close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ये है चित्रकारों का गांव, घर से लेकर सड़कों तक बनीं हैं कई सारी कलाकृति, देखिए PICS

मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां एक, दो नहीं बल्कि सैंकड़ों की तादात में चित्रकार रहते हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 12, 2019, 16:08 PM IST

हम बात कर रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय चित्रकार जनगण श्याम के गृहग्राम पाटनगढ़ की जहां गांव के तमाम बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग चित्रकारी की कला में जलवा बिखेर रहे हैं. दिवंगत जनगण श्याम की प्रेरणा से गांव के लोगों ने चित्रकारी की कला को सीखा था जो अब उनकी कमाई का जरिया बन गया है..

1/6

कपड़े, दीवार, मिट्टी हर जगह दिखती है चित्रकारी

Clothing, wall, soil looks everywhere

गांव के तमाम लोग इस कला में इतने पारंगत हो चुके हैं कि केनवास, दीवार,कपड़े, मिट्टी आदि में जीवंत चित्र बना देते हैं. अंतर्राष्ट्रीय गोंडी चित्रकार स्वर्गीय जनगण श्याम का आज जन्मदिन है,12 जून 1962 को जनगण श्याम का जन्म पाटनगढ़ के एक गरीब परिवार में हुआ था, आर्थिक तंगी के चलते वो शिक्षित नहीं हो पाये लेकिन उन्होंने अपनी चित्रकारिता से देश विदेश में आदिवासी संस्कृति को एक अलग पहचान दिलाने का काम किया.

 

2/6

कई देशों में सम्मानित किए जा चुके हैं जनगण श्याम

Ganga Shyam is honored in many countries

स्वर्गीय जनगण श्याम को चित्रकारी के क्षेत्र में जापान, साउथ अफ्रीका व पेरिस में भी सम्मानित किया जा चुका है, जनगण श्याम का निधन जापान में तीन जुलाई 2001 में रहस्मयी तरीके से हुआ था. 

 

3/6

गांव के लोग श्याम को मानते हैं आदर्श

People of the village believe in Shyam

पाटनगढ़ गांव में अंतर्राष्ट्रीय चित्रकार स्वर्गीय जनगण श्याम का जन्मदिन ग्रामवासियों द्धारा बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है. जनगण श्याम को गांव के लोग अपना आदर्श मानते हैं और उनकी प्रेरणा से ही आज गांव के तमाम लोग कुशल और दक्ष चित्रकार बन गए हैं. हम आपको बता दें कि इस गांव की आबादी करीब 1000 है जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक लोग चित्रकारी के काम में जुटे हुए हैं, वर्षभर में यहां एक हजार से अधिक चित्र बनाए जाते हैं. 

4/6

कैनवास पर भी की जाती है चित्रकारी

Painting on canvas is also done

प्रकृति के साथ आदिवासी देवी देवताओं, पशुओं, आदिवासी परंपराओं, प्राकृतिक वातावरण, जंगली जानवरों का चित्रण पेटिंग में होता है. आदिवासी कथाओं और परंपराओं का चित्रण भी पेटिंग में किया जाता है. पेटिंग की चित्रकारी पेपर सीट के साथ कैनवास पर की जाती है. पाटनगढ़ के जो कलाकार भोपाल में बस गए हैं वे यहां की पेटिंग भोपाल तक ले जाते हैं.

5/6

विदेशी पर्यटकों को आकर्षक करती है पेटिंग

Petting attracts foreign tourists

प्रदर्शनी लगाते हैं,यहां विदेशी आकर्षक पेटिंगों का क्रय करते हैं. विदेशों में भी प्रदर्शनी लगाई जाती है. यहां तीन समूह भी सक्रिय है, जो पेटिंग करने के साथ लोगों को इसके लिए प्रेरित भी करते हैं. 

6/6

क्यों खास होती है गोंडी चित्रकारिता

Why is Gondi paintings special

गोंडी चित्रकारिता की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इसमें रेखाओं और बिन्दुओं का पूरा कमाल होता है. पूरी पेटिंग बिन्दू और रेखा पर ही आधारित होती है. गोंडी पेटिंग कल्पना में परंपरा का गहरा बोध भी कराती है. हर चित्र के पीछे आदिवासी कहानी या परंपरा छिपी होती है. संगीत का चित्र में रूपांतरण भी साफ दिखाई देता है. गोंडी पेटिंग फोटो जनित न होकर कल्पना की होती है. इसमें प्रकृति के साथ आदिवासियों का कैसा जुड़ाव है यह चित्रण किया जाता है. स्थानीय चित्रकारों की मानें तो वो अपनी इस कला के जरिये महीने में कभी 20 से 30 हजार रूपये तक कमा लेते हैं.