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वाजपेयी के चहेते थे जेटली, मोदी कैबिनेट-1 में PM के साथ लिए थे कड़े फैसले, जानें उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

पूर्व वित्त मंत्री को खराब स्वास्थ्य के चलते एक्‍स्‍ट्राकारपोरल मेंब्रेन ऑक्‍सीजनेशन (ECMO) और इंट्रा ऐरोटिक बैलून (IABP) सपोर्ट पर रखा गया था. जेटली को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Aug 24, 2019, 13:51 PM IST

नई दिल्लीः पूर्व वित्‍त मंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता रहे अरुण जेटली का शनिवार को 12 बजकर 07 मिनट पर निधन हो गया. स्वास्थ्य कारणों के चलते वह 9 अगस्‍त से दिल्‍ली स्थित एम्‍स (AIIMS) में भर्ती थे, पूर्व वित्त मंत्री को खराब स्वास्थ्य के चलते एक्‍स्‍ट्राकारपोरल मेंब्रेन ऑक्‍सीजनेशन (ECMO) और इंट्रा ऐरोटिक बैलून (IABP) सपोर्ट पर रखा गया था. जेटली को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके चलते उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था. जिसके बाद आज 12:07 पर उन्होंने अंतिम सांस ली.

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श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया था

Graduated in Commerce from Shri Ram College of Commerce

पूर्व वित्त मंत्री का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर हुआ. उन्होंने दिल्ली के सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से ही अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया.

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24 मई 1982 को उनका संगीता जेटली से विवाह हुआ

 He was married to Sangeeta Jaitley on 24 May 1982

छात्र जीवन के दौरान ही उनका रुझान राजनीति की तरफ बढ़ने लगा और उनका राजनीतिक जुड़ाव इस तरह बढ़ा कि वह उनकी अंतिम सांस तक उनके साथ रहा. 24 मई 1982 को उनका संगीता जेटली से विवाह हुआ, जिससे उनके दो बच्चे रोहन और सोनाली जेटली हैं.

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जेपी ने अरुण जेटली को समिति का संयोजक बनाया था

JP made Arun Jaitley the convener of the committee

वकील से राजनीतिज्ञ बने अरुण जेटली का राजनीतिक करियर उनके छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था. 1973 से जेटली का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ था. दरअसल, 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' के लिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने अधिक से अधिक छात्रों को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय समिती बनाई थी, जिसमें जेपी ने अरुण जेटली को समिति का संयोजक बनाया था.

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1991 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जेटली को सदस्य के तौर पर शामिल किया था

 In 1991, Jaitley was included as a member of the BJP National Executive

आपातकाल के दौरान 1975-77 के बीच जेटली को मीसा एक्ट के तहत 19 महीनों तक नजरबंद रहना पड़ा था. मीसा हटने के बाद वह जनसंघ में शामिल हो गए थे. 1991 में अटल कैबिनेट में पहली बार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जेटली को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया था.

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काफी लंबे समय तक जेटली भाजपा प्रवक्ता रहे

Jaitley was BJP spokesperson for a long time

इसके बाद काफी लंबे समय तक जेटली भाजपा प्रवक्ता रहे. 1999 में जब एनडीए की सरकार बनी तो जेटली की प्रतिभा को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें अपने मंत्रीमंडल में जगह देते हुए केंद्रीय कैबिनेट में शामिल कर लिया. इस दौरान उन्होंने सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और विश्व व्यापार संगठन मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाली.

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वाजपेयी ने उन्हें अपने मंत्रीमंडल में जगह देते हुए केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया था

 Vajpayee included him in the Union Cabinet, giving him a place in his cabinet

इसके बाद काफी लंबे समय तक जेटली भाजपा प्रवक्ता रहे. 1999 में जब एनडीए की सरकार बनी तो जेटली की प्रतिभा को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें अपने मंत्रीमंडल में जगह देते हुए केंद्रीय कैबिनेट में शामिल कर लिया. इस दौरान उन्होंने सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और विश्व व्यापार संगठन मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाली.

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2000 में जेटली पहली बार राज्यसभा पहुंचे

Jaitley reached Rajya Sabha for the first time in 2000

2000 में राम जेठमलानी के अटल कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने न्याय, कानून और कंपनी मामलों की अतिरिक्त जिम्मेदारी जेटली को सौंप दी. 2000 में जेटली पहली बार राज्यसभा पहुंचे. जून 2009 में उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष नेता की भी जिम्मेदारी संभाली. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्रालय की दो बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं

 Prime Minister Narendra Modi entrusted him two major responsibilities of Union Finance and Ministry of Defense

2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जेटली की प्रतिभा और उनकी लगन को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्रालय की दो बड़ी जिम्मेदारियां सौंप दी. इस दौरान अरुण जेटली ने नोटबंदी और जीएसटी लागू करने जैसे बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाई.