पदक दिलवाने में अहम भूमिका रही. 

मिठाइयां बांट कर खुशियां मना रहा परिवार

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मिठाइयां बांट कर खुशियां मना रहा परिवार

इस जीत पर जयपुर में रजत चौहान के घर पर मिठाइयां बांटकर परिवार ने अपनी खुशियां जाहिर करी. परिवार में उनकी मां, पिता, भाई, बहन ने बताया कि उन्हें टीम से गोल्ड की उम्मीद थी लेकिन आखिर में पासा पलट गया. संभवत: 31 अगस्त को रजत चौहान अपने घर जयपुर लौटेंगे जंहा उनका जोरदार स्वागत होगा. साल 2014 में एशियन गेम्स में रजत, देश के लिए गोल्ड लाए थे.

परिवार के सपोर्ट से इस मुकात तक पहुंचे रजत

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परिवार के सपोर्ट से इस मुकात तक पहुंचे रजत

एशियन गेम्स 2018 में साथी तीरंदाज संदीप कुमार और अभिषेक वर्मा संग सिल्वर मेडल जीतकर तिरंगा लहराने वाले रजत चौहान के परिवार ने उन्हें पहला प्रोफेशनल तीर-कमान दिलाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगाया था. मां निर्मला ने बेटे से छुपकर गहने गिरवी रखे. वहीं पिता ताराचंद ने मेहनत की कमाई से खरीदी कार को बेच दिया लेकिन आज रजत ने एशियन गेम्स में एक बार फिर मेडल जीतकर अपने माता-पिता की मेहनत को सफल बना दिया है. आपको बता दें कि एशियन गेम्स 2014 में रजत अपनी टीम के साथ तीरंदाजी में गोल्ड मैडल ला चुके हैं. 

माता पिता ने कार और गेहने बेच कर बेटे का सपना किया पूरा

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माता पिता ने कार और गेहने बेच कर बेटे का सपना किया पूरा

रजत चौहान ने जब तीरंदाजी करियर शुरू किया था तब उन्होंने सोचा न था कि यह एक महंगा खेल है. प्रोफेशनल लेवल की आर्चरी किट की कीमत दो लाख रुपए थी. मिडल क्लास परिवार के रजत असमंजस में थे कि इतनी बड़ी कीमत वह कैसे जुटाएंगे. उनके माता-पिता ने उनके तीरंदाजी के प्रति जुनून को समझा और उन्हें सपोर्ट किया. अपनी उम्रभर की जमापूंजी चौहान परिवार ने बेटे के तीरंदाज बनने के सपने को पूरा करने के लिए लगा दी. उस दो लाख रुपए के तीर-कमान से रजत ने अपना तीरंदाजी करियर शुरू किया. तब रजत महज 18 साल के थे. फरवरी 2012 में बेंकॉक में हुई एशियन ग्रांप्री आर्चरी में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था. उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एशियन गेम्स 2014 में रजत ने गोल्ड और अब एशियन गेम्स 2018 में रजत पदक हासिल किया है.

 

रिपोर्ट- आशुतोष शर्मा

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