जानिए क्या है ब्रेक्जिट और क्यों उलझ कर रह गया है उसमें ब्रिटेन

ब्रेक्जिट पर ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग तो होना चाहता है पर अभी तक प्रक्रिया की जटिलताएं ने गहरे मतभेद कर पैदा कर दिए हैं. 

नजदीकी बहुतम से हुआ था फैसला

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नजदीकी बहुतम से हुआ था फैसला

ब्रिटेन का यूरोपीय संघ अलग अलग होने का फैसला राजनैतिक कम लोकतांत्रिक ज्यादा था. जून 2016 में एक जनमत संग्रह से ब्रिटेन के 51.9% लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि ब्रिटेन को यूरोरीय संघ से अलग होना चाहिए. जबकि इसका विरोध करने वाले 48.11% लोग रहे. इस जनमत संग्रह में ब्रिटेन के लोगों को केवल यह फैसला करना था कि वे यूरोपीय संघ से अलग होना चाहते हैं कि नहीं. सो बहुमत के आधार पर ब्रिटेन की जनता ने अलग होने का फैसला किया. अब कैसे अलग होना है यह जिम्मेदारी केवल ब्रिटेन के नेताओं पर आ गई. (फोटो: Reuters)

आखिर क्या विवाद है जब अलगाव तय ही है

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आखिर क्या विवाद है जब अलगाव तय ही है

ब्रिटेन के जिन नेताओं पर जिम्मेदारी थी कि वे ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, उन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री थेरेसा मे के नेतृत्व में एक मसौदा तैयार किया और उसको लेकर यूरोपीय संघ से बातचीत की और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया. प्रक्रिया के इस प्रस्ताव के अंतिम रूप, जिसे यूरोपीय संघ की सहमति मिली जब अनुमोदन के लिए ब्रिटेन की संसद में रखा गया, संसद ने इसे खारिज कर दिया वह भी दो बार. अब ऐसे में लगने लगा है कि ब्रिटेन को बिना किसी डील के यूरोपीय संघ से अलग होना पड़ सकता है जो ब्रिटेन और यूरोप दोनों को आर्थिक रूप से नुकसानदायक सिद्ध होगा. इस स्थिति को टालने से यूरोपीय संघ और ब्रिटेन दोनों को नुकसान होगा. (फोटो: Reuters)

क्या है ब्रेक्जिट डील

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क्या है ब्रेक्जिट डील

जब ब्रिटेन यूरोपीय संघ से (29 मार्च 2019 को रात 11.00 बजे) अलग होगा तब तुरंत ही ब्रिटेन में यूरोपीय संघ के कानून ब्रिटेन के कानून की जगह ले लेंगे. यह कोई क्षणिक और तत्काल बदलाव नहीं हो सकता. इसमें कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. ऐसे में संक्रमण काल के दौरान (जो कि 31 दिसंबर 2020 तक होगा) ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के संबंध कैसे होंगे इसी के समझौते को ब्रिक्जिट निकासी समझौता (विथड्रॉल एग्रीमेंट) कहा जाता है. (फोटो: Reuters)

क्या होगा संक्रमण (ट्रांजीशन) के दौरान

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क्या होगा संक्रमण (ट्रांजीशन) के दौरान

इस दौरान ब्रिटेन यूरोपीय मार्केट का हिस्सा होगा, संघ के कस्टम नियमों के तहत रहेगा. लेकिन ब्रिटेन यूरोपीय संघ के फैसलों में भागीदार नहीं होगा. कुल मिला कर संक्रमण काल में दोनों के व्यवासायों को नए हालातों में ढलने का मौका और समय देगा. इस दौरान दोनों में नए सिरे से व्यापार वार्ताएं कर नए माहौल के मुताबिक व्यापारिक संबंध तय करने का अवसर भी मिलेगा. (फोटो: Reuters)

तो क्या ब्रेक्जिट पर फैसला नहीं हो पा रहा है

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तो क्या ब्रेक्जिट पर फैसला नहीं हो पा रहा है

यह सवाल काफी जटिल है. पहली बात तो यह कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ जिस डील को अंतिम रूप दिया है वह ब्रिटेन की संसद दो बार खारिज कर चुकी है. डील के कई प्रस्तावों पर खुद प्रधानमंत्री की पार्टी के सासंद उनके खिलाफ हैं. वहीं विपक्षी लेबर पार्टी और सरकार को समर्थन देने वाली यूके डेमोक्रेटिक पार्टी भी इस डील (केवल डील के, पर ब्रैक्जिट के नहीं) के खिलाफ है. वहीं यूरोपीय संघ का कहना है कि वह नई डील नहीं करेगा और ब्रिटेन की लेबर पार्टी के प्रमुख जिम कार्बिन भी कह रहे हैं कि वे सरकार के वर्तमान ब्रेक्जिट प्रस्ताव का समर्थन कभी नहीं करेंगे. (फोटो: IANS)

तो फिर झगड़ा क्या है?

