रतलाम: भगवान द्वारकाधीश का प्राचीन मंदिर, 6 पीढ़ियों से शापित परिवार कर रहा है पूजा

परिवार को निसंतान रहने का श्राप मिला था, जिसके बाद से यह परिवार 5 पीढ़ियों से बच्चे गोद लेकर द्वारकाधीश की पूजा कर रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Aug 23, 2019, 08:42 AM IST

चंद्रशेखर सोलंकी/रतलामः वैसे तो प्राचीन मंदिरों की अलग-अलग कई कहानियां प्रचिलित होती हैं, लेकिन रतलाम के प्राचीन द्वारकाधीश मंदिर की कहानी सबसे अलग और 5 पीढ़ी तक प्रभावशील रही है. रतलाम में 300 साल पहले स्थापित द्वारकाधीश भगवान के मंदिर की पूजा एक श्रापित परिवार कर रहा है. कहते हैं, परिवार को निसंतान रहने का श्राप मिला था, जिसके बाद से यह परिवार 5 पीढ़ियों से बच्चे गोद लेकर द्वारकाधीश की पूजा कर रहे हैं.

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सराफा बाजार में भगवान द्वारकाधीश का प्राचीन मंदिर है

There is an ancient temple of Lord Dwarkadhish in Sarafa Bazar

दरअसल, रतलाम शहर के मध्य सराफा बाजार में भगवान द्वारकाधीश का प्राचीन मंदिर है, जहां 300 साल पुराने इस मंदिर की स्थापना पालीवाल समाज के एक परिवार ने की थी और यही परिवार आज तक प्राचीन भगवान द्वारकाधिश मंदिर में सेवा करता आ रहा है.

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द्वारकाधीश की प्रतिमा साधुओं से ली गई थी

 The statue of Dwarkadhish was taken from the sadhus

सेवा करने वाले पालिवाल परिवार बताता है कि इस मंदिर की स्थापना करीब 300 साल पहले उनके परिवार के काशीराम पालीवाल ने की थी और यह द्वारकाधीश की प्रतिमा साधुओं से ली गई थी, लेकिन प्रतिमा बार-बार मंदिर से गायब हो जाती और साधुओं के पाया चली जाती थी.

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काशीराम पालीवाल के बाद 5 पीढ़ियां लगातार निसंतान रहीं

 After Kashiram Paliwal, 5 generations continued to remain childless

ऐसे में भगवान द्वारकाधीश को साधु-सन्तो ने तंत्र-मंत्र से अभिमंत्रित कर इस मंदिर में स्थापित किया. जिसके बाद द्वारकाधीश की प्रतिमा मंदिर से कहीं नहीं निकल सकती थी. ऐसे में भगवान द्वारकाधीश का श्राप काशीराम पालीवाल को मिला था कि 5 पीढ़ियों तक उनका परिवार निसंतान रहेगा. काशीराम पालीवाल के बाद 5 पीढ़ियां लगातार निसंतान रही और संतान गोद लेकर वंश को आगे बढाया.

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छठी पीढ़ी में श्राप मुक्त होकर परिवार में जन्म लिया है

Now in the sixth generation child born curse free

अब छठी पीढ़ी में श्राप मुक्त होकर परिवार में जन्म लिया है, लेकिन काशीनाथ पालीवाल के बाद किसी भी पीढ़ी ने मंदिर कि सेवा करना बंद नहीं किया और आज तक पीढ़ी दर पीढ़ी यही परिवार इस प्राचीन मंदिर में सेवा करता आ रहा है. मंदिर में काशीराम पालीवाल के बाद कि सभी पीढ़ियों के परिवार के मुखिया की तस्वीरे इस मंदिर में आज भी मौजूद हैं.

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मंदिर की द्वारकाधीश भगवान की प्रतिमा भी बड़ी अलौकिक है

 The idol of Lord Dwarakadhish of the temple is also very supernatural

मंदिर की स्थापना करने वाले काशीराम पालीवाल की छठी पीढ़ी की बुजुर्ग महिला कांता पालीवाल और उनके पुत्र इस मंदिर में आज भी सेवा कर रहे हैं. मंदिर की द्वारकाधीश भगवान की प्रतिमा भी बड़ी अलौकिक और सुंदर है.

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मंदिर की बनावट भी प्राचीन कला से निर्मित है

 The temple is also built with ancient art

यह प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित, मंदिर की बनावट भी प्राचीन कला से निर्मित है. मंदिर के शिखर और उस पर बने प्राचीन कलाकृति की प्रतिमा से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मंदिर सालों पुराना है.