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क्‍या है पितृदोष ? घर बैठे जानिए और कीजिए उपाय

Pitra Dosh: शास्त्र के अनुसार सूर्य (Surya) तथा राहू (Rahu) जिस भी भाव में बैठते हैं, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते हैं. व्यक्ति की कुण्डली (Kundali) में एक ऐसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है. इस दोष को पितृदोष (Pitra Dosh) के नाम से जाना जाता है

Sep 12, 2019, 11:44 AM IST

नई दिल्ली: शास्त्र के अनुसार सूर्य (Surya) तथा राहू (Rahu) जिस भी भाव में बैठते हैं, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते हैं. व्यक्ति की कुण्डली (Kundali) में एक ऐसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है. इस दोष को पितृदोष (Pitra Dosh) के नाम से जाना जाता है. ज्योतिष (Jyotish) के अनुसार,  पितृदोष और पितृ ऋण से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली कही जाती है. जन्म पत्री में यदि सूर्य पर शनि राहु-केतु की दृष्टि या युति द्वारा प्रभाव हो तो जातक की कुंडली में पितृ ऋण की स्थिति मानी जाती है. ऐसी स्थिति में जातक के सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक उन्नति में अनेक बाधाएं उत्पन्न होती हैं.

 

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पितृ दोष के लक्षण

Symptoms of Pitra Dosh

विवाह ना होना या विवाह होने में बहुत समस्या होना. वैवाहिक जीवन में कलह होना. परीक्षा में बार-बार फेल होना. नौकरी का न मिलना या बार-बार नौकरी छूटना. गर्भपात या गर्भधारण में बहुत ज्यादा समस्या. बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना. मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना. अपने आप पर विश्वास न होना या कोई निर्णय न ले पाना. बात-बात पर क्रोध आना. बहुत मेहनत के बावजूद व्यापार न चलना.

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क्यों होता है पितृदोष?

what is Pitra dosh

पूर्व जन्म में अगर माता-पिता की अवहेलना की गई हो. अपने दायित्वों का ठीक तरीके से पालन न किया गया हो. अपने अधिकारों और शक्तियों का दुरुपयोग किया गया हो, तो इसका असर जीवन पर दिखने लगता है. व्यक्ति को जीवन में हर कदम पर असफलता मिलती है.

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किन योगों के होने पर पितृ-दोष होता है?

When does Pitra dosh happen?

कुंडली में राहु का प्रभाव ज्यादा हो तो इस तरह की समस्या हो जाती है. राहु अगर कुंडली के केंद्र स्थानों या त्रिकोण में हो, अगर राहु का सम्बन्ध सूर्य या चन्द्र से हो. अगर राहु का सम्बन्ध शनि या बृहस्पति से हो. राहु अगर द्वितीय या अष्टम भाव में हो.

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कैसे करें पितृ-दोष का निवारण?

How to prevent Pitra Dosh?

अमावस्या के दिन किसी निर्धन को भोजन कराएं, खीर जरूर खिलाएं. पीपल का वृक्ष लगवाएं और उसकी देखभाल करें. ग्रहण के समय दान अवश्य करें.  श्रीमदभगवद्गीता का नित्य प्रातः पाठ करें.  अगर मामला ज्यादा जटिल हो तो, श्रीमदभगवद्गीता का पाठ कराएं, अपने कर्मों को जहां तक हो सके शुद्ध रखने का प्रयास करें.

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पितृदोष के प्रकार

Types of Pitra Dosh

सबसे खतरनाक: जब पितृदोष प्रथम स्तर पर हो. पितृदोष प्रथम स्तर पर होता है, यदि सूर्य इन ग्रहों में से किसी के साथ किसी भी भाव या घर में होता है. यह सबसे खतरनाक दोष है.

मध्यम प्रभाव: पितृदोष जब द्वितीय स्तर पर हो. इस पितृदोष का संयोग तब होता है. जब उपरोक्त ग्रहों में से किसी भी या सभी के साथ सूर्य की छाया होती है, तो यह दूसरे स्तर का दोष होता है. यह पितृ दोष प्रथम स्तर से भयंकर नहीं होता है, लेकिन इसकी मध्यवर्ती प्रभाव होता है.

हल्का स्वभाव और प्रभाव: पितृदोष का तीसरा हल्का स्तर तब होता है जब सूर्य को शत्रु की राशि में या ऊपर के नकारात्मक ग्रहों की राशि में होता है.