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तो फिर झगड़ा क्या है?

झगड़ा इसी बात पर है कि अलग कैसे होने है और इसका तरीका क्या हो. ब्रिटेन के ज्यादातर सांसदों को प्रधानमंत्री का तरीका पसंद नहीं है. बहुत मुश्किल है कि (ब्रिटेन सांसदों के लिए) अब कोई सर्वमान्य तरीका निकल आए. इससे भी बड़ी बात नए मसौदे को यूरोपीय संघ से सहमति दिलवानी होगी जिसके लिए समय नहीं बचा है. इसी लिए 12 मार्च के मतदान के समय प्रधानमंत्री मे ने कहा था कि देश के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. मसौदे में सबसे विवादास्पद मुद्दा बैकस्टॉप नीति का है. (फोटो: IANS)

क्यों है बैकस्टॉप नीति की समस्या

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क्यों है बैकस्टॉप नीति की समस्या

ब्रेक्जिट मसौदे की बैकस्टॉप नीति के मुताबिक संक्रमण काल के दौरान में ब्रिटेन ईयू के ‘कस्टम यूनियन’ का सदस्य बना रहेगा यानि दिसंबर 2020 तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ के कस्टम संघ का सदस्य बना रहेगा और तब तक सामानों पर सीमा शुल्क नहीं लगेगा. इस दौरान संघ के कस्टम नियम ब्रिटेन पर लागू होंगे. यह आयरलैंड गणराज्य ( जो ब्रिटेन का हिस्सा नहीं है) और उत्तरी आयरलैंड (जो ब्रिटेन का हिस्सा है), के बीच सीमा पर भी लागू होगा. फिलहाल आयरलैंड द्वीप के दोनों ही हिस्से यूरोपीय संघ का हिस्सा हैं. ऐसे में इन दोनों के बीच कोई सीमा शुल्क नियमों जैसी समस्या नहीं है. अब संक्रमण काल में सीमा नियम कैसे हो यही झगड़ा है. इसमें जटिलताएं ऐसी हैं कि आयरलैंड के दोनों हिस्सों के बीच ही यूरोपीय संघ के सीमा नियम लागू हो जाएंगे जो कि ब्रिटेन किसी कीमत पर नहीं चाहता. (फोटो: Reuters)

शुरू से ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे थे

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शुरू से ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे थे

ब्रिटेन 1973 से यूरोपीय संघ का सदस्य था इससे ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के देशों के साथ व्यापार करने में आसानी हुई और उन्हें ब्रिटेन से. इसी बीच जब यूरोपीय संघ ने एक समान मुद्रा ‘यूरो’ अपनाई तो ब्रिटेन ने अपनी मुद्रा पाउंड को कायम रखा. ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की आवाजें शुरू से ही मुखर थीं लेकिन देश के दोनों प्रमुख दल कंजरवेटिव और लेबर दोनों ही देश को यूरोपीय संघ से अलग करने के खिलाफ रहे. धीरे-धीरे विरोध के स्वर बढ़ने लगे. (फोटो: Reuters)

जनमत संग्रह हुआ और नतीजा उम्मीदों के विपरीत रहा

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जनमत संग्रह हुआ और नतीजा उम्मीदों के विपरीत रहा

यूनाइटेड किंगडम इंडिपेंड्स पार्टी (यूकेआईपी) जो दूसरे जनमत संग्रह की मांग उठा रही थी की लोकप्रियता 21वीं सदी की शुरुआत से बढ़ने लगी और 2014 के चुनाव में वह सबसे सफल पार्टी बन गई. कंजरवेटिव पार्टी के डेविड कैमरून ने प्रधानमंत्री पद संभाला जिन्होंने जनमत संग्रह का वादा किया था. कैमरून ने खुद जनमत संग्रह में ब्रेक्जिट का विरोध किया था. जनमत संग्रह में हारने पर उन्होंने इस्तीफा दिया और थेरेसा मे देश की प्रधानमंत्री बनीं और तमाम विरोध के बावजूद वे ब्रेक्जिट प्रक्रिया को पूरा करने के लिए डटी हुई हैं. (फोटो: Reuters)

 

क्या है वर्तमान स्थिति

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क्या है वर्तमान स्थिति

फिलहाल मे सरकार ने जो यूरोपीय संघ से डील की थी वह ब्रिटेन की संसद ने खारिज कर दी और साथ ही ब्रेक्जिट की तारीख आगे बढ़ाने पर भी सहमति दे दी है. फिलहाल तो ब्रिटेन ने अलगाव की तारीख आगे बढ़ाने के बात पर एक जुटता दिखाई है. अब भी ब्रिटेन के पास कई विकल्प हैं जिसमें एक और जनमत संग्रह (ब्रेक्जिट के समर्थन या विरोध में) कराना भी शामिल है. अभी कोई दावा करने की स्थिति में नहीं है कि आखिर होगा क्या.  (फोटो: Reuters)

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