8 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे अटल बिहारी वाजपेयी, बिन शादी गोद ली थी बेटी

भारत रत्न बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी बाजपेयी 93 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए. 

वंदना यादव | Aug 17, 2018, 16:07 PM IST

भारत रत्न बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी बाजपेयी 93 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए. मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्‍में अटल बिहारी वाजपेयी का एक लंबा समय इस शहर में गुजरा है. पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के बटेश्वर से मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में बतौर टीचर नौकरी लगने के बाद यहीं शिफ्ट हो गए थे. माता-पिता की आठवीं संतान अटल की तीन बहनें और तीन भाई थे. आजीवन कुंवारे रहे अटल जी ने एक बेटी को गोद लिया था. भरे पूरे परिवार से आने वाले अटल ने अपना जीवन देश सेवा को समर्पित कर दिया. 
 

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93 वर्षीय उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए अटल जी

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मध्यप्रदेश के ग्वालियर के शिंदे का बाड़ा मोहल्ले में 25 दिसंबर, 1924 को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म में हुआ था. उनके पिता पंडित कृष्णबिहारी वाजपेयी टीचर थे और मां कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं. पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के बटेश्वर से मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में बतौर टीचर नौकरी लगने के बाद यहीं शिफ्ट हो गए थे. 

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मध्‍य प्रदेश के ग्‍वालियर में हुआ था अटल जी का जन्म

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अटल जी के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा तीन बड़े भाई अवधबिहारी, सदाबिहारी और प्रेमबिहारी वाजपेयी और तीन बहनें थीं. इनमें भतीजी कांति मिश्रा और भांजी करुणा शुक्‍ला हैं. वहीं, ग्वालियर में अटलजी के भतीजे दीपक वाजपेयी और भांजे सांसद अनूप मिश्रा हैं.  

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उत्तर प्रदेश के बटेश्वर से थे उनके पिता

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आजीवन अविवाहित रहने वाले अटल ने 1998 में उनकी  दोस्त राजकुमारी कौल की बेटी और उनकी दत्तक पुत्री नम्रता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य का परिवार भी साथ रहने आया. 

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अटल जी के जन्म से पहले ही परिवार मप्र शिफ्ट हो गया था

Atal Bihari Vajpayee Passed Away

खबरों की मानें तो राजकुमारी कौल के बारे में बताया जाता है कि जब अटल प्रधानमंत्री थे तब कौल वाजपेयी के घर की सदस्य थीं. उनके निधन के बाद वाजपेयी के आवास से जो प्रेस रिलीज जारी की गई थी, उसमें उन्हें वाजपेयी के ‘घर का सदस्य’ संबोधित किया गया था. 

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अटल जी वाजपेयी 1998 से 2004 तक देश के प्रधानमंत्री थे

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अटल बिहारी वाजपेयी का बचपन से लेकर जवानी तक का सफर इसी शहर की गलियों में तय हुआ था. लिखने-पढ़ने के शौकीन अटल बिहारी बाजपेयी बचपन से ही कवि सम्‍मेलन में जाकर कविताएं सुनना और नेताओं के भाषण सुनने में दिलचस्‍पी रखते थे. 

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अटल ने संयुक्त राष्ट्रसंघ में पहला भाषण हिंदी में दिया

BJP Leader Atal Bihari Vajpayee Passed Away

ग्‍वालियर के विक्‍टोरिया कॉलेज जिसे अब महारानी लक्ष्‍मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है में अटल की पढ़ाई हुई. यहीं से बीए करने के साथ ही अटल ने वाद विवाद की प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया. कॉलेज में उनके भाषणों ने उन्‍हें हीरो बना दिया और बाद में वो पूरे देश में एक हीरो के तौर पर जाने गए. 

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भारत छोड़ो आंदोलन में 23 दिन के लिए जेल भी गए

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1977 में जनता सरकार में विदेश मंत्री के तौर पर काम कर रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्रसंघ में अपना पहला भाषण हिंदी में देकर लोगों का दिल जीत लिया था. संयुक्त राष्ट्र में अटल बिहारी वाजपेयी का हिंदी में दिया भाषण उस वक्त काफी चर्चित रहा था. यह पहला मौका था जब यूएन जैसे बड़े अतंराष्ट्रीय मंच पर किसी भारतीय नेता ने हिंदी में अपनी बात कही थी. 

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विदेश मंत्री के तौर पर जनता सरकार में काम किया

former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee  passes away

अटल बिहारी वाजपेयी का यह भाषण यूएन में आए सभी प्रतिनिधियों को इतना पसंद आया कि उन्होंने खड़े होकर अटल जी के लिए तालियां बजाई थीं. अटल जी एक बेहतरीन नेता होने के साथ ही लेखन के भी जादूगर हैं. 

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी निभाई अहम भूमिका

former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee

सिर्फ एक राजनेता ही नहीं हैं, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अहम भूमिका भी निभाई थी. वे पढ़ाई बीच में ही छोड़कर पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए. साल 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में उन्हें 23 दिन के लिए जेल भी गए.  

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पोखरण परीक्षण करा कर भारत को बनाया परमाणु शक्ति

Atal Bihari Vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी 1951 से भारतीय राजनीति का हिस्सा बने. 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले अटल बिहारी बाजपेयी इस चुनाव में हार गए थे. लेकिन  साल 1957 में वह सासंद बने. अटल बिहारी वाजपेयी कुल 10 बार लोकसभा के सांसद रहे और इसी दौरान 1962 और 1986 में राज्यसभा के सांसद भी रहे.

(फोटो: IANS/PTI/Reuters